Thursday, October 1, 2026
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LIFE SENTENCE: सुप्रीम कोर्ट करेगा जांच…क्या दोहरे हत्या मामले में दो बार दी जा सकती है उम्रकैद की सजा?

LIFE SENTENCE: सुप्रीम कोर्ट ने यह तय करने पर सहमति जताई कि क्या एक व्यक्ति को दोहरे हत्या के अपराध में दो बार उम्रकैद की सजा दी जा सकती है और क्या ये सजाएं एक के बाद एक (consecutive) चल सकती हैं?

कोर्ट ने जारी किया नोटिस, आठ हफ्तों में मांगा जवाब

न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने कहा, मामला केवल इस बिंदु पर सीमित है कि क्या धारा 302 के तहत दोषी ठहराए गए व्यक्ति को दो बार उम्रकैद की सजा देना और उन्हें एक के बाद एक चलाना संविधान पीठ के 2016 के फैसले के अनुरूप है या नहीं। इस पर आठ हफ्तों में जवाब मांगा गया है। दरअसल, यह मामला 2015 के पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के एक फैसले से जुड़ा है, जो 2010 के दोहरे हत्या कांड पर आधारित था।

हाईकोर्ट ने सुनाई थी दो बार उम्रकैद की सजा, मृत्युदंड से किया था इनकार

ट्रायल कोर्ट ने दोषी को मौत की सजा सुनाई थी, लेकिन पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने उसे उम्रकैद में बदल दिया। हाईकोर्ट ने आरोपी को IPC की धारा 302 के तहत दो बार उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि चूंकि उम्रकैद का मतलब होता है कि दोषी जीवनभर जेल में रहेगा, इसलिए दो बार उम्रकैद देना ‘औपचारिक’ है।

हाईकोर्ट ने कहा: छूट मिलने पर दूसरी सजा शुरू हो सकती है

कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि अक्सर राज्य सरकारें दोषियों को समय-पूर्व रिहाई देती हैं या माफी देती हैं। ऐसे में अगर पहली उम्रकैद की सजा में छूट दी जाती है, तो दूसरी उम्रकैद की सजा उस तारीख से शुरू मानी जाएगी, जिस दिन पहली सजा खत्म मानी गई।

2016 के संविधान पीठ के फैसले का हवाला

याचिकाकर्ता की वकील ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ के जुलाई 2016 के फैसले का हवाला दिया। उन्होंने कहा, “संविधान पीठ ने स्पष्ट किया है कि भले ही कई मामलों में उम्रकैद की सजा दी जा सकती है, लेकिन उन्हें एक के बाद एक चलाने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।”

हाईकोर्ट का आदेश संविधान पीठ के फैसले के विपरीत

वकील ने कहा कि हाईकोर्ट का यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय कानून के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि इसी आदेश के कारण दोषी छूट के लिए आवेदन नहीं कर पा रहा है और शीर्ष अदालत से अपील की कि कम से कम हाईकोर्ट के इस हिस्से को रद्द किया जाए। अब सुप्रीम कोर्ट इस संवैधानिक और व्यावहारिक सवाल पर विचार करेगा कि क्या दोहरे हत्या जैसे मामलों में उम्रकैद की सजा एक के बाद एक चलाई जा सकती है या नहीं।

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