X-CORP case: सोशल मीडिया कंपनी X Corp ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत सरकारी अधिकारियों द्वारा कंटेंट हटाने के नोटिस भेजने के अधिकार को कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
रेलवे मंत्रालय से एक वीडियो हटाने का नोटिस मिला
कंपनी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील केजी राघवन ने कोर्ट में कहा, “अगर हर टॉम, डिक और हैरी अफसर नोटिस भेजने लगे तो क्या होगा?” इस भाषा पर केंद्र सरकार और कोर्ट दोनों ने कड़ी आपत्ति जताई। X Corp ने कोर्ट को बताया कि हाल ही में उसे रेलवे मंत्रालय से एक वीडियो हटाने का नोटिस मिला है, जिसमें हैदराबाद में एक महिला कार चलाते हुए रेलवे ट्रैक पर दिख रही है। कंपनी का कहना है कि यह वीडियो गैरकानूनी नहीं है और अधिकारियों द्वारा इस तरह के आदेश देना अधिकारों का दुरुपयोग है।
केंद्र सरकार ने जताई आपत्ति
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “वे अफसर हैं, टॉम, डिक और हैरी नहीं। वे वैधानिक अधिकारी हैं और उनके पास कानूनी अधिकार हैं। अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को ऐसा अहंकार नहीं दिखाना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भारत में बिना नियमों के नहीं चल सकता।
कोर्ट ने भी जताई नाराजगी
न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना ने भी X Corp के वकील की भाषा पर आपत्ति जताते हुए कहा, “मैं इस भाषा पर आपत्ति करता हूं। ये भारत सरकार के अधिकारी हैं।”
कंपनी ने मांगा स्पष्ट आदेश
X Corp ने कोर्ट से मांग की है कि वह स्पष्ट करे कि आईटी एक्ट की धारा 79(3)(b) के तहत सरकारी अधिकारी कंटेंट ब्लॉक करने का आदेश नहीं दे सकते। कंपनी का कहना है कि ऐसा कोई आदेश केवल धारा 69A और उससे जुड़े नियमों के तहत ही दिया जा सकता है। साथ ही, कंपनी ने यह भी मांग की है कि जब तक तय प्रक्रिया के तहत आदेश न हो, तब तक मंत्रालय कोई जबरदस्ती या दंडात्मक कार्रवाई न करें।
डिजिटल मीडिया हाउसों की भी दलील
डिजिटल मीडिया हाउसों के एक संगठन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आदित्य सोंधी ने कहा कि जब कंटेंट हटाने का आदेश दिया जाता है, तो इससे सीधे कंटेंट क्रिएटर्स प्रभावित होते हैं। हालांकि, केंद्र सरकार ने इस हस्तक्षेप का विरोध किया और कहा कि X Corp जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनी को किसी तीसरे पक्ष के समर्थन की जरूरत नहीं है।
अगली सुनवाई 8 जुलाई को
कोर्ट ने X Corp को अपनी याचिका में विभिन्न मंत्रालयों को शामिल करने की अनुमति दी है। साथ ही केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह अगली सुनवाई से पहले इस हस्तक्षेप याचिका पर अपना जवाब दाखिल करे। अब इस मामले की अंतिम सुनवाई 8 जुलाई को होगी।

