Tuesday, August 4, 2026
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FRIVOLOUS PLEA: मनमानी याचिका दायर करने पर कोर्ट ने व्यक्ति पर ₹10 हजार का जुर्माना लगाया

FRIVOLOUS PLEA: दिल्ली की एक अदालत ने एक व्यक्ति पर ₹10 हजार का जुर्माना लगाया है।

अरोड़ा ने सेशंस कोर्ट में पुनर्विचार याचिका लगाई

कोर्ट ने कहा कि उसने एक मनमानी और बेबुनियाद याचिका दायर की, जिससे न्याय प्रणाली का दुरुपयोग हुआ। अदालत ने यह भी कहा कि अमीर लोग बेवजह मुकदमेबाजी कर न्याय प्रक्रिया को बाधित करते हैं, इसे रोका जाना जरूरी है। यह मामला कपिल अरोड़ा नाम के व्यक्ति से जुड़ा है, जिसने अपनी स्वतंत्रता में कटौती के लिए मुआवजे की मांग करते हुए मजिस्ट्रेट कोर्ट में याचिका दायर की थी। यह याचिका अप्रैल 2025 में खारिज हो गई थी, जिसके खिलाफ अरोड़ा ने सेशंस कोर्ट में पुनर्विचार याचिका लगाई।

जीएसटी चोरी के आरोप में हुआ था गिरफ्तार

अरोड़ा को अक्टूबर 2024 में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) विभाग ने जीएसटी चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया था। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद सेशंस कोर्ट ने 27 नवंबर को उसे शर्तों के साथ जमानत दी। हालांकि, जमानत की प्रक्रिया पूरी करने के लिए मजिस्ट्रेट कोर्ट में उसकी जमानतदारों की जांच लंबित थी। जांच रिपोर्ट 28 नवंबर को मिली, लेकिन एक क्लेरिकल गलती के कारण अरोड़ा को 29 नवंबर तक रिहा नहीं किया जा सका। कोर्ट स्टाफ को चेतावनी देकर मामला निपटा दिया गया।

दोबारा आरोपी ने दायर की याचिका

इसके बावजूद अरोड़ा ने मजिस्ट्रेट कोर्ट में फिर से याचिका लगाई कि उसकी स्वतंत्रता का उल्लंघन हुआ है और इसके लिए जिम्मेदारी तय की जाए और मुआवजा दिया जाए। मजिस्ट्रेट ने यह याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद अरोड़ा ने सेशंस कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की।

जज ने कहा-यहीं मामला खत्म होना चाहिए

जज सौरभ प्रताप सिंह ललर ने 9 जून को इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह मामला यहीं खत्म हो जाना चाहिए था। अगर अरोड़ा को लगता था कि गलती जानबूझकर हुई है, तो उसे न्यायिक नहीं बल्कि प्रशासनिक स्तर पर शिकायत करनी चाहिए थी। जज ने कहा कि आरोपी के पते और जमानतदार की जांच जरूरी थी क्योंकि मामला गंभीर था। अरोड़ा ने यह भी आरोप लगाया था कि CGST अधिकारियों ने बिना अनुमति के तलाशी ली और उनके पास यह साबित करने का कोई सबूत नहीं था कि उसने 2018 से 2024 के बीच ₹1,284 करोड़ की बिक्री की और ₹200 करोड़ का जीएसटी चोरी किया।

याचिका दबाव बनाने की कोशिश लगती है: जज

जज ललर ने कहा कि यह याचिका मजिस्ट्रेट कोर्ट और CGST अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश लगती है। उन्होंने कहा, “इस तरह की याचिकाएं न्याय प्रणाली में अनुशासनहीनता और भ्रम फैलाती हैं। न्याय तक आसान पहुंच का मतलब यह नहीं कि कोई भी मनमानी याचिका दायर करे। ऐसी याचिकाओं पर सख्त जुर्माना लगना चाहिए।”

दुरुपयोग करनेवालों को परिणाम भुगतना होगा: अदालत

अदालत ने कहा कि जो लोग कोर्ट की प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हैं, उन्हें इसके परिणाम भुगतने चाहिए। जज ने कहा, “अमीर लोग जब बेवजह मुकदमेबाजी करते हैं तो इससे अन्य मामलों में देरी होती है और न्याय प्रणाली धीमी पड़ती है। कोर्ट को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कानून का दुरुपयोग न हो।” इसी आधार पर कोर्ट ने अरोड़ा पर ₹10 हजार का जुर्माना लगाया।

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