SC News: सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म निर्माता शैलेश कुमार सिंह के खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज कर दिया है।
मध्यस्थता के लिए पहले 25 लाख रुपए की शर्त
शीर्ष कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर भी नाराजगी जताई, जिसमें सिंह को मध्यस्थता के लिए पहले 25 लाख रुपए शिकायतकर्ता को देने की शर्त रखी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि सिविल विवादों को सुलझाने के लिए आपराधिक कानून का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
यह है मामला
यह मामला सिंह की कंपनी कर्मा मीडिया एंड एंटरटेनमेंट एलएलपी और शिकायतकर्ता की कंपनी पोलरॉइड मीडिया के बीच मौखिक व्यापारिक समझौते से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने 7 मार्च 2025 को दिए आदेश में इस विवाद को मध्यस्थता के लिए भेजा था, लेकिन साथ ही शर्त रखी थी कि सिंह पहले 25 लाख रुपए शिकायतकर्ता को दें।
कोर्ट ने कहा- एफआईआर में कोई आपराधिक मामला नहीं बनता
एफआईआर 9 जनवरी 2025 को आगरा के हरिपर्वत थाने में दर्ज की गई थी। इसमें भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 60(बी), 316(2) और 318(2) के तहत धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के आरोप लगाए गए थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह पूरी तरह सिविल विवाद है और इसमें कोई आपराधिक मामला नहीं बनता।
एफआईआर को “क्रिमिनल प्रोसेस का दुरुपयोग” बताया
कोर्ट ने कहा- पुलिस की मदद से पैसे वसूलना आपराधिक प्रक्रिया का दुरुपयोग
बेंच में शामिल जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन ने कहा कि अगर मौखिक समझौते के तहत कोई राशि देनी है, तो उसका समाधान सिविल कोर्ट में किया जाना चाहिए, न कि आपराधिक शिकायत के जरिए। कोर्ट ने एफआईआर को “क्रिमिनल प्रोसेस का दुरुपयोग” बताया।
हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर याचिका को वसूली का जरिया बना दिया, जो न्यायिक प्रक्रिया के खिलाफ है। कोर्ट ने कहा, “हमें हाईकोर्ट के आदेश की प्रक्रिया से काफी असहजता है। यह वह तरीका नहीं है, जिसकी अपेक्षा एक हाईकोर्ट से की जाती है।”
भजनलाल केस के सिद्धांतों की अनदेखी
कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने एफआईआर को रद्द करने से जुड़े सुप्रसिद्ध भजनलाल केस (1992) में तय किए गए सिद्धांतों की अनदेखी की। हाईकोर्ट ने यह जांचने के बजाय कि एफआईआर में कोई आपराधिक मामला बनता है या नहीं, सीधे मध्यस्थता का आदेश दे दिया और वह भी 25 लाख रुपए की शर्त पर।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सिविल कोर्ट में जाए शिकायतकर्ता
अंत में सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर को रद्द करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता यदि कोई राशि वसूलना चाहता है, तो वह सिविल कोर्ट में जाए या अन्य वैधानिक उपाय अपनाए। आपराधिक प्रक्रिया का सहारा नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए सिविल और क्रिमिनल मामलों की सीमाएं स्पष्ट कीं।

