Thursday, October 1, 2026
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Advocate Summon: मीडिया नैरेटिव से प्रभावित नहीं होते फैसले…जजों के पास यूट्यूब इंटरव्यू देखने का समय नहीं

Advocate Summon: सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि उसके फैसले और टिप्पणियां किसी भी मीडिया नैरेटिव से प्रभावित नहीं होतीं।

ईडी के खिलाफ मीडिया में गलत नैरेटिव बनाया जा रहा: मेहता

कोर्ट ने यह बात उस समय कही जब सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के खिलाफ मीडिया में एक गलत नैरेटिव बनाया जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ईडी द्वारा वकीलों को उनके कानूनी राय देने के लिए समन भेजने के मामले में स्वत: संज्ञान (सुओ मोटो) से शुरू हुई सुनवाई कर रही थी। सुनवाई की शुरुआत में CJI ने कहा कि उन्होंने मीडिया रिपोर्ट पढ़कर हैरानी जताई थी, जिसमें सीनियर वकीलों को ईडी द्वारा समन भेजने की बात थी।

SG ने कहा- सरकार टकराव नहीं चाहती, लेकिन मीडिया में गलत नैरेटिव बन रहा

SG तुषार मेहता ने शुरुआत में ही स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार इस मामले में टकराव का रुख नहीं अपनाना चाहती। लेकिन उन्होंने कहा कि मीडिया में ईडी के खिलाफ एक सोची-समझी रणनीति के तहत नैरेटिव बनाया जा रहा है। उन्होंने कोर्ट से अपील की कि वह इन नैरेटिव्स से प्रभावित न हो।

CJI ने कहा- हम कई मामलों में एजेंसियों की सीमा लांघने की बात देख रहे हैं

SG ने कहा, “मैं यह ईडी की ओर से नहीं, बल्कि खुद कह रहा हूं कि एक संस्था के खिलाफ नैरेटिव बनाने की कोशिश हो रही है। कुछ मामलों में सीमा लांघी गई हो सकती है, लेकिन…” इस पर CJI ने बीच में टोकते हुए कहा, “हम कई मामलों में यह देख रहे हैं, ऐसा नहीं है कि हमें यह नजर नहीं आ रहा।

SG ने कहा- यूट्यूब इंटरव्यू और मीडिया से नैरेटिव बन रहा है

SG ने कहा कि कोर्ट को यूट्यूब इंटरव्यू और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर राय नहीं बनानी चाहिए, क्योंकि इससे नैरेटिव बनता है। इस पर CJI ने कहा कि कोर्ट अपने अनुभव और केस के तथ्यों के आधार पर ही फैसला करता है। उन्होंने कहा कि ईडी कई बार अच्छे-खासे फैसलों के खिलाफ भी सिर्फ अपील करने के लिए अपील करता है।

जस्टिस चंद्रन ने SG से पूछा- जब हम वो नैरेटिव देखते ही नहीं, तो कैसे प्रभावित होंगे?

SG ने कहा कि कोर्ट को यह भी देखना चाहिए कि क्या कोई वकील कोर्ट के बाहर अपने क्लाइंट के पक्ष में नैरेटिव बना सकता है। इस पर जस्टिस चंद्रन ने कहा, “अगर हम वो नैरेटिव देखते ही नहीं, तो आप कैसे कह सकते हैं कि हम उससे प्रभावित हो रहे हैं? लोग अपनी राय रख सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम प्रभावित हो रहे हैं।”

CJI ने SG से पूछा- क्या आपने कोई ऐसा फैसला देखा है जो केस के तथ्यों पर आधारित न हो?

CJI ने SG से पूछा, “क्या आपने कोई ऐसा फैसला देखा है जो हमने बिना केस के तथ्यों के आधार पर दिया हो? एक भी उदाहरण बताइए।” उन्होंने यह भी कहा कि जजों के पास यूट्यूब इंटरव्यू देखने का समय नहीं होता।

मामला: वकीलों को समन भेजने पर स्वत: संज्ञान

यह मामला उस समय सामने आया जब गुजरात पुलिस ने एक आरोपी का पक्ष रखने वाले वकील को समन भेजा। इस पर जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने चिंता जताई और कहा कि वकीलों को समन भेजना न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता को प्रभावित करेगा। इसके बाद 4 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्वत: संज्ञान लिया।

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