Tuesday, August 4, 2026
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WOMEN SAFETY: ओडिशा में 15 साल की बच्ची को जलाने की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हमें शर्म आती है

WOMEN SAFETY: ओडिशा में 15 साल की एक लड़की को जिंदा जलाने की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कड़ी नाराजगी जताई।

हमारे निर्देशों का जमीन पर असर दिखना चाहिए: कोर्ट

शीर्ष कोर्ट ने इसे “शर्मनाक” और “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि ग्रामीण इलाकों की स्कूल जाने वाली लड़कियों, गृहिणियों और बच्चों को सशक्त करने के लिए ठोस और असरदार कदम उठाने की जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि हमें सभी पक्षों से सुझाव चाहिए कि कैसे इन कमजोर और आवाजहीन वर्गों को सुरक्षित और सशक्त बनाया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि हमारे निर्देशों का जमीन पर असर दिखना चाहिए।

तहसील स्तर तक जागरूकता जरूरी

बेंच ने कहा कि कुछ तात्कालिक और कुछ दीर्घकालिक निर्देश जारी किए जाने चाहिए, ताकि तहसील स्तर तक महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक और सशक्त किया जा सके। कोर्ट ने सुझाव दिया कि पैरा लीगल वॉलंटियर्स, खासकर महिलाएं, तहसील स्तर पर नियुक्त की जा सकती हैं। इसके अलावा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद भी ली जा सकती है।

हर जिले में वन-स्टॉप सेंटर, लेकिन तहसील स्तर तक पहुंच जरूरी

केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि हर जिले में वन-स्टॉप सेंटर बनाए गए हैं, जो संकट में फंसी महिलाओं की मदद करते हैं। साथ ही, सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे और फेस स्कैन सिस्टम लगाने की योजना है, ताकि यौन अपराधियों की पहचान कर समय पर कार्रवाई की जा सके। हालांकि कोर्ट ने कहा कि वन-स्टॉप सेंटर अच्छी पहल है, लेकिन इसे तहसील स्तर तक ले जाना जरूरी है, ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को इसका लाभ मिल सके।

याचिकाकर्ता ने कहा- महाराष्ट्र और तमिलनाडु में भी हुईं ऐसी घटनाएं

सुप्रीम कोर्ट वुमन लॉयर्स एसोसिएशन की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट महालक्ष्मी पावनी ने कहा कि कुछ दिन पहले ओडिशा में नाबालिग को जलाया गया और इसी तरह की घटनाएं महाराष्ट्र और तमिलनाडु में भी हुई हैं। उन्होंने कहा, “आखिर ये कब तक चलता रहेगा? कोर्ट को महिला सुरक्षा के लिए कुछ निर्देश देने चाहिए।”

केंद्र का हलफनामा रिकॉर्ड पर नहीं, अगली सुनवाई अगले हफ्ते

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि केंद्र सरकार का हलफनामा अभी रिकॉर्ड पर नहीं है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई अगले हफ्ते के लिए तय की है।

पैन-इंडिया गाइडलाइन की मांग वाली याचिका पर सुनवाई

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिसंबर 2023 को एक जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी थी, जिसमें पूरे देश के लिए महिला, बच्चों और ट्रांसजेंडर के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने की गाइडलाइन बनाने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया था कि देशभर में महिलाओं, लड़कियों और बच्चों के खिलाफ यौन अपराध लगातार हो रहे हैं। हाल ही में कोलकाता में एक महिला डॉक्टर के साथ गैंगरेप की घटना ने कानून व्यवस्था की खामियों, लालफीताशाही, राजनीतिक हस्तक्षेप और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

यह था याचिकाकर्ता का अनुरोध

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से अनुरोध किया कि वह ‘पैरेंस पेट्री’ सिद्धांत के तहत महिलाओं, बच्चों और ट्रांसजेंडर के मौलिक अधिकारों की रक्षा करे, जिसमें सुरक्षित माहौल, कार्यस्थल की सुरक्षा, स्वच्छता, व्यक्तिगत गरिमा और शारीरिक सुरक्षा शामिल है।

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