Thursday, September 24, 2026
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ANTI-SIKH RIOTS: 40 साल पुरानी एफआईआर को CFSL भी नहीं पढ़ सका…किस केस में आई बात, पढ़िए

ANTI-SIKH RIOTS: 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़ी कानपुर की एक एफआईआर को केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) भी नहीं पढ़ सकी।

एफआईआर की स्पष्ट कॉपी हासिल करें: कोर्ट

उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि यह एफआईआर 40 साल पुरानी है और इसकी लिखावट इतनी खराब है कि CFSL भी इसके कंटेंट को डिकोड नहीं कर पाया। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने राज्य सरकार का हलफनामा रिकॉर्ड में लिया और कहा कि जब भी जांच एजेंसियां इस एफआईआर की स्पष्ट कॉपी हासिल करें, तो कोर्ट को तुरंत जानकारी दी जाए ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।

सिर्फ दो हिंदी शब्द आंशिक रूप से पढ़े जा सके

कोर्ट ने कहा, “CFSL जैसी विशेषज्ञ संस्था भी एफआईआर नंबर …/1984 को नहीं पढ़ सकी। रिपोर्ट में बताया गया है कि सिर्फ दो हिंदी शब्द आंशिक रूप से पढ़े जा सके, बाकी शब्द बिखरे हुए और अस्पष्ट हैं। बेंच ने कहा, “ऐसे में हम मानते हैं कि इस एफआईआर पर आगे कोई प्रभावी कार्रवाई इस समय नहीं हो सकती। लेकिन यदि एजेंसियां इसकी स्पष्ट कॉपी प्राप्त कर लेती हैं, तो कोर्ट को सूचित किया जाए ताकि उचित निर्देश दिए जा सकें।

35 साल बाद SIT ने की थी जांच

यह एफआईआर उन 9 मामलों में शामिल है, जिनकी जांच 35 साल बाद SIT ने शुरू की थी, लेकिन सबूतों के अभाव में इन्हें बंद कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट इस समय 1984 के कानपुर दंगों में करीब 130 सिखों की हत्या के मामलों को दोबारा खोलने की याचिका पर सुनवाई कर रहा है।

11 मामलों में चार्जशीट दाखिल, लेकिन हाईकोर्ट ने रोक लगाई

कोर्ट को बताया गया कि SIT की जांच के बाद 11 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इनमें से कई मामलों में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी, जिससे पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने में देरी हो रही है। बेंच ने कहा, “हम आरोपी के अधिकारों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहते, लेकिन हाईकोर्ट से अनुरोध करते हैं कि इन मामलों को प्राथमिकता से सुना जाए।”

गवाहों की उपलब्धता समय के साथ मुश्किल

कोर्ट ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि यह घटना 1984 में हुई थी और अब जाकर जांच पूरी हुई है। समय बीतने के साथ गवाहों को पेश करना मुश्किल होता जा रहा है, इसलिए हाईकोर्ट को इन मामलों की सुनवाई तेजी से करनी चाहिए।

राज्य सरकार को निर्देश

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील रुचिरा गोयल ने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में चार आपराधिक अपीलें लंबित हैं, जिनमें देरी को माफ कर दिया गया है और अब राज्य के महाधिवक्ता कार्यालय द्वारा इन्हें सक्रिय रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, उत्तर प्रदेश के महाधिवक्ता से आग्रह करते हैं कि इन मामलों में अनुभवी और आपराधिक कानून में विशेषज्ञ राज्य के वकीलों को नियुक्त करें ताकि हाईकोर्ट में प्रभावी पैरवी हो सके। सभी संबंधित मामलों में राज्य सरकार के वकीलों को सुप्रीम कोर्ट का आदेश हाईकोर्ट में पेश करने को कहा गया है।

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