HomeBREAKING INDIAJudge's Row 17: पहली बार एक जस्टिस का केस "XXX बनाम भारत...

Judge’s Row 17: पहली बार एक जस्टिस का केस “XXX बनाम भारत सरकार” शीर्षक से दायर…यह है पूरा मामला

Judge’s Row 17: सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा से सख्त सवाल पूछते हुए कहा कि उनका आचरण भरोसा नहीं जगाता।

इन-हाउस जांच समिति ने दाेषी पाया

कोर्ट ने पूछा कि जब इन-हाउस जांच समिति ने उन्हें कैश बरामदगी मामले में दोषी पाया, तो उन्होंने उसी समय इसे चुनौती क्यों नहीं दी और अब सुप्रीम कोर्ट क्यों आए हैं? जस्टिस वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इन-हाउस जांच समिति की रिपोर्ट को अमान्य घोषित करने की मांग की है। याचिका में उनका नाम नहीं है और इसे “XXX बनाम भारत सरकार” शीर्षक से दायर किया गया है।

सरकारी आवास से जली हुई नकदी मिलने का मामला

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने पूछा कि जब इन-हाउस जांच समिति के सामने पेश हुए थे, तो उसी समय आपत्ति क्यों नहीं जताई? कोर्ट ने कहा कि अगर उन्हें समिति की प्रक्रिया पर आपत्ति थी, तो उसी समय सुप्रीम कोर्ट आना चाहिए था। यह रिपोर्ट दिल्ली हाईकोर्ट में कार्यकाल के दौरान उनके सरकारी आवास से जली हुई नकदी मिलने के मामले में उनके खिलाफ misconduct की पुष्टि करती है।

मुख्य न्यायाधीश की भूमिका पर टिप्पणी

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने कहा कि इन-हाउस प्रक्रिया 1999 से लागू है और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को केवल एक औपचारिक पद नहीं माना जा सकता। जस्टिस दत्ता ने कहा, “CJI को अगर किसी जज के खिलाफ गंभीर आरोपों की जानकारी मिलती है, तो वह राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को सूचित कर सकते हैं। अगर आरोप गंभीर हैं, तो CJI के पास कार्रवाई की सिफारिश करने का अधिकार है।”

कपिल सिब्बल ने उठाए संवैधानिक सवाल

जस्टिस वर्मा की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि संविधान के अनुच्छेद 124 और 218 के तहत जज को हटाने की पूरी प्रक्रिया तय है और इन-हाउस जांच समिति की सिफारिशें असंवैधानिक हैं। उन्होंने कहा कि इन-हाउस जांच केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसमें गवाहों की जिरह या साक्ष्यों की जांच जैसी कानूनी प्रक्रियाएं नहीं होतीं।

दलील…यह एक खतरनाक परंपरा की शुरुआत हो सकती

सिब्बल ने कहा कि इस तरह की सिफारिश से जज की प्रतिष्ठा को गहरा नुकसान होता है और यह एक खतरनाक परंपरा की शुरुआत हो सकती है। उन्होंने कहा कि CJI की सिफारिश संसद की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अब बहुत देर हो चुकी है

बेंच ने कहा कि सिब्बल जो मुद्दे उठा रहे हैं, वे गंभीर हैं, लेकिन उन्हें पहले उठाया जाना चाहिए था। कोर्ट ने कहा, “आपका आचरण भरोसा नहीं जगाता। आपने पहले क्यों नहीं चुनौती दी?” कोर्ट ने यह भी कहा कि CJI की सिफारिश को केवल इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता क्योंकि मीडिया में कुछ रिपोर्ट आई हैं।

FIR की मांग पर भी सवाल

सुनवाई के दौरान वकील मैथ्यूज जे नेडुमपारा द्वारा जस्टिस वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग पर भी कोर्ट ने सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि क्या उन्होंने पुलिस में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है? कोर्ट ने जस्टिस वर्मा की याचिका और नेडुमपारा की अलग याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
haze
30 ° C
30 °
30 °
58 %
3.6kmh
65 %
Thu
37 °
Fri
39 °
Sat
39 °
Sun
35 °
Mon
39 °

Recent Comments