Thursday, September 24, 2026
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ORPHANS-EDUCATION: ऐसे अनाथ बच्चों का सर्वे हो…जिन्हें मुफ्त शिक्षा का अधिकार नहीं मिला

ORPHANS-EDUCATION: सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि वे उन अनाथ बच्चों का सर्वे करें जिन्हें मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत शिक्षा नहीं मिल पाई है।

अनाथ बच्चों की स्थिति पर चिंता जताई गई थी

कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन अनाथ बच्चों को इस कानून के तहत स्कूलों में दाखिला मिला है, उनका भी सर्वे किया जाए। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने केंद्र सरकार से कहा कि वह 2027 में होने वाली जनगणना में अनाथ बच्चों का डेटा शामिल करने पर विचार करे। कोर्ट एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें देखरेख और संरक्षण की जरूरत वाले अनाथ बच्चों की स्थिति पर चिंता जताई गई थी।

योग्य बच्चों को उनके आसपास के स्कूलों में दाखिला मिले

बेंच ने कहा कि राज्य सरकारें यह भी बताएं कि जिन बच्चों को शिक्षा का अधिकार नहीं मिला, उसके क्या कारण हैं। सभी राज्यों को इस संबंध में हलफनामा दाखिल करना होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि सर्वे और डेटा कलेक्शन के साथ-साथ यह सुनिश्चित किया जाए कि योग्य बच्चों को उनके आसपास के स्कूलों में दाखिला मिले।

चार हफ्ते में पालन का निर्देश

कोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों को चार हफ्तों के भीतर इन निर्देशों का पालन करने को कहा है। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि गुजरात, दिल्ली, मेघालय और सिक्किम जैसे राज्यों ने पहले ही अधिनियम की धारा 12(1)(c) के तहत कमजोर वर्गों के लिए तय 25% कोटे में अनाथ बच्चों को शामिल करने के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिए हैं।

अन्य राज्यों को भी नोटिफिकेशन जारी करने की सलाह

बेंच ने कहा कि अन्य राज्य भी इस तरह का नोटिफिकेशन जारी करने पर विचार करें और इस पर हलफनामा दाखिल करें। अगली सुनवाई 9 सितंबर को होगी।

जनगणना में अनाथों के लिए अलग कॉलम की मांग

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने केंद्र से मांग की कि जनगणना में अनाथ बच्चों के लिए अलग से कॉलम होना चाहिए। इस पर कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि सरकार को इससे अनाथ बच्चों का डेटा मिल जाएगा। मेहता ने कहा, “यह होना चाहिए। मैं इस पर विचार करूंगा क्योंकि अनाथ हमारी जिम्मेदारी हैं।”

याचिकाकर्ता ने कहा- देश में अनाथों के लिए कोई ठोस योजना नहीं

याचिकाकर्ता ने कहा कि भारत में कमजोर वर्गों के बच्चों को छात्रवृत्ति, आरक्षण, नौकरी और लोन जैसी कई सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन अनाथ बच्चों के लिए कोई ठोस योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि यूनिसेफ के अनुसार भारत में करीब 2.5 करोड़ अनाथ बच्चे हैं, लेकिन हमारे पास इनका कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है।

2027 में होगी अगली जनगणना

भारत की 16वीं जनगणना 2027 में होगी। बर्फबारी वाले इलाकों जैसे लद्दाख में इसकी संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर 2026 होगी, जबकि बाकी देश में 1 मार्च 2027 को जनगणना की जाएगी।

2018 में कोर्ट ने याचिका पर विचार किया था

सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2018 में उस याचिका पर विचार करने की सहमति दी थी, जिसमें समाज से कोई संबंध न रखने वाले अनाथ बच्चों को एससी/एसटी और ओबीसी की तरह शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने की मांग की गई थी।

छोटे टाइटल के साथ रिपोर्ट के अन्य पहलू:

  1. कोर्ट की प्राथमिकता:
    योग्य अनाथ बच्चों को पास के स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए समानांतर प्रयास जरूरी बताए गए।
  2. राज्यों की जिम्मेदारी:
    सभी राज्यों को दो तरह के सर्वे करने होंगे—एक, जिन्हें दाखिला मिला; दूसरा, जिन्हें नहीं मिला और कारण क्या हैं।
  3. केंद्र की भूमिका:
    जनगणना में अनाथ बच्चों का डेटा शामिल करने पर विचार करने को कहा गया।
  4. याचिकाकर्ता की चिंता:
    देश में अनाथ बच्चों के लिए कोई ठोस नीति नहीं, जबकि अन्य कमजोर वर्गों को कई सुविधाएं मिलती हैं।
  5. सकारात्मक पहलू:
    कोर्ट ने कहा कि सभी हाईकोर्ट में जुवेनाइल जस्टिस कमेटियां हैं और इस विषय पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है।
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