Thursday, October 1, 2026
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Domestic Violence Act: शादी के बाद ससुराल में रहने वाला घर ‘शेयर्ड हाउसहोल्ड’, बहू को वहीं रहने का हक

Domestic Violence Act: ‘शेयर्ड हाउसहोल्ड’ (साझा गृह) को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का बेहद अहम फैसला माना जा रहा है, इसमें माता-पिता के अस्वीकार के बाद की स्थिति स्पष्ट की गई है।

सिर्फ कानूनी प्रक्रिया के ज़रिए ही पत्नी को निकालना संभव

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, अगर कोई पत्नी शादी के तुरंत बाद अपने पति और ससुराल वालों के साथ जिस घर में रहती है, वही उसका ‘शेयर्ड हाउसहोल्ड’ (साझा गृह) माना जाएगा। ऐसे में, भले ही बाद में पति को उसके माता-पिता ने ‘डिसओन’ (अस्वीकार) कर दिया हो, पत्नी को उस घर में रहने का पूरा अधिकार रहेगा। जस्टिस संजयव नारूला की बेंच ने कहा, “जब पत्नी शादी के बाद पति और ससुराल वालों के साथ किसी घर में रहती है, तो वह घरेलू संबंध में उसी घर में रहती है। यह घर घरेलू हिंसा कानून (DV Act) की धारा 2(एस) के तहत साझा गृह कहलाता है। एक बार यह साबित हो जाए, तो पत्नी को उस घर में रहने का अधिकार मिल जाता है और उसे सिर्फ कानूनी प्रक्रिया के ज़रिए ही निकाला जा सकता है।”

यह था मामला

पति-पत्नी की शादी 2010 में हुई थी। एक साल बाद, नवंबर 2011 में दोनों किराए के मकान में चले गए। ससुरालवालों का कहना था कि वे पहले ही बेटे को संपत्ति से बेदखल कर चुके थे, जबकि पत्नी का आरोप था कि उसे ज़बरदस्ती घर से निकालकर किराए के कमरे में भेजा गया। पत्नी ने घरेलू हिंसा कानून के तहत शिकायत दर्ज की और साझा गृह (ग्राउंड फ्लोर) में रहने का अधिकार मांगा। वहीं, सास ने भी DV Act के तहत सुरक्षा की मांग करते हुए शिकायत दी।

ट्रायल कोर्ट और सेशन कोर्ट का फैसला

ट्रायल कोर्ट ने माना कि पत्नी को साझा गृह में रहने का अधिकार है और उसे घर खाली करने या किराया देने का आदेश नहीं दिया जा सकता। सास और बहू—दोनों की अपीलें सेशन कोर्ट ने भी खारिज कर दीं।

हाईकोर्ट ने कहा – दोनों पक्षों के हित सुरक्षित रहें

जस्टिस नारूला ने कहा कि निचली अदालतों के आदेश सही हैं। “पहली मंज़िल ससुरालवालों के पास रहे और ग्राउंड फ्लोर पत्नी के पास—यह व्यवस्था दोनों के हितों को संतुलित करती है। यह किसी पक्ष को बेघर नहीं करती और न ही किसी का कब्ज़ा छीनती है। हाईकोर्ट ने साफ किया कि यह आदेश पत्नी को बेदखल होने से बचाने के लिए है, न कि ससुरालवालों पर कोई दंड लगाने के लिए। कोर्ट ने इसे “प्रपोर्शनैलिटी और न्यायसंगत सुरक्षा” का उदाहरण बताया।

IN THE HIGH COURT OF DELHI AT NEW DELHI
CRL.REV.P. 219/2021KHUSHWANT KAUR …..Petitioner versus SMT GAGANDEEP SIDHU …..Respondent

CRL.REV.P. 223/2021
DALJIT SINGH & ANR. …..Petitioners versus SMT GAGANDEEP SIDHU …..Respondent

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