Thursday, October 1, 2026
HomeLaworder HindiJudicial officers: देशभर में न्यायिक अधिकारियों की वरिष्ठता के लिए एक समान...

Judicial officers: देशभर में न्यायिक अधिकारियों की वरिष्ठता के लिए एक समान मानक जरूरी… यह रही सुप्रीम टिप्पणी

Judicial officers: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, देशभर में निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों की वरिष्ठता तय करने के लिए किसी तरह का एक समान राष्ट्रीय मानदंड (Uniform Criteria) जरूरी है, ताकि उनकी धीमी और असमान करियर प्रगति की समस्या को दूर किया जा सके।

पांच जजों की संविधान पीठ में सुनवाई

मुख्य न्यायाधीश B R Gavai की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने यह स्पष्ट किया कि अदालत का उद्देश्य हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में दखल देना नहीं है, बल्कि न्यायिक सेवा में पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित करना है। पीठ में जस्टिस सूर्यकांत, विक्रम नाथ, के. विनोद चंद्रन और जॉयमाल्य बागची शामिल थे। कोर्ट हायर ज्युडिशियल सर्विस (HJS) में वरिष्ठता तय करने के लिए देशभर में समान मानदंड तय करने पर विचार कर रही है।

‘सिविल जज अक्सर जिला जज तक नहीं पहुंच पाते’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कई राज्यों में सिविल जज (जूनियर डिविजन) के रूप में भर्ती हुए अधिकारी अपने पूरे करियर में प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज (PDJ) तक नहीं पहुंच पाते, हाईकोर्ट जज बनना तो दूर की बात है। इससे कई प्रतिभाशाली युवा वकील न्यायिक सेवा में आने से हिचकते हैं।

हाईकोर्ट्स के अधिकार नहीं छीने जाएंगे: सुप्रीम कोर्ट

CJI गवई ने कहा, हाईकोर्ट्स की विवेकाधीन शक्ति हम नहीं छीन रहे। लेकिन हर राज्य में अलग-अलग नीतियां क्यों होनी चाहिए? कुछ समानता तो होनी ही चाहिए। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट का उद्देश्य व्यक्तिगत वरिष्ठता विवाद सुलझाना नहीं है, बल्कि देशभर के लिए एक “गाइडलाइन फ्रेमवर्क” तैयार करना है ताकि पदोन्नति में निष्पक्षता और एकरूपता बनी रहे।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किया विरोध

सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी, जो इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से पेश हुए, ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वरिष्ठता का मसला हर राज्य की परिस्थिति पर निर्भर करता है और इसे हाईकोर्ट्स पर ही छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा, “सभी राज्यों की स्थिति एक जैसी नहीं है। अगर समान नियम लागू किए गए तो असंतुलन पैदा होगा।”

अमीकस ने रखी अहम बातें

अमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ भटनागर ने कहा कि अधिकांश राज्यों में पदोन्नति ‘वरिष्ठता आधारित’ होती है, न कि ‘मेधावी प्रदर्शन’ पर।
इससे प्रमोशन पाने वाले वरिष्ठ अधिकारी अक्सर रिटायर हो जाते हैं, जबकि सीधे भर्ती हुए युवा अधिकारी ऊपर पहुंच जाते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि जिला जज के लिए विचार किए जाने वाले नामों में 50% प्रमोटी और 50% डायरेक्ट भर्ती से हों, ताकि संतुलन बना रहे।

मामले पर सुनवाई जारी

मामले की सुनवाई 1989 में ऑल इंडिया जजेज़ एसोसिएशन (AIJA) द्वारा दाखिल याचिका से शुरू हुई थी, जिसमें देशभर के निचले न्यायिक अधिकारियों की करियर प्रगति और पदोन्नति प्रणाली में समानता की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 7 अक्टूबर को इस मुद्दे को पांच जजों की संविधान पीठ के हवाले किया था।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
broken clouds
30 ° C
30 °
30 °
63 %
2.7kmh
81 %
Thu
30 °
Fri
33 °
Sat
33 °
Sun
33 °
Mon
33 °

Recent Comments