Sunday, August 16, 2026
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Women Reservation: देश में सबसे बड़ी अल्पसंख्यक कौन है? महिलाएं…किस केस में रही यह सुप्रीम टिप्पणी

Women Reservation: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 2023 के ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लागू करने की मांग वाली याचिका पर जवाब मांगा है।

केंद्र को मामले में जवाब के लिए नोटिस

इस कानून में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने केंद्र को नोटिस जारी करते हुए कहा, महिलाएं देश की सबसे बड़ी अल्पसंख्यक हैं। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, “हमारे संविधान की प्रस्तावना कहती है कि हर नागरिक को राजनीतिक और सामाजिक समानता का अधिकार है। देश में सबसे बड़ी अल्पसंख्यक कौन है? महिलाएं — लगभग 48 फीसदी आबादी। यह महिलाओं की राजनीतिक समानता का सवाल है।”

याचिकाकर्ता का दावा

याचिकाकर्ता कांग्रेस नेता जया ठाकुर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने दलील दी कि स्वतंत्रता के 75 साल बाद भी महिलाओं को प्रतिनिधित्व के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम लोकसभा और विधानसभा की कुल सीटों में से एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करता है। हालांकि अदालत ने कहा कि कानून लागू करने का अधिकार कार्यपालिका यानी सरकार का होता है और अदालतें ऐसे नीति मामलों में सीमित हस्तक्षेप कर सकती हैं।

संसद में महिला प्रतिनिधित्व पर्याप्त नहीं

जया ठाकुर ने अपनी याचिका में मांग की है कि कानून को सीमा निर्धारण (delimitation) की प्रक्रिया का इंतजार किए बिना तुरंत लागू किया जाए। याचिका में कहा गया है कि कानून के लागू होने में “सीमा निर्धारण के बाद” जैसी शर्त को शून्य और अवैध घोषित किया जाए, ताकि 33% आरक्षण तत्काल प्रभाव से लागू किया जा सके। याचिका में यह भी कहा गया है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में समाज के हर वर्ग का प्रतिनिधित्व जरूरी है, लेकिन पिछले 75 वर्षों में संसद और विधानसभाओं में महिलाओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं रहा है।

राष्ट्रपति की ओर से कानून अधिसूचित

गौरतलब है कि यह संवैधानिक संशोधन 28 सितंबर 2023 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद अधिसूचित हुआ था। संसद के दोनों सदनों ने इसे लगभग सर्वसम्मति से पारित किया था। हालांकि, इस कानून के अमल में आने में वक्त लगेगा क्योंकि इसे अगले जनगणना और उसके बाद होने वाले सीमा निर्धारण अभ्यास के बाद ही लागू किया जाना है। उसी प्रक्रिया से तय होगा कि कौन सी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

अधिसूचना के तहत 15 वर्षों तक रहेगा आरक्षण

महिलाओं के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में यह आरक्षण 15 वर्षों के लिए रहेगा, जिसे बाद में संसद बढ़ा सकती है। उल्लेखनीय है कि 1996 से ही संसद में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने का प्रयास किया जा रहा है। 2010 में राज्यसभा ने इस तरह का बिल पारित किया था, लेकिन लोकसभा में वह पारित नहीं हो सका। वर्तमान में लोकसभा में महिला सांसदों की हिस्सेदारी करीब 15 प्रतिशत है, जबकि कई विधानसभाओं में यह आंकड़ा 10 प्रतिशत से भी कम है।

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