Thursday, October 1, 2026
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Consumer Case: लाभ के उद्देश्य से खरीदे गए सामान या सेवाओं पर उपभोक्ता कानून लागू नहीं…यह रही सुप्रीम टिप्पणी

Consumer Case: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अगर कोई वस्तु या सेवा लाभ कमाने (profit generation) के उद्देश्य से खरीदी गई है, तो खरीदार को ‘उपभोक्ता’ (consumer) नहीं माना जा सकता और वह उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत शिकायत दर्ज नहीं कर सकता।

कंपनी के अपील पर सुनवाई

न्यायमूर्ति जे.बी. पारडीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने यह निर्णय एम/एस पॉली मेडिक्योर लिमिटेड की अपील पर सुनाया। अदालत ने राज्य और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोगों के फैसलों को बरकरार रखते हुए कहा कि कंपनी की शिकायत “रखरखाव योग्य नहीं” थी। पीठ ने कहा कि यदि कोई कंपनी अपने व्यावसायिक कार्यों को स्वचालित (automate) करने के लिए सॉफ्टवेयर खरीदती है, तो यह खरीद “व्यावसायिक उद्देश्य (commercial purpose)” की श्रेणी में आती है और ऐसे में खरीदार को उपभोक्ता नहीं माना जाएगा।

न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा ने कहा

“जब वस्तु या सेवा की खरीद का सीधा संबंध लाभ अर्जन (generation of profits) से हो, तो खरीदार को उपभोक्ता नहीं माना जा सकता।”

2019 में दायर एक शिकायत से जुड़ा था मामला

अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि लेन-देन का मकसद मुनाफा कमाना है, तो वह व्यावसायिक उद्देश्य के लिए किया गया सौदा माना जाएगा, और ऐसे मामलों में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 2(1)(d) लागू नहीं होगी। यह मामला पॉली मेडिक्योर लिमिटेड, जो मेडिकल उपकरणों का निर्माता और निर्यातक है, द्वारा दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (SCDRC) में 2019 में दायर एक शिकायत से जुड़ा था।

18 प्रतिशत ब्याज की मांग की थी कंपनी ने

कंपनी ने एम/एस ब्रिलियो टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ शिकायत करते हुए आरोप लगाया था कि उसने अपनी एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट डाक्यूमेंटेशन प्रणाली को सुगम बनाने के लिए सॉफ्टवेयर खरीदा था, लेकिन भुगतान के बावजूद सॉफ्टवेयर सही तरह से काम नहीं किया। कंपनी ने लाइसेंस और डेवलपमेंट कॉस्ट की वापसी के साथ 18 प्रतिशत ब्याज की मांग की थी।

अब सुप्रीम कोर्ट में दिए आदेश

राज्य आयोग (SCDRC) ने 19 अगस्त 2019 को शिकायत खारिज करते हुए कहा कि कंपनी ने यह खरीद व्यावसायिक उद्देश्य से की थी, इसलिए उसे उपभोक्ता नहीं माना जा सकता। बाद में राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग (NCDRC) ने जून 2020 में राज्य आयोग के आदेश को बरकरार रखा, जिसके बाद पॉली मेडिक्योर ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने अब अपील को खारिज करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में कंपनियां उपभोक्ता कानून के तहत राहत नहीं मांग सकतीं, क्योंकि उनका उद्देश्य व्यापारिक लाभ होता है, न कि व्यक्तिगत उपभोग।

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