Thursday, October 1, 2026
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BANKS LOAN DEFAULT: दूर-दराज कोर्ट में चेक बाउंस केस कर उधारकर्ताओं को परेशान करते हैं…फटकार पर बैंक कर्मी कांपे

BANKS LOAN DEFAULT: सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा छोटे उधारकर्ताओं को परेशान करने की प्रवृत्ति पर कड़ी नाराजगी जताई।

न्याय पाने में लोगों को होती है भारी मुश्किल

अदालत ने कहा कि कई बैंक चेक बाउंस मामलों को लेन-देन वाली जगह से सैकड़ों किलोमीटर दूर दर्ज करवा रहे हैं, जिससे लोगों को न्याय पाने में भारी मुश्किल होती है।न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमल्य बागची की पीठ ने कहा कि यह “कानून का दुरुपयोग” है और अदालत इस मुद्दे की गंभीरता से जांच कर कानून स्पष्ट करेगी। यह टिप्पणी उस समय आई जब गोला नरेश कुमार यादव नामक व्यक्ति ने कोटक महिंद्रा बैंक द्वारा चंडीगढ़ की अदालत में दर्ज एक चेक बाउंस केस को आंध्र प्रदेश के कर्नूल जिले के आदोनी कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की।

याचिकाकर्ता का दावा

याचिकाकर्ता के वकील पी. मोहित राव ने अदालत को बताया कि बैंक ने मामला चंडीगढ़ में दर्ज कराया है, जबकि पूरा लेन-देन आंध्र प्रदेश में हुआ था। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता बैंक का नियमित भुगतानकर्ता था, लेकिन मामूली डिफॉल्ट पर उसके खिलाफ केस दर्ज कर दिया गया। इस पर अदालत ने बैंक से पूछा कि जब पूरा लेन-देन आंध्र प्रदेश में हुआ, तो मामला चंडीगढ़ में क्यों दायर किया गया। बैंक की ओर से कहा गया कि उनकी शाखा चंडीगढ़ में भी है, जो इस लोन से संबंधित मामलों को संभालती है। वकील राव ने कहा कि यह देशभर में आम समस्या बन चुकी है और सुप्रीम कोर्ट में रोज़ाना ऐसे मामले आ रहे हैं जहां छोटे उधारकर्ताओं को केस ट्रांसफर करवाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ता है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत की यह रही कड़ी टिप्पणी

“सिर्फ इसलिए कि आपका दफ्तर चंडीगढ़ में है, आप वहीं केस दर्ज कर देंगे? यह तो छोटे उधारकर्ताओं के साथ सीधा उत्पीड़न है। क्या आपको लगता है कि आंध्र प्रदेश की अदालतों में न्याय नहीं मिलेगा? चंडीगढ़ की अदालतें खाली नहीं बैठी हैं।”

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने यह भी कहा

“आप लोग ऑक्टोपस की तरह हैं। आपके दफ्तर हर जगह हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप मनमाने शहरों में केस दर्ज करेंगे। हम देशभर में अदालतें खोल रहे हैं ताकि लोगों को न्याय मिले, लेकिन आप अब भी उन्हें दूर-दराज कोर्ट में घसीट रहे हैं। यह कहां की न्याय तक पहुंच (access to justice) है?”

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने जोड़ा —

“सिर्फ इसलिए कि आप किसी भी शहर में शिकायत दर्ज करा सकते हैं, इसका मतलब यह नहीं कि आप छोटे व्यापारियों या उधारकर्ताओं को परेशान करेंगे। अगर लेन-देन श्रीनगर में हुआ है, तो आप शिकायत कन्याकुमारी या कोयंबटूर में नहीं कर सकते। यह कानून का दुरुपयोग है।”

पक्षकारों की सुविधा का सवाल है, अधिकार क्षेत्र का नहीं

बैंक की ओर से कहा गया कि शिकायत ‘नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट’ की धारा के तहत दायर की गई है और 2015 के संशोधन में इसकी अनुमति दी गई है। इस पर न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि सवाल अधिकार क्षेत्र (jurisdiction) का नहीं, बल्कि पक्षकारों की सुविधा (convenience) का है। अदालत ने कहा कि वह इस मुद्दे पर विस्तृत आदेश जारी करेगी ताकि भविष्य में ऐसी शिकायतों पर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय हो सकें। सुप्रीम कोर्ट ने यादव की याचिका स्वीकार करते हुए मामला आंध्र प्रदेश की अदालत में ट्रांसफर कर दिया और याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि वह पता करें कि बैंक ने अब तक कितने ऐसे केस चंडीगढ़ में दर्ज किए हैं और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है।

यह है मामला

मामला आंध्र प्रदेश की एक कॉटन ट्रेडिंग कंपनी से जुड़ा था, जिसने 2021 में कोटक महिंद्रा बैंक की आदोनी शाखा से ओवरड्राफ्ट और क्रेडिट सुविधाएं ली थीं। यादव इस लोन में गारंटर थे। बाद में भुगतान में देरी होने पर बैंक ने अप्रैल 2023 में लोन वापसी का नोटिस भेजा और फिर कई अदालतों, जिनमें ऋण वसूली न्यायाधिकरण (DRT) भी शामिल है, में मुकदमेबाजी शुरू हो गई।

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