Thursday, September 24, 2026
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Bar Election Supervision: 16 राज्य बार काउंसिलों में चुनाव की होगी निगरानी… सुप्रीम कोर्ट ने बनाई हाई-पावर कमेटी

Bar Election Supervision: सुप्रीम कोर्ट ने 16 राज्य बार काउंसिलों में होने वाले चुनावों की पारदर्शी निगरानी के लिए एक हाई-पावर सुपरवाइजरी कमेटी गठित की है।

31 मार्च 2026 तक नई निर्वाचित बॉडी होना जरूरी

अदालत ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया “निष्पक्ष, न्यायसंगत और पारदर्शी” होनी चाहिए और हर राज्य बार काउंसिल में 31 मार्च 2026 तक नई निर्वाचित बॉडी होना जरूरी है।जस्टिस सूर्यकांत, उज्जल भुयान और एन कोटिस्वर सिंह की पीठ ने कहा कि यह हाई-पावर पैनल सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में होगा। इसके अन्य सदस्य—एक हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और बार काउंसिल चुनावों में भाग लेने वाले एक वरिष्ठ अधिवक्ता होंगे। अदालत ने आदेश खुले कोर्ट में सुनाते समय इन नामों की घोषणा नहीं की।

चार चरणों में होंगे चुनाव

पीठ ने बताया कि उत्तर प्रदेश और तेलंगाना में मतदान 31 जनवरी को होगा। आंध्र प्रदेश, दिल्ली, त्रिपुरा सहित कुछ राज्यों में फरवरी में दूसरे चरण में चुनाव होंगे। शेष राज्यों के लिए तीसरे और चौथे चरण की तिथियां भी तय की गईं। सभी राज्यों में चुनाव राज्य-स्तरीय हाई-पावर मॉनिटरिंग कमेटियों की सीधी निगरानी में होंगे, जिनमें विभिन्न हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज शामिल होंगे।

लॉ डिग्री वेरिफिकेशन पर चिंता

BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा समेत कई वकीलों ने कहा कि लॉ डिग्री वेरिफिकेशन ड्राइव के चलते चुनावों में देरी हो सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वकील प्रोविजनल वोट डाल सकेंगे। यदि डिग्री फर्जी पाई गई, तो उसके परिणाम बाद में भुगतने होंगे। डिग्री वेरिफिकेशन जारी रह सकता है, लेकिन यह चुनाव टालने का आधार नहीं है।

पीठ ने कहा,

“वेरिफिकेशन, डिलीमीटेशन की तरह है—यह चुनावों में बाधा नहीं बन सकता।”

विश्वविद्यालयों को एक सप्ताह में वेरिफिकेशन का आदेश

अदालत ने सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया कि वे एक विशेष टीम गठित करें जिसमें लॉ विभाग का वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य शामिल हो, राज्य बार काउंसिलों से प्राप्त डिग्रियों का एक सप्ताह में सत्यापन करें, वेरिफिकेशन शुल्क नियमों के अनुसार ही लें—कोई अतिरिक्त वसूली नहीं होगी।

नामांकन से लेकर मतदान तक का शेड्यूल

अदालत ने नामांकन, स्क्रूटनी,Withdrawal और मतदान की पूरी टाइमलाइन तय करने का निर्देश दिया और कहा कि पहले चरण की अधिसूचना 31 जनवरी तक जारी हो। किसी भी शिकायत या समयसीमा बढ़ाने का मामला हाई-पावर कमेटी देखेगी।

BCI पर भरोसे की कमी का मुद्दा

अदालत ने इससे पहले कहा था कि BCI और राज्य बार काउंसिलों के प्रति वकीलों में “ट्रस्ट डेफिसिट” है, इसलिए चुनावों की निगरानी के लिए स्वतंत्र पैनल जरूरी हैं।

यह रही पृष्ठभूमि

सुप्रीम कोर्ट पहले ही पंजाब व हरियाणा बार काउंसिल चुनाव 31 दिसंबर तक कराने, उत्तर प्रदेश बार काउंसिल चुनाव 31 जनवरी 2026 तक कराने का आदेश दे चुका है। यह मामला उन याचिकाओं से संबंधित है जिनमें BCI वेरिफिकेशन रूल्स, 2015 के नियम 32 को चुनौती दी गई है, जो राज्य बार काउंसिल सदस्यों के कार्यकाल को बढ़ाने की शक्ति देती है।

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