DHCBA Lawyers: चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत ने गुरुवार को वकीलों से आह्वान किया कि वे केवल अपनी शिकायतें रखने तक सीमित न रहें, बल्कि न्याय वितरण प्रणाली के प्रशासनिक सुधारों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।
सम्मान समारोह में CJI हुए शामिल
दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में CJI ने कहा, जब बार (वकील) और बेंच (जज) मिलकर प्रशासनिक नवाचारों की जिम्मेदारी लेते हैं, तो पूरी व्यवस्था पर जनता का भरोसा और बढ़ता है।
सुधार केवल नेक इरादे वाले नहीं, व्यावहारिक भी हों
CJI कांत ने कहा— “वकीलों को केवल समस्याओं को उठाने से आगे बढ़कर सक्रिय भागीदारी दिखानी चाहिए। मैं बार के सदस्यों से अपील करता हूँ कि वे सिस्टम को सुधारने के लिए व्यावहारिक सुझाव दें, नई प्रणालियों के लिए खुद को वॉलंटियर करें और विचार-विमर्श की प्रक्रियाओं में शामिल हों। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कानूनी सुधार केवल कागजों पर अच्छे न हों, बल्कि जमीन पर लागू करने योग्य (Workable) भी हों।”
बार एसोसिएशन ने उठाई जजों की कमी और प्रमोशन की मांग
कार्यक्रम के दौरान DHCBA के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने संस्थान से जुड़ी कुछ गहरी चिंताएं जताईं:
- वकीलों की उपेक्षा का मुद्दा: हरिहरन ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट में 47,000 वकील हैं, लेकिन अगस्त 2024 से अब तक केवल तीन वकीलों को ही जज के रूप में पदोन्नत (Elevate) किया गया है।
- पदों की रिक्तियां: उन्होंने बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट में जजों के कुल 60 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 44 जज काम कर रहे हैं। यानी 27 प्रतिशत पद अभी भी खाली हैं।
- इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी: बार की ओर से अदालतों में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) की कमी का मुद्दा भी उठाया गया।
CJI का आश्वासन: समय पर होगा समाधान
बार की चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए CJI सूर्य कांत ने कहा कि न्याय प्रणाली इन मुद्दों का उचित समय पर समाधान करेगी। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन की सराहना करते हुए कहा कि आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) और मेडिएशन को बढ़ावा देने में इस संस्था का बड़ा योगदान रहा है। बता दें कि जस्टिस सूर्य कांत ने 24 नवंबर 2025 को जस्टिस बी.आर. गवई के बाद देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी।

