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MCD’s RTI Delay: 2005 में कानून बना और अब 20 साल हो चुके हैं, आप अब तक क्या कर रहे थे?

MCD’s RTI Delay: दिल्ली हाईकोर्ट ने नगर निगम दिल्ली (MCD) को कड़ी फटकार लगाई है।

यह रही हाईकोर्ट की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने कहा, सूचना का अधिकार (RTI) कानून लागू हुए 20 साल बीत जाने के बावजूद निगम ने अब तक अपने विधायी रिकॉर्ड, सदन की कार्यवाही और प्रस्तावों को सार्वजनिक नहीं किया है। अदालत ने इसे कानून के स्पष्ट प्रावधानों का उल्लंघन बताया। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने कहा कि RTI एक्ट की धारा 4 के तहत सार्वजनिक प्राधिकरणों पर यह अनिवार्य जिम्मेदारी है कि वे महत्वपूर्ण सूचनाएं स्वतः सार्वजनिक करें, ताकि लोगों को बार-बार RTI लगाने की जरूरत न पड़े। कोर्ट ने साफ कहा कि इस मामले में MCD को कोई छूट नहीं दी जा सकती।

जनहित याचिका पर हुई सुनवाई

यह टिप्पणी उस जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान की गई, जो एनजीओ सेंटर फॉर यूथ, कल्चर, लॉ एंड एनवायरनमेंट ने दायर की है। याचिका में मांग की गई है कि MCD अपने सभी विधायी रिकॉर्ड, सदन की कार्यवाही, स्थायी समितियों के प्रस्ताव और अन्य सार्वजनिक सूचनाएं समयबद्ध तरीके से वेबसाइट पर अपलोड करे। MCD की ओर से पेश वकील ने अदालत को भरोसा दिलाया कि जानकारी अपलोड करने को लेकर सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं और यह मामला सक्षम प्राधिकारी के विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि निगम स्तर पर “प्रक्रिया चल रही है”, लेकिन इसमें समय लगेगा।

अदालत का यूं रहा तंज

कोर्ट ने तंज कसते हुए कहा, “20 साल बाद यह अभ्यास शुरू करने के लिए धन्यवाद। हम बहुत आभारी हैं।” साथ ही पूछा, “कौन-सी प्रक्रिया? कानून कहता है कि 120 दिनों के भीतर जानकारी अपलोड करनी थी। 2005 में कानून बना और अब 20 साल हो चुके हैं, आप अब तक क्या कर रहे थे?” हाईकोर्ट ने MCD को निर्देश दिया कि वह हलफनामा दाखिल कर बताए कि RTI एक्ट की धारा 4 के अनुपालन के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि इस प्रावधान का उद्देश्य ही यही है कि जानकारी स्वतः सार्वजनिक हो, ताकि जनता को RTI का सहारा कम लेना पड़े।

याचिकाकर्ताओं का दावा

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि एक RTI के जवाब में MCD ने स्वीकार किया है कि अब तक वेबसाइट पर कोई रिकॉर्ड अपलोड नहीं किया गया, क्योंकि तीनों नगर निगमों के एकीकरण के बाद वेबसाइट अपडेट का काम चल रहा है। MCD ने यह भी कहा कि उसकी वेबसाइट पर प्रस्ताव प्रकाशित करने के लिए कोई स्पष्ट नियम नहीं हैं और वह दिल्ली नगर निगम अधिनियम की धारा 86 से शासित है। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 86 का सार्वजनिक सूचना के प्रसार से कोई लेना-देना नहीं है। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह साफ है कि RTI कानून की धारा 4 के तहत MCD पर जो वैधानिक जिम्मेदारी थी, उसका 20 साल बाद भी पालन नहीं हुआ है।

अप्रैल में होगी मामले की सुनवाई

कोर्ट ने फिलहाल इसे प्राथमिक राय बताते हुए मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में तय की है। याचिकाकर्ता ने कहा कि यह मुद्दा दिल्ली में रहने वाले करोड़ों लोगों से जुड़ा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब MCD बजट को लेकर आश्वस्त है, तो आगामी वर्ष का बजट वेबसाइट पर क्यों नहीं डाला जा सकता। इस पर कोर्ट ने कहा कि बजट सदन से पारित होने के बाद ही अपलोड किया जा सकता है और जो कानूनी रूप से संभव है, वही किया जाना चाहिए।

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