मामला सारांश (At a Glance)
| पहलू | विवरण |
| मामला/साइटेशन | यस बैंक बनाम मोदी रबर लिमिटेड (Yes Bank v. Modi Rubber) |
| माननीय पीठ | न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव, न्यायमूर्ति चंद्रशेखरन सुधा एवं न्यायमूर्ति अमित महाजन |
| मुख्य कानून | कमर्शियल कोर्ट्स एक्ट, 2015 की धारा 13 एवं धारा 15 |
| मुख्य निर्णय | 23 अक्टूबर 2015 से पहले दायर व्यावसायिक मुकदमों पर भी कमर्शियल कोर्ट्स एक्ट की अपील संबंधी बंदिशें लागू होंगी। |
Commercial Courts Act: दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) की तीन न्यायाधीशों की पूर्ण पीठ (Full Bench) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में माना है कि कमर्शियल कोर्ट्स एक्ट, 2015 (Commercial Courts Act, 2015) के तहत अपीलों पर लगाई गई पाबंदियां उन व्यावसायिक मुकदमों (Commercial Suits) पर भी लागू होंगी, जो इस कानून के लागू होने से पहले दायर किए गए थे।
न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव (Justice V. Kameswar Rao), न्यायमूर्ति चंद्रशेखरन सुधा (Justice Chandrasekharan Sudha) और न्यायमूर्ति अमित महाजन (Justice Amit Mahajan) की पीठ ने माना कि पूर्ववर्ती याचिकाकर्ता केवल इस आधार पर पहले के व्यापक अपील अधिकारों की मांग नहीं कर सकते कि उनका मामला 23 अक्टूबर 2015 से पहले दायर हुआ था।
पूर्ण पीठ के प्रमुख निष्कर्ष और कानूनी सिद्धांत
- 2015 से पहले दायर मामलों पर कानून लागू होना
- बहुमत के फैसले (न्यायमूर्ति राव और न्यायमूर्ति सुधा) में कहा गया:“कमर्शियल कोर्ट्स एक्ट के प्रावधान इसके शुरू होने से पहले दायर मुकदमों पर भी लागू होंगे, भले ही उन मुकदमों को बाद की तारीख में वाणिज्यिक मुकदमों (Commercial Suits) में बदला गया हो या नया नंबर दिया गया हो।”
- अपील का अधिकार प्राकृतिक नहीं, वैधानिक (Statutory) है
- कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपील करने का अधिकार न तो प्राकृतिक है और न ही अंतर्निहित (Inherent)। यह कानून द्वारा दिया जाता है। विधायिका स्पष्ट रूप से या आवश्यक निहितार्थ (Necessary Implication) द्वारा किसी बाद के अधिनियम के जरिए इस अधिकार को सीमित या वापस ले सकती है।
- धारा 13 के तहत अपीलों का दायरा
- कमर्शियल कोर्ट्स एक्ट की धारा 13 (Section 13) के तहत केवल सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के ऑर्डर XLIII और मध्यस्थता अधिनियम की धारा 37 में सूचीबद्ध आदेशों के खिलाफ ही अपील की जा सकती है।
- चूंकि प्लेन्ट में संशोधन (Order VI Rule 17) की अनुमति देने वाला आदेश ऑर्डर XLIII में शामिल नहीं है, इसलिए ऐसे आदेश के खिलाफ अपील सुनवाई योग्य नहीं होगी।
- पुराने फैसले को ओवररूल (Overrule) किया
- पीठ ने अपने 2019 के फैसले (Brahmos Aerospace Pvt. Ltd. v. FIIT JEE Ltd.) को खारिज/ओवररूल कर दिया, जिसमें कहा गया था कि जब तक मुकदमे को औपचारिक रूप से री-नंबर नहीं किया जाता, धारा 13 लागू नहीं होगी। पीठ ने Samsung Leasing Ltd. मामले के विपरीत दृष्टिकोण को सही ठहराया।
मामले का बैकग्राउंड (Case Background – Yes Bank v. Modi Rubber)
- मूल मुकदमा: यह विवाद यस बैंक द्वारा मोदी रबर लिमिटेड के खिलाफ ₹33.13 करोड़ की वसूली के लिए 2014 में दायर एक मुकदमे से शुरू हुआ था।
- विवादित आदेश: मार्च 2019 में निचली अदालत ने मोदी रबर को अपनी याचिका (Plaint) में संशोधन की अनुमति दे दी। यस बैंक ने दिल्ली हाई कोर्ट एक्ट की धारा 10 के तहत इस संशोधन आदेश के खिलाफ अपील दायर की।
- बैंक का तर्क: यस बैंक का तर्क था कि चूंकि मुकदमा 2014 में दायर किया गया था और इसे 2020 में कमर्शियल सूट के रूप में री-नंबर किया गया, इसलिए मुकदमा दायर करते समय मिला अपील का अधिकार नए कानून से छीना नहीं जा सकता।
- कोर्ट का रुख: पूर्ण पीठ ने बैंक की इस दलील को खारिज कर दिया और अपील को गैर-रखरखाव योग्य (Not Maintainable) करार दिया।

