Thursday, October 15, 2026
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OCI Advocate: “लक्जरी मुकदमों के लिए समय नहीं” – सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई OCI कार्डधारक की अर्जी

OCI Advocate: सुप्रीम कोर्ट ने एक ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) की याचिका को खारिज कर दिया।

याचिकाकर्ता ने वकालत करने और स्टेट बार काउंसिल की सदस्यता के लिए खुद को अनिवासी भारतीयों (NRIs) के समान दर्जा देने की मांग की थी।

अदालत का कड़ा रुख

  • लक्जरी लिटिगेशन: चीफ जस्टिस सूर्या कांत की बेंच ने याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा, “हमारे पास लक्जरी मुकदमों (Luxury Litigation) के लिए समय नहीं है।”
  • नागरिकता अनिवार्य: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि Advocates Act की धारा 24 के तहत बार काउंसिल में नामांकन के लिए ‘भारतीय नागरिक’ होना एक अनिवार्य शर्त है। OCI स्टेटस आपको कुछ विशेषाधिकार तो देता है, लेकिन यह भारतीय नागरिकता के बराबर नहीं है।

मामला क्या था?

चेलाभाई करसनभाई पटेल नामक एक OCI कार्डधारक ने याचिका दायर कर स्टेट बार काउंसिल का सदस्य बनने की पात्रता मांगी थी।

याचिकाकर्ता की दलील

वकील ने तर्क दिया कि गृह मंत्रालय (MHA) के 2009 और 2021 के नोटिफिकेशन OCIs को कई मामलों में NRIs के बराबर रखते हैं। चूंकि NRI भारत का नागरिक होता है, इसलिए OCI को भी वही अधिकार मिलने चाहिए।

जस्टिस बागची ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यहां तीन स्तर हैं। सिर्फ इसलिए कि आप OCI हैं, आप बार काउंसिल के सदस्य बनने के हकदार नहीं हो जाते।

  • विदेशी नागरिक: (LLB डिग्री वाला)।
  • OCI: आपकी स्थिति विदेशी नागरिक से बेहतर है।
  • भारतीय नागरिक/NRI: आप इनमें से कोई नहीं हैं।

यह है कानूनी प्रावधान (Section 24)

  • अदालत ने दोहराया कि एडवोकेट्स एक्ट की धारा 24 के अनुसार, किसी व्यक्ति को वकील के रूप में तभी नामांकित किया जा सकता है यदि
    वह भारत का नागरिक हो।
  • अपवाद: किसी दूसरे देश का नागरिक तभी वकील बन सकता है जब उस देश में भी भारतीय नागरिकों को वकालत करने की अनुमति (Reciprocity) दी जाती हो।
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