Thursday, October 29, 2026
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AI made Verdict: निचली अदालत के जजमेंट में AI से बने फर्जी फैसले…सुप्रीम कोर्ट भी हो गई हैरान, जानें फिर क्या कहा

AI made Verdict: कानूनी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक चौंकाने वाले मामले पर कड़ा रुख अपनाया है।

निचली अदालत के जिक्र किए फैसले अस्तित्व में नहीं

कोर्ट ने पाया कि एक निचली अदालत (Trial Court) के जज ने अपने आदेश में ऐसे फैसलों का जिक्र किया जो असल में अस्तित्व में ही नहीं थे और जिन्हें संभवतः AI टूल्स (जैसे ChatGPT) के जरिए तैयार किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट की मुख्य आपत्तियां

  • न्यायिक ईमानदारी से समझौता: जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने कहा कि फर्जी मिसालों (Precedents) का इस्तेमाल करना न केवल कानून के साथ धोखाधड़ी है, बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता को भी नष्ट करता है।
  • सत्यापन की कमी: कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि एक न्यायाधीश ने बिना यह जांचे कि वे फैसले किसी अधिकृत लॉ रिपोर्ट या डेटाबेस में हैं या नहीं, उन्हें अपने आदेश का आधार बना लिया।
  • अनुशासनात्मक कार्रवाई: सुप्रीम कोर्ट ने इसे ‘कदाचार’ (Misconduct) मानते हुए संबंधित हाई कोर्ट को इस मामले में जज के खिलाफ उचित प्रशासनिक और अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के संकेत दिए हैं।

क्यों खतरनाक है यह चलन?

  • AI टूल्स कभी-कभी ‘Hallucinations’ (भ्रम) का शिकार होते हैं, जहाँ वे बहुत ही विश्वसनीय दिखने वाले लेकिन पूरी तरह से काल्पनिक केस कानून और साइटेशन (Citations) बना देते हैं।
  • गलत न्याय: यदि फर्जी फैसलों के आधार पर सजा या राहत दी जाती है, तो यह न्याय का गला घोंटने जैसा है।
  • वकीलों की जिम्मेदारी: कोर्ट ने वकीलों को भी आगाह किया है कि वे अपनी दलीलों में AI का उपयोग करते समय अत्यधिक सावधानी बरतें और हर साइटेशन को क्रॉस-चेक करें।
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