Allopathic meds: महाराष्ट्र में होम्योपैथी डॉक्टरों द्वारा एलोपैथी दवाएं (Allopathic meds) लिखने के मामले पर सरकार ने अपनी स्थिति साफ की है।
राज्य सरकार ने विधानसभा में बताया कि हालांकि करीब 8,000 डॉक्टर्स ने अनिवार्य ‘ब्रिज कोर्स’ पूरा कर लिया है, लेकिन अंतिम फैसला बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद ही लिया जाएगा।
प्रमुख बातें: आखिर क्या है पूरा मामला?
- Bridge Course की शुरुआत: चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री माधुरी मिसाल ने बताया कि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में MBBS डॉक्टरों की कमी को देखते हुए Certificate Course in Modern Pharmacology (CCMP) शुरू किया गया था।
- कोर्स का उद्देश्य: 5.5 साल की BHMS डिग्री वाले डॉक्टर यह 1 साल का कोर्स कर सकते हैं, ताकि ज़रूरत पड़ने पर वे सीमित एलोपैथी दवाएं लिख सकें।
-मौजूदा स्थिति: अब तक 8,000 डॉक्टर यह कोर्स कर चुके हैं और 33 संस्थान इसकी ट्रेनिंग दे रहे हैं।
मामला कोर्ट में क्यों है?
एलोपैथी डॉक्टरों और उनकी एसोसिएशंस ने इस कोर्स का विरोध किया था, जिसके बाद यह मामला बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंच गया।
“कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद, सरकार ने योग्य होम्योपैथी डॉक्टरों के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल बनाया है। अब तक 2,182 डॉक्टरों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, लेकिन मामला Sub-judice (न्यायाधीन) होने के कारण अभी तक किसी को सर्टिफिकेट जारी नहीं किए गए हैं।”
माधुरी मिसाल, राज्य मंत्री
सरकार का पक्ष
मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस पहल का मकसद किसी एक मेडिकल सिस्टम को दूसरे से बेहतर बताना नहीं है। इसका एकमात्र उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी को दूर करना और आम जनता तक बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। सरकार हाई कोर्ट के अंतरिम निर्देशों के अनुसार रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया तो कर रही है, लेकिन आगे का कोई भी कदम Final Verdict (अंतिम फैसले) के बाद ही उठाया जाएगा।

