ADR Revolution: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने जयपुर में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के सम्मेलन में एक दूरदर्शी प्रस्ताव रखा है।
मुख्य न्यायाधीश ने देश के रिटायर्ड जजों के अनुभव का उपयोग ADR (Alternative Dispute Resolution) यानी वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र में करने के लिए एक ‘नेशनल रजिस्ट्री’ बनाने का आह्वान किया है। CJI ने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की विशेषज्ञता को “राष्ट्रीय संसाधन” बताते हुए इसे बर्बाद न होने देने की अपील की।
नेशनल रजिस्ट्री का प्रस्ताव (The Formal Framework)
- CJI सूर्यकांत ने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के लिए एक संरचित ढांचे की मांग की।
- नेशनल रजिस्ट्री: ऐसे जजों की एक सूची जो अपनी मर्जी से ADR और कानूनी जागरूकता के कार्यों में सेवा देना चाहते हैं।
- संस्थागत सेवा: इस जुड़ाव को केवल एक ‘रिटायरमेंट गतिविधि’ नहीं, बल्कि पूरी जवाबदेही और समर्थन के साथ “संस्थागत सेवा” माना जाना चाहिए।
- MoU: जज एसोसिएशन, राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (SLSA) और हाई कोर्ट के बीच आपसी समझौतों (MoUs) की आवश्यकता।
ADR: “न्याय का पिछला दरवाजा नहीं”
- अदालतों में मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए CJI ने ADR तंत्र (Mediation, Lok Adalat, Arbitration) को सबसे प्रभावी बताया।
- पहुंच: उन्होंने कहा कि ये तंत्र न्याय का ‘बैक डोर’ नहीं हैं; करोड़ों भारतीयों के लिए वे “इकलौता दरवाजा” हैं।
- सरल भाषा: यह न्याय लोगों की भाषा में, उनकी गति से और उनकी पहुंच के भीतर प्रदान किया जाता है।
- लोक अदालत: राष्ट्रीय लोक अदालतों की सफलता का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे भविष्य का न्याय तंत्र बताया।
रिटायर्ड जजों की भूमिका (Key Roles)
- CJI ने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के लिए चार मुख्य कार्यक्षेत्र बताए।
- मध्यस्थ (Mediators/Arbitrators): विशेष रूप से पारिवारिक और व्यावसायिक मामलों में, जहाँ निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण है।
- कानूनी शिक्षक (Legal Educators): ग्राम पंचायतों और स्कूलों में नागरिकों को उनके अधिकारों के बारे में सरल भाषा में बताना।
- प्री-लिटिगेशन काउंसलर: विवादों को मुकदमे में बदलने से पहले ही सुलझाना (DLSA और SLSA के माध्यम से)।
- संस्थान निर्माता (Institution Builders): अगली पीढ़ी के वकीलों और मध्यस्थों को ट्रेनिंग देना और ‘संस्थागत याददाश्त’ (Institutional Memory) को सुरक्षित रखना।
राजस्थान की नई पहल (Uniform Registration System)
- इनोवेटिव रजिस्ट्रेशन: ‘यूनिफॉर्म रजिस्ट्रेशन नंबर सिस्टम’ की शुरुआत की गई, जो न्याय प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाएगा।
- ज्ञान का संकलन: सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों द्वारा लिखे गए लेखों के संकलन का विमोचन भी हुआ।
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| बिंदु | विवरण |
| वक्ता | CJI सूर्यकांत। |
| स्थान | जयपुर, राजस्थान (25 अप्रैल, 2026)। |
| उपमा | रिटायर्ड जजों की तुलना ‘रेगिस्तान के बावड़ी’ (Stepwell) से की गई, जो संकट के समय काम आते हैं। |
| उद्देश्य | मुकदमों की पेंडेंसी कम करना और न्याय को सुलभ बनाना। |
| मुख्यमंत्री का संदेश | न्यायपालिका संविधान की रक्षक है और भ्रष्टाचार के विरुद्ध अग्रणी है। |
अनुभव का सदुपयोग
CJI का यह प्रस्ताव भारत की न्याय प्रणाली के लिए एक ‘गेम-चेंजर’ साबित हो सकता है। जजों का अनुभव रिटायरमेंट के साथ खत्म नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे ‘नेशनल रजिस्ट्री’ के माध्यम से फिर से सिस्टम में डाला जाना चाहिए। इससे न केवल मुकदमों का बोझ कम होगा, बल्कि आम नागरिक को अनुभवी हाथों से निष्पक्ष न्याय भी मिल सकेगा।

