#site_title

Home Supreme Court Cabs for Disabled: कैब वालों काे नसीहत… दिव्यांगजनों के लिए व्हीलचेयर की जगह होना ज़रूरी

Cabs for Disabled: कैब वालों काे नसीहत… दिव्यांगजनों के लिए व्हीलचेयर की जगह होना ज़रूरी

0
Cabs for Disabled: कैब वालों काे नसीहत… दिव्यांगजनों के लिए व्हीलचेयर की जगह होना ज़रूरी
Supreme-Court

Cabs for Disabled: सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांगजनों (Persons with Disabilities) की सहूलियत के लिए एक बेहद अहम विचार साझा किया।

कोर्ट ने कहा कि ओला-उबर जैसी कैब सेवाओं को इस तरह तैयार किया जाना चाहिए कि वे दिव्यांगों की व्हीलचेयर और अन्य सहायक उपकरणों (Assistive Devices) को आसानी से ले जा सकें।

कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां और सुझाव

  • ऐप में हो खास फीचर: जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सुझाव दिया कि कैब एग्रिगेटर ऐप्स (जैसे Uber, Ola) में ‘Specified Cabs’ का विकल्प होना चाहिए, जो विशेष रूप से दिव्यांगों की जरूरतों के हिसाब से मॉडिफाई की गई हों।
  • लास्ट-माइल कनेक्टिविटी: कोर्ट ने चिंता जताई कि अगर किसी का घर मुख्य सड़क से 1 किमी दूर है और वह ऑटोमेटेड व्हीलचेयर पर आता है, तो अगर कैब में उसे रखने की जगह नहीं होगी, तो वह उसे कहाँ छोड़ेगा?
  • रास्ते की तलाश: बेंच ने जोर देते हुए कहा— “हमें इन लोगों की मदद के लिए रास्ते और साधन तलाशने होंगे।

चुनौतियां: CNG किट और जगह की कमी

  • सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कुछ व्यावहारिक समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया।
  • CNG की समस्या: आजकल ज्यादातर कैब्स में CNG किट लगी होती है, जिसकी वजह से डिक्की (Boot space) में जगह नहीं बचती। ऐसे में व्हीलचेयर रखना नामुमकिन हो जाता है।
  • यूनिवर्सल डिजाइन: वकील ने सुझाव दिया कि भारत में भी यूरोपीय देशों की तरह ‘यूनिवर्सल डिजाइन’ वाली गाड़ियाँ होनी चाहिए, जो हर तरह के यात्री के लिए सुलभ हों।

सरकार का पक्ष और अगली कार्रवाई

केंद्र सरकार के वकील ने बताया कि यह मामला संबंधित विभाग की समीक्षा (Review) के अधीन है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले से ही एक कमेटी गठित की हुई है जो ऐसे ही बड़े मुद्दों को देख रही है। कोर्ट ने कहा कि इस याचिका में उठाए गए विशिष्ट (Specific) मुद्दों को भी वही कमेटी देख सकती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here