Dilapidated heritage structures: उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में ऐतिहासिक इमारतों और धरोहरों की बदहाली पर कड़ा संज्ञान लेते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार सहित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को नोटिस जारी किया है।
मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर यह आदेश दिया। कोर्ट ने आठ सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता ने INTACH (इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए राज्य में विरासतों की दयनीय स्थिति पेश की। हाई कोर्ट का यह हस्तक्षेप उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बचाने की दिशा में एक बड़ी उम्मीद जगाता है। यदि 5,000 के करीब असुरक्षित इमारतों को संरक्षण मिलता है, तो यह न केवल इतिहास को सहेजने बल्कि पर्यटन को बढ़ावा देने में भी सहायक होगा।
याचिका में चौंकाने वाले आंकड़े: सिर्फ 8% विरासत ही सुरक्षित
विवरण सांख्यिकीय आंकड़े
कुल ऐतिहासिक इमारतें (UP में) 5,416″
संरक्षित इमारतें (कुल) 421 (मात्र 8%)
ASI (आगरा व लखनऊ) द्वारा संरक्षित 209
राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित 212
असुरक्षित और जर्जर इमारतें 4,995
किन शहरों की विरासतों पर है खतरा?
याचिका में विशेष रूप से निम्नलिखित ऐतिहासिक स्थलों की बदहाली का जिक्र किया गया है। इसमें झांसी, वृंदावन, आगरा, लखनऊ और हस्तिनापुर की प्राचीन संरचनाएं। इनमें मंदिर, हवेलियां, घाट और सराय शामिल हैं जो 100 वर्ष से अधिक पुराने हैं लेकिन किसी भी संरक्षण श्रेणी में नहीं आते।
कोर्ट में दी गई मुख्य दलीलें
- प्राधिकरणों की विफलता: याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि सार्वजनिक प्राधिकरणों की विफलता के कारण बेशकीमती धरोहरें ढह रही हैं और विलुप्त होने की कगार पर हैं।
- कानूनी अधिदेश: ‘प्राचीन स्मारक अधिनियम’ के तहत केंद्र और राज्य दोनों सरकारें इन संरचनाओं की रक्षा के लिए बाध्य हैं, चाहे वे वर्तमान में किसी के स्वामित्व में हों या लावारिस हों।
- अतिक्रमण की समस्या: यदि कोई स्मारक संरक्षित है लेकिन वहां अतिक्रमण है, तो कानूनन उन अतिक्रमणों को हटाना और स्मारक को सुरक्षित करना अनिवार्य है।
अदालत ने किन्हें जारी किया नोटिस?
उत्तर प्रदेश सरकार, केंद्रीय संस्कृति, पर्यटन और आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (NMA), राज्य पुरातत्व विभाग।

