Sunday, June 28, 2026
HomeHigh CourtMurder vs Passion: 3 इंच चौड़ा चाकू फल काटने के लिए नहीं...

Murder vs Passion: 3 इंच चौड़ा चाकू फल काटने के लिए नहीं होता…इसे तभी क्यों रखे हुए थे

Murder vs Passion: कलकत्ता हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 3 इंच चौड़ा चाकू फल काटने के लिए नहीं होता है।

महिला की हत्या के मामले में दोषी की उम्रकैद

हाईकोर्ट के जस्टिस राजशेखर मंथा और जस्टिस राय चट्टोपाध्याय की बेंच ने 2019 के निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। मामला एक विवाहेतर संबंध (Extramarital Affair) और उसके बाद हुई हत्या से जुड़ा था। एक महिला की हत्या के मामले में दोषी की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए कहा कि ‘3 इंच चौड़ा चाकू’ और पहले से लिखी गई ‘डायरी’ यह साबित करने के लिए काफी हैं कि यह हत्या अचानक आए गुस्से का नतीजा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश (Premeditation) थी।

कोर्ट का कड़ा सवाल: चाकू साथ क्यों रखा?

  • बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि यह “आवेग में किया गया अपराध” (Crime of Passion) था, लेकिन कोर्ट ने इसे सिरे से नकार दिया।
  • तैयारी का सबूत: कोर्ट ने कहा कि कोई भी व्यक्ति बाहर फल खाने के लिए अपने साथ 3 इंच चौड़ा किचन नाइफ लेकर नहीं घूमता। यह चाकू इस बात का स्पष्ट संकेत था कि हमलावर का इरादा हत्या करना ही था।
  • डायरी एंट्री: दोषी ने अपनी डायरी में पहले ही लिख रखा था कि यदि महिला ने शादी का दबाव कम नहीं किया, तो वह उसे मार डालेगा और खुद जहर खाकर जान दे देगा। कोर्ट ने इसे ‘Premeditation’ (पूर्व-चिंतन) का पुख्ता सबूत माना।

मामला क्या था? (Affair, Conflict and Crime)

  • बैकग्राउंड: दोषी पहले से शादीशुदा था और उसका एक बच्चा भी था। उसका पीड़िता के साथ करीब 7 साल से संबंध था।
  • विवाद: पीड़िता उस पर सामाजिक रूप से शादी करने और साथ रहने का दबाव बना रही थी। दोषी अपनी वैवाहिक स्थिति और इस अफेयर, दोनों से परेशान था।
  • वारदात: 26 सितंबर 2013 को दोषी महिला के घर गया, जहाँ उनके बीच झगड़ा हुआ। बाद में महिला मृत पाई गई और दोषी जहर खाने के कारण बेहोश मिला (जो बाद में बच गया)।

इमोशन’ के नाम पर राहत नहीं

  • दोषी के वकील ने दलील दी कि यह मामला “गैर-इरादतन हत्या” (Culpable Homicide) का है क्योंकि यह भावनाओं के वशीभूत होकर किया गया था। कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
  • 12.5 साल की सजा नाकाफी: दोषी की यह दलील कि उसने 12.5 साल जेल में काटकर पर्याप्त सजा पा ली है, स्वीकार्य नहीं है। अपराध की गंभीरता को समय बीतने से कम नहीं किया जा सकता।
  • आत्महत्या का प्रयास: दोषी का खुद को मारने का प्रयास करना उसे हत्या के आरोप से मुक्त नहीं करता।

कानूनी निष्कर्ष: धारा 302 IPC

हाई कोर्ट ने माना कि जब किसी अपराध की योजना पहले ही बना ली गई हो और हथियार भी उसी के अनुरूप तैयार रखा गया हो, तो वह IPC की धारा 302 (हत्या) के तहत ही आता है।

निष्कर्ष: कानून और नियत

यह फैसला एक महत्वपूर्ण कानूनी सबक है कि ‘क्राइम ऑफ पैशन’ का बचाव तब काम नहीं आता जब सबूत यह चीख-चीख कर कहें कि अपराधी पूरी तैयारी के साथ आया था। डायरी और हथियार की प्रकृति ने इस मामले में न्याय की दिशा तय की।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
overcast clouds
40.9 ° C
40.9 °
40.9 °
28 %
3.4kmh
100 %
Sun
42 °
Mon
44 °
Tue
40 °
Wed
30 °
Thu
33 °

Recent Comments