केस अवलोकन टेबल (Case Snapshot)
| पहलू | विवरण |
| अदालत | जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय |
| न्यायाधीश | न्यायमूर्ति संजय धर |
| मूल मुद्दा | आतंकवादी धमकियों के डर से ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले SPO की सेवा समाप्ति |
| मुख्य विधिक सिद्धांत | SPO संवैधानिक ‘सिविल पोस्ट’ के तहत नहीं आते; डर के आधार पर ड्यूटी छोड़ना अस्वीकार्य है। |
| अंतिम निर्णय | पूर्व SPO की याचिका पूरी तरह खारिज। |
Dismissal Of Jammu Police Officer: जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय ने आतंकवादियों की धमकियों के डर से ड्यूटी पर न लौटने वाले एक पूर्व विशेष पुलिस अधिकारी (Special Police Officer – SPO) की बर्खास्तगी को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संजय धर की पीठ ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि एक पुलिसकर्मी, चाहे वह किसी भी पद पर हो, यदि उग्रवादियों से डरकर ड्यूटी करने से इनकार कर देता है, तो इस देश की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है।
उच्च न्यायालय की मुख्य कानूनी टिप्पणियां
- ड्यूटी से अनुपस्थिति का कोई औचित्य नहीं
- अदालत ने 10 अगस्त 2026 के अपने आदेश में कहा: “एक पुलिस अधिकारी, चाहे उसका पद कोई भी हो, यदि वह आतंकवादियों से डरकर और धमकी पाकर अपनी ड्यूटी पर जाने से मना कर देता है, तो इस देश को केवल भगवान ही बचा सकता है। याचिकाकर्ता द्वारा ड्यूटी पर न आने के लिए दिया गया तर्क पूरी तरह से अमान्य है।”
- SPO के अधिकार और ‘सुनवाई का अधिकार’ (Right to Hearing)
- अनुच्छेद 311 व पुलिस नियमों का तर्क खारिज: याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि उसे बिना किसी कारण बताओ नोटिस, औपचारिक जांच (Enquiry) या सुनवाई का अवसर दिए बिना सेवा से हटा दिया गया, जो संविधान के अनुच्छेद 16, 21, 311 और जम्मू-कश्मीर पुलिस नियम 359 का उल्लंघन है।
- कोर्ट का निष्कर्ष: पीठ ने स्पष्ट किया कि SPO वैधानिक नियमों द्वारा विनियमित किसी ‘सिविल पोस्ट’ (Civil Post) पर नहीं होते हैं। इसलिए वे सामान्य पुलिस अधिकारियों की तरह सुरक्षा और जांच प्रक्रिया के हकदार नहीं हैं।
- ‘औपचारिकता मात्र’ (Empty Formality Principle)
- न्यायमूर्ति संजय धर ने माना कि यदि यह मान भी लिया जाए कि याचिकाकर्ता को सुनवाई का अधिकार था, तो भी उसका यह स्वीकार करना कि वह उग्रवादियों की धमकी के डर से ड्यूटी पर नहीं आया, उसकी बर्खास्तगी के लिए पर्याप्त कारण है। ऐसे मामले में कारण बताओ नोटिस देना ‘केवल एक निष्फल औपचारिकता’ (Empty Formality) ही होता।
मामले की पृष्ठभूमि (Background)
- नियुक्ति और अनुपस्थिति: याचिकाकर्ता को वर्ष 2012 में विशेष पुलिस अधिकारी (SPO) के रूप में नियुक्त किया गया था।
- याचिकाकर्ता का दावा: 2015 में वह मेडिकल लीव पर था, उसी दौरान घाटी में अशांति फैली और उसे आतंकवादियों से जान से मारने की धमकियां मिलीं। धमकियों के डर से वह ड्यूटी पर नहीं लौट सका। बाद में जब वह वापस रिपोर्ट करने गया, तो उसे री-जॉइन करने की अनुमति नहीं दी गई।
- कानूनी लड़ाई: पुलिस महानिदेशक (DGP) द्वारा उसकी बहाली की अर्जी खारिज किए जाने के बाद उसने उच्च न्यायालय का रुख किया था।

