Wednesday, October 7, 2026
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POCSO Controversy: प्यार करने वालों पर पॉक्सो का गलत इस्तेमाल… आपसी सहमति वाले रिश्तों पर सितम क्यों, केस पर यह रही टिप्पणी

POCSO Controversy: गुजरात हाई कोर्ट ने किशोरों (Adolescents) के बीच “आपसी सहमति या प्रेम संबंधों” में POCSO अधिनियम, 2012 के दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की है।

हाईकोर्ट के जस्टिस निखिल करियल की सिंगल बेंच ने दाहोद जिले के एक 20 वर्षीय युवक को नियमित जमानत (Regular Bail) दे दी है। युवक पर एक नाबालिग लड़की के अपहरण, शादी के लिए फुसलाने और बलात्कार (POCSO के तहत) का आरोप था। एक 20 वर्षीय युवक को जमानत देते हुए कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में जहां लड़का-लड़की एक-दूसरे से प्यार करते हैं और साथ भाग जाते हैं, वहां जबरदस्ती या अपहरण के आरोप अक्सर टिकते नहीं हैं।

मामला क्या था? (The Love Affair)

  • घटना: आरोपी युवक नवंबर 2025 से हिरासत में था। जांच में सामने आया कि वह और ‘पीड़िता’ एक-दूसरे से प्यार करते थे और लगभग एक महीने के लिए घर से भाग (Elope) गए थे।
  • कोर्ट का निष्कर्ष: कोर्ट ने माना कि एक महीने तक साथ रहने की बात यह दर्शाती है कि रिश्ते में कोई डर, बल प्रयोग या जबरदस्ती (Coercion) शामिल नहीं थी, बल्कि यह आपसी सहमति पर आधारित था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला: दुरुपयोग की स्थिति

  • गुजरात हाई कोर्ट ने अपने आदेश में जनवरी 2026 के सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का संदर्भ दिया।
  • गलत इस्तेमाल: कोर्ट ने नोट किया कि POCSO एक्ट का उन मामलों में “दुरुपयोग” हो रहा है जहाँ किशोरों के बीच रूमानी या सहमति वाले संबंध होते हैं।
  • उम्र का अंतर: विशेष रूप से उन मामलों में जहाँ पक्षों के बीच उम्र का अंतर बहुत अधिक नहीं होता, वहाँ कानून की कठोर धाराओं का इस्तेमाल अक्सर बदला लेने या सामाजिक दबाव के कारण किया जाता है।

जमानत की शर्तें (Bail Conditions)

  • हालांकि अभियोजन पक्ष (Prosecution) ने यह कहते हुए जमानत का विरोध किया कि आरोपी गुजरात का निवासी नहीं है और भाग सकता है, लेकिन कोर्ट ने कड़े नियमों के साथ राहत दे दी।
  • जमानत राशि: ₹10,000 का निजी मुचलका और उतनी ही राशि की एक जमानत (Surety)।
  • राज्य छोड़ने पर रोक: आरोपी बिना सत्र न्यायालय की अनुमति के गुजरात से बाहर नहीं जा सकेगा।
  • हाजिरी: अगले तीन महीनों तक महीने में एक बार संबंधित पुलिस स्टेशन में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी।

इंडेफिनेट जेल का कोई फायदा नहीं

बचाव पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि चूंकि चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, इसलिए युवक को अनिश्चित काल के लिए जेल में रखने का कोई कानूनी उद्देश्य पूरा नहीं होगा। कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए ‘विवेकाधिकार’ (Discretion) का उपयोग किया।

निष्कर्ष: कानून और भावनाओं के बीच संतुलन

यह फैसला एक बड़े कानूनी विमर्श को जन्म देता है कि क्या ‘सहमति की आयु’ (Age of Consent) और किशोरों के प्राकृतिक प्रेम संबंधों को POCSO जैसे कड़े कानूनों से अलग देखा जाना चाहिए। गुजरात हाई कोर्ट का यह रुख उन युवाओं के लिए राहत भरा है जो सामाजिक बाधाओं के कारण कानूनी पचड़ों में फंस जाते हैं।

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