Saturday, August 22, 2026
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Census Duty: जनगणना सर्वे में पहले सरकारी तंत्र को लगाएं…न कि प्राइवेट अन-एडेड स्कूलों की पढ़ाई ठप करके इस काम को पूरा करे, पढ़ें यह निर्देश

Census Duty: बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र के शिक्षा और प्रशासनिक हलकों में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए प्राइवेट गैर-सहायता प्राप्त (Private Unaided) और अल्पसंख्यक (Minority) स्कूलों के शिक्षकों को बड़ी राहत दी है।

यह रहा हाईकोर्ट का निर्देश

बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस गौतम ए. अंखाड और जस्टिस संदेश डी. पाटिल की खंडपीठ ने ‘उनाइडेड स्कूल्स फोरम व अन्य बनाम महाराष्ट्र राज्य व अन्य’ मामले में यह अंतरिम आदेश जारी किया। अदालत ने राज्य सरकार और स्थानीय निकायों (जैसे नगर निगमों) द्वारा इन शिक्षकों को चल रही जनगणना (Census Duty) में लगाने के आदेशों पर अंतरिम रोक (Stay) लगा दी है।

हाई कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

  • कानूनी बाध्यता (Statutory Obligation) का अभाव: अदालत ने प्रथम दृष्टया (Prima Facie) माना कि जनगणना अधिनियम (Census Act) या इसके नियमों के तहत प्राइवेट गैर-सहायता प्राप्त और अल्पसंख्यक स्कूलों के शिक्षकों पर जनगणना ड्यूटी करने की कोई कानूनी या वैधानिक बाध्यता नहीं है।
  • छात्रों की पढ़ाई में बाधा: हाई कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों को देखकर चिंता जताई कि बड़े पैमाने पर शिक्षकों को जनगणना कार्य में लगाने से स्कूलों की नियमित शैक्षणिक गतिविधियां पूरी तरह ठप हो जाएंगी, जिससे छात्रों के निर्बाध शिक्षा पाने के अधिकार (Right to Uninterrupted Education) पर बुरा असर पड़ेगा।
  • सभी दंडात्मक आदेशों पर रोक: कोर्ट ने उन सभी नोटिसों, नियुक्ति आदेशों और निर्देशों पर स्टे लगा दिया है जिनके जरिए वकीलों और शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी पर आने को कहा गया था। साथ ही, आदेश न मानने वाले शिक्षकों के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई (Coercive Steps) पर भी रोक लगा दी गई है।
  • जुलाई के अंत तक नई नियुक्तियों पर रोक: अदालत ने अधिकारियों को अंतिम सुनवाई तक ऐसे नए आदेश जारी करने से भी रोक दिया है। इस मामले की अगली और अंतिम सुनवाई 31 जुलाई 2026 को होगी।

स्कूलों की दलील: पूरे स्टाफ को ही ड्यूटी पर लगा दिया!

  • यह याचिका उनाइडेड स्कूल्स फोरम, इंडिपेंडेंट इंग्लिश स्कूल्स, प्राइवेट उनाइडेड स्कूल मैनेजमेंट और इंटरनेशनल स्कूल्स एसोसिएशन के सदस्यों द्वारा दायर की गई थी, जो महाराष्ट्र के 500 से अधिक निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों का प्रतिनिधित्व करते हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील वेंकटेश धोंड ने अदालत के सामने कुछ चौंकाने वाले आंकड़े रखे, जिससे पता चला कि कई स्कूलों में लगभग पूरे टीचिंग स्टाफ को ही जनगणना ड्यूटी पर भेज दिया गया था:
  • मुंबई का सेंट जॉन्स स्कूल: स्कूल के सभी 133 शिक्षकों को जनगणना अधिकारी नियुक्त कर दिया गया।
  • पुणे का चत्रभुज नरसी स्कूल: कुल 144 शिक्षकों में से 111 शिक्षकों की ड्यूटी लगा दी गई।
  • वकीलों ने दलील दी कि यदि सारे शिक्षक जनगणना के काम में लग जाएंगे, तो स्कूल कैसे चलेंगे और बच्चों को कौन पढ़ाएगा?

सरकार और जनगणना निदेशालय का पक्ष

सरकारी वकील अंजलि हेलेकर और जनगणना संचालन निदेशालय के वरिष्ठ वकील राजशेखर गोविलकर ने सरकार के इस कदम का बचाव करते हुए तर्क दिए। कहा, जनगणना देश का सबसे बड़ा प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभ्यास है, जिसमें व्यापक समन्वय की आवश्यकता होती है। शिक्षकों को उनके नियमित वेतन के अलावा अलग से मानदेय (Honorarium) भी दिया जा रहा है, और वर्तमान में अधिकांश स्कूल गर्मियों की छुट्टियों के कारण बंद हैं। सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act), 2009 का हवाला दिया, जो शिक्षकों को दस-वार्षिक जनसंख्या जनगणना (Decennial Census) के लिए तैनात करने की अनुमति देता है।

अदालत का निष्कर्ष और सरकारी मशीनरी को नसीहत

दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य को रोकने की मंशा नहीं है, लेकिन इसके लिए निजी क्षेत्र पर अनुचित दबाव नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने कहा, जनगणना का काम हमेशा सरकारी मशीनरी, स्थानीय निकायों (Local Authorities) या सहायता प्राप्त संस्थानों (Aided Institutions) के माध्यम से किया जा सकता है, जिसकी परिकल्पना खुद वैधानिक ढांचे में की गई है। निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों को राहत देने से जनगणना कार्य को कोई अपूरणीय क्षति नहीं होगी।

केस मैट्रिक्स (Case Summary at a Glance)

कानूनी बिंदुविवरण और अदालती रुख
हाई कोर्ट बेंचजस्टिस गौतम ए. अंखाड और जस्टिस संदेश डी. पाटिल
याचिकाकर्ताउनाइडेड स्कूल्स फोरम (महाराष्ट्र के 500+ प्राइवेट स्कूल)
मुख्य मुद्दाक्या प्राइवेट गैर-सहायता प्राप्त शिक्षकों को अनिवार्य जनगणना ड्यूटी पर भेजा जा सकता है?
अदालत का अंतरिम आदेशपूरी तरह से रोक (Stayed)। नए आदेश जारी करने और दंडात्मक कार्रवाई पर पाबंदी।
अगली सुनवाई की तिथि31 जुलाई 2026 (अंतिम निर्णय के लिए)।

निष्कर्ष (Takeaway)

बॉम्बे हाई कोर्ट का यह आदेश निजी शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता और छात्रों के अधिकारों की रक्षा करता है। हालांकि सरकार के पास आरटीई एक्ट के तहत कुछ अधिकार हैं, लेकिन किसी प्राइवेट स्कूल के 100% स्टाफ को जनगणना में झोंक देना प्रशासनिक मनमानी को दर्शाता है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि सरकार पहले अपने सरकारी तंत्र, नगर निगमों और एडेड (सहायता प्राप्त) स्कूलों के स्टाफ का इस्तेमाल करे, न कि प्राइवेट अन-एडेड स्कूलों की पढ़ाई ठप करके इस काम को पूरा करे।

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