Reservation Law: राजस्थान हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण संवैधानिक फैसले में स्पष्ट किया है कि एक राज्य में आरक्षित श्रेणी (Reserved Category) के तहत आने वाले उम्मीदवार दूसरे राज्य में आरक्षण के लाभ का दावा नहीं कर सकते।
सामाजिक-आर्थिक स्थितियों पर आरक्षण वर्गीकरण आधारित
हाईकोर्ट जस्टिस संजीत पुरोहित की सिंगल बेंच ने राजस्थान के प्राइवेट मेडिकल और डेंटल कॉलेजों के फेडरेशन द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में मांग की गई थी कि अन्य राज्यों के आरक्षित श्रेणी (SC/ST/OBC) के उम्मीदवारों को राजस्थान की NEET PG सीटों पर भी आरक्षण और अंकों में छूट का लाभ मिलना चाहिए। अदालत ने कहा कि आरक्षण का वर्गीकरण प्रत्येक राज्य की अपनी सामाजिक-आर्थिक स्थितियों पर आधारित होता है।
फैसले के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| बिंदु | विवरण |
| आरक्षण का दायरा | केवल उस राज्य की भौगोलिक सीमाओं तक सीमित जहाँ वह जाति अधिसूचित (Notified) है। |
| NEET PG काउंसलिंग | दूसरे राज्य के SC/ST/OBC उम्मीदवार राजस्थान में ‘सामान्य’ माने जाएंगे। |
| कानूनी आधार | राजस्थान आरक्षण अधिनियम, 2008 और PGMER-2023 के प्रावधान। |
| निष्कर्ष | राज्य के बाहर के उम्मीदवारों को आरक्षण का लाभ देना असंवैधानिक होगा। |
कोर्ट का मुख्य तर्क: राज्य-विशिष्ट वास्तविकताएं
- अदालत ने कहा कि जातियों और जनजातियों का वर्गीकरण “राज्य के संबंध में” (In relation to a State) किया जाता है।
- क्षेत्रीय अंतर: एक राज्य में पिछड़ी मानी जाने वाली जाति जरूरी नहीं कि दूसरे राज्य में भी उसी सामाजिक या आर्थिक अभाव का सामना कर रही हो।
- संवैधानिक प्रावधान: कोर्ट ने अनुच्छेद 341, 342 और 342A का हवाला दिया, जो स्पष्ट करते हैं कि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और पिछड़ा वर्ग (BC) की पहचान क्षेत्रीय वास्तविकताओं के आधार पर होती है।
मामला क्या था? (The Context)
- विवाद: शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए NEET PG काउंसलिंग के दौरान, राजस्थान काउंसलिंग बोर्ड ने अन्य राज्यों के आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को ‘अनारक्षित’ (General) माना।
- दलील: याचिकाकर्ता (कॉलेजों) का तर्क था कि चूंकि सीटें खाली रह रही हैं, इसलिए अन्य राज्यों के उम्मीदवारों को कम क्वालीफाइंग पर्सेंटाइल (Relaxed Criteria) का लाभ देकर सीटें भरी जानी चाहिए।
- नतीजा: कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि सीटें भरने के लिए संवैधानिक सिद्धांतों और आरक्षण के नियमों से समझौता नहीं किया जा सकता।
महत्वपूर्ण टिप्पणियां और मिसालें
- हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों (जैसे बिर सिंह बनाम दिल्ली जल बोर्ड) का संदर्भ देते हुए निम्नलिखित बिंदु स्पष्ट किए।
- डोमिसाइल आरक्षण नहीं: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह नीति ‘100% डोमिसाइल आरक्षण’ नहीं है। अन्य राज्यों के उम्मीदवार राजस्थान में सामान्य श्रेणी (Unreserved) की सीटों पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन वे ‘कोटा’ का लाभ नहीं ले सकते।
- समानता का अभाव: यह मान लेना गलत होगा कि विभिन्न राज्यों के पिछड़े वर्गों की सामाजिक स्थिति एक जैसी है।
- खाली सीटें: कोर्ट ने कहा कि सीटें खाली रहना चिंता का विषय हो सकता है, लेकिन इसका समाधान नियमों के उल्लंघन में नहीं है। एक बार जब सीटें अनारक्षित घोषित कर दी जाती हैं, तो उन्हें सामान्य योग्यता मानकों (General Merit Standards) के अनुसार ही भरा जाना चाहिए।
संघीय ढांचे और आरक्षण का संतुलन
यह फैसला यह सुनिश्चित करता है कि एक राज्य के नागरिकों के लिए तैयार किए गए विशेष सुरक्षा उपायों (Affirmative Action) का लाभ केवल उन्हीं को मिले जिनके लिए वे नीतियां बनाई गई हैं। इससे राज्यों को अपनी विशिष्ट चुनौतियों के आधार पर आरक्षण नीतियां बनाने की स्वायत्तता मिलती है।
HIGH COURT OF JUDICATURE FOR RAJASTHAN AT JODHPUR
HON’BLE MR. JUSTICE SANJEET PUROHIT
S.B. Civil Writ Petition No. 4247/2026
Federation Of Private Medical And Dental College Of Rajasthan, Through Its Authorized Signatory & Others
Versus
Chairman, Neet Pg Medical And Dental Admission/ Counselling Board-2025 And Principal And Controller, Sms Medical College And Attached Hospitals, Jaipur & Others

