Friday, June 5, 2026
HomeLatest NewsATM Cash Loss Case: 19 साल बाद एटीएम से गायब 19 लाख...

ATM Cash Loss Case: 19 साल बाद एटीएम से गायब 19 लाख रुपए पर आया फैसला…यह रहा आयोग का फैसला

ATM Cash Loss Case: करीब 19 साल पहले गाजियाबाद के एक एटीएम से 19.03 लाख रुपये रहस्यमय तरीके से गायब होने के मामले में, राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

आयोग के डॉ. इंद्रजीत सिंह और डॉ. जस्टिस सुधीर कुमार जैन की बेंच ने युनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील पर सुनवाई करते हुए दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग के पुराने आदेश में संशोधन किया है। आयोग ने बीमा कंपनी को भुगतान करने का आदेश तो दिया, लेकिन सुरक्षा मानकों में लापरवाही बरतने के कारण बीमा राशि में 25% की कटौती कर दी है।

मामला क्या था? (The 2007 Ghaziabad Incident)

  • घटना: मई 2007 में गाजियाबाद के शिप्रा मॉल (Shipra Mall) स्थित HDFC बैंक के एटीएम से 19,03,800 रुपये गायब पाए गए थे।
  • रहस्य: एटीएम के ताले बिल्कुल सही सलामत थे और जबरन प्रवेश (Forced Entry) का कोई निशान नहीं था।
  • संदेह: जांच में सामने आया कि यह काम किसी बाहरी चोर का नहीं, बल्कि अंदरूनी कर्मचारियों (Insider Job) का था, जिनके पास मशीन की चाबियां और पासवर्ड थे। उसी दौरान एटीएम गार्ड भी मृत पाया गया था।

कंट्रीब्यूटरी नेग्लिजेंस (Contributory Negligence) का सिद्धांत

  • आयोग ने बीमा कंपनी की इस दलील को तो खारिज कर दिया कि एटीएम में रखा कैश कवर नहीं होता, लेकिन कैश हैंडलिंग फर्म (M/s A P Securitrans) की गलतियों को भी रेखांकित किया।
  • पासवर्ड की सुरक्षा: नियम के अनुसार दो अलग-अलग कस्टोडियन के पास स्वतंत्र क्रेडेंशियल होने चाहिए थे, लेकिन कंपनी ने पासवर्ड शेयरिंग और अस्थायी स्टाफ के लिए कोई स्पष्ट SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) नहीं रखी थी।
  • आयोग की टिप्पणी: बीमित कंपनी की ओर से लापरवाही का कुछ तत्व मौजूद है। पासवर्ड प्रबंधन में प्रक्रियात्मक खामियां थीं, जिसके कारण मुआवजे में कमी करना जायज है।

NCDRC का नया आदेश (The Modified Relief)

    राष्ट्रीय आयोग ने दिल्ली स्टेट कमीशन के उस आदेश को बदल दिया जिसमें 100% भुगतान का निर्देश दिया गया था।

    विवरणसंशोधित आदेश (NCDRC)
    कुल भुगतान₹14,27,850 (मूल राशि का 75%)
    ब्याज दर9% प्रति वर्ष (7 मार्च, 2008 से लागू)
    भुगतान की अवधि45 दिनों के भीतर।
    पेनाल्टीसमय पर भुगतान न करने पर ब्याज दर बढ़कर 12% हो जाएगी।

    केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

    • समय सीमा: कैश लोड होने के 48 घंटों के भीतर नुकसान हुआ था, जो पॉलिसी के तहत कवर था।
    • बीमा का आधार: चूंकि कर्मचारियों ने चाबी और पासवर्ड का दुरुपयोग किया, इसलिए यह ‘फिडेलिटी गारंटी’ (Fidelity Guarantee) के दायरे में आया।
    • सीख: यह फैसला वित्तीय संस्थानों के लिए एक सबक है कि केवल बीमा लेना काफी नहीं है; आंतरिक सुरक्षा और पासवर्ड प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करना भी अनिवार्य है।

    एक संतुलित न्याय

    NCDRC का यह निर्णय एक ‘बैलेंस्ड अप्रोच’ को दर्शाता है। जहाँ एक ओर कोर्ट ने उपभोक्ता (फर्म) को सुरक्षा दी कि बीमा कंपनी तकनीकी आधार पर क्लेम खारिज नहीं कर सकती, वहीं दूसरी ओर लापरवाही बरतने पर 25% राशि काटकर यह स्पष्ट कर दिया कि सुरक्षा में चूक की जिम्मेदारी बीमित पक्ष की भी होती है।

    RELATED ARTICLES

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here

    Most Popular

    Patna
    scattered clouds
    34.4 ° C
    34.4 °
    34.4 °
    35 %
    2.7kmh
    29 %
    Fri
    43 °
    Sat
    41 °
    Sun
    43 °
    Mon
    44 °
    Tue
    42 °

    Recent Comments