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Cow Transportation Ruling: केवल गाय को ले जाना अपराध नहीं…बताया कानून का असली मतलब, फैसले की अहम बातें यहां पर

Cow Transportation Ruling: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम (UP Prevention of Cow Slaughter Act) के तहत एक महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टीकरण दिया है।

हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक कुमार सिंह की बेंच ने एक ट्रक मालिक की याचिका स्वीकार करते हुए वाहन को रिहा करने का निर्देश दिया। पुलिस ने ट्रक को इस आरोप में जब्त किया था कि उसमें अवैध रूप से मवेशियों का परिवहन किया जा रहा था। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य के भीतर गाय या उसके वंश (progeny) का केवल परिवहन (Transportation) करना तब तक अपराध नहीं है, जब तक कि वह वध (Slaughtering) के उद्देश्य से न किया जा रहा हो।

कोर्ट का मुख्य तर्क: बीफ नहीं मिला, तो तस्करी का सबूत कहां?

  • हाई कोर्ट ने मामले के तथ्यों की जांच करते हुए कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को नोट किया।
  • कोई बीफ नहीं: वाहन के भीतर कोई गोमांस (Beef) बरामद नहीं हुआ था।
  • वध का इरादा नहीं: रिकॉर्ड पर ऐसा कुछ भी नहीं था जिससे यह साबित हो सके कि गायों को वध के लिए तस्करी कर ले जाया जा रहा था।
  • अदालत की टिप्पणी: “राज्य के भीतर गायों या उनके वंश का मात्र परिवहन करना इस अधिनियम के तहत अपराध नहीं माना जा सकता।”

धारा 5-A(7) और जब्ती का विवाद

  • सरकारी वकील (AGA) ने दलील दी थी कि UP गोवध निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2020 की धारा 5-A(7) के तहत वाहन को जब्त करना कानूनी रूप से सही है।
  • कानून क्या कहता है? यह धारा तब लागू होती है जब वाहन का उपयोग अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन में ‘बीफ’ या ‘गाय’ ले जाने के लिए किया गया हो।
  • कोर्ट का जवाब: चूंकि परिवहन करना अपने आप में अपराध नहीं है (यदि वध का उद्देश्य न हो), इसलिए जब्ती की कार्यवाही आधारहीन है।

वाहन का कबाड़ बनना और आजीविका का सवाल

  • याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि उसका ट्रक पिछले दो वर्षों से थाने के खुले परिसर में खड़ा है।
  • मूल्य में कमी: लंबे समय तक पुलिस कस्टडी में रहने से वाहन खराब हो रहा है और कबाड़ (Junk) में बदल रहा है।
  • आजीविका: वाहन जब्त होने से मालिक की आजीविका छीन गई है।
  • सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: कोर्ट ने दोहराया कि मजिस्ट्रेट को ऐसे मामलों में तुरंत बांड और सुरक्षा लेकर वाहन छोड़ने का आदेश देना चाहिए।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

बिंदुविवरण
मामलामार्च 2024 में दर्ज FIR, जिसमें गोवध और पशु क्रूरता अधिनियम की धाराएं लगी थीं।
कोर्ट का आदेशट्रक को तुरंत रिहा किया जाए (निजी बांड और जमानत पर)।
शर्तेंमालिक वाहन को न तो बेचेगा और न ही उसमें कोई बदलाव करेगा; जरूरत पड़ने पर कोर्ट में पेश करेगा।
क्षेत्राधिकारकोर्ट ने कहा कि वैकल्पिक उपचार होने के बावजूद, वह अनुच्छेद 226/227 के तहत न्याय देने के लिए स्वतंत्र है।

कानून का संतुलित उपयोग

इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह फैसला उन लोगों के लिए बड़ी राहत है जो डेयरी या कृषि कार्यों के लिए वैध रूप से पशुओं का परिवहन करते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस केवल संदेह के आधार पर या बिना ‘वध’ के सबूत के किसी के वाहन को अनिश्चितकाल के लिए जब्त नहीं रख सकती। न्याय का उद्देश्य अपराध रोकना है, किसी की वैध आजीविका को नष्ट करना नहीं।

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