Forensic Crisis: बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र में फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरीज (FSL) की खराब स्थिति और वहां लंबित मामलों के भारी ‘बैकलॉग’ पर सख्त रुख अपनाया है।
हाईकोर्ट के जस्टिस शिवकुमार दिगे की बेंच ने राज्य सरकार को 28 अप्रैल, 2026 तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने चिंता जताई है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट में देरी के कारण आपराधिक मामलों का निपटारा नहीं हो पा रहा है और आरोपी बिना ट्रायल के सालों जेल में बंद हैं। कोर्ट ने राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) से फॉरेंसिक बुनियादी ढांचे, कार्यभार और देरी पर एक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
हाई कोर्ट के कड़े सवाल (The Court’s Query)
- लैब की उपलब्धता: राज्य में वर्तमान में कुल कितनी फॉरेंसिक लैब चालू हैं?
- कार्यभार (Workload): प्रत्येक लैब में कितने केस पेंडिंग हैं और एक रिपोर्ट तैयार करने में औसत कितना समय लगता है?
- विस्तार योजना: क्या सरकार पेंडेंसी को कम करने के लिए नई फॉरेंसिक लैब स्थापित करने पर विचार कर रही है?
चौंकाने वाला खुलासा: अभी 2020 के सैंपल की जांच चल रही है
- यह मामला एक हत्या के आरोपी, मोहन शंकर तुर्डे, की जमानत याचिका के दौरान सामने आया।
- दलील: आरोपी के वकील सत्यव्रत जोशी ने तर्क दिया कि उनका मुवक्किल दो साल से जेल में है, लेकिन अब तक CCTV फुटेज की फॉरेंसिक रिपोर्ट नहीं आई है।
- सरकारी पक्ष: अतिरिक्त लोक अभियोजक एम.जी. पाटिल ने कोर्ट को बताया कि जब जांच अधिकारी ने लैब से संपर्क किया, तो पता चला कि वहां अभी 2020 के सैंपल्स की जांच की जा रही है। चूंकि यह केस 2024 का है, इसलिए रिपोर्ट आने में अभी लंबा समय लग सकता है।
पुणे मर्डर केस की पृष्ठभूमि (The Vadgaon Maval Incident)
- यह मामला पुणे के वडगांव मावल पुलिस स्टेशन में दर्ज एक हिंसक घटना से जुड़ा है।
- आरोप: कुसुर गांव के पास एक मामूली कहासुनी के बाद गैर-कानूनी रूप से इकट्ठा हुई भीड़ ने एक व्यक्ति पर लकड़ी के लट्ठों, लोहे की छड़ों और कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई।
- CCTV की अहमियत: अभियोजन पक्ष आरोपी की मौजूदगी साबित करने के लिए सीसीटीवी फुटेज पर निर्भर है, जबकि बचाव पक्ष ने ‘अलीबी’ (घटना के समय कहीं और होने) का दावा किया है। ऐसे में फॉरेंसिक जांच इस केस का सबसे निर्णायक सबूत है।
केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| बिंदु | विवरण |
| न्यायाधीश | जस्टिस शिवकुमार दिगे। |
| समस्या | फॉरेंसिक लैब में 2020 से लंबित मामलों का बैकलॉग। |
| आरोपी | मोहन शंकर तुर्डे (2 साल से हिरासत में)। |
| डेडलाइन | गृह विभाग को 28 अप्रैल, 2026 तक रिपोर्ट देनी है। |
न्याय में देरी, न्याय से वंचित करना है
फॉरेंसिक रिपोर्ट में 4-5 साल की देरी न्याय प्रणाली के लिए एक बड़ा संकट है। बॉम्बे हाई कोर्ट का यह हस्तक्षेप न केवल एक व्यक्ति की जमानत से जुड़ा है, बल्कि यह राज्य की पूरी कानूनी मशीनरी को जवाबदेह बनाने की कोशिश है। यदि वैज्ञानिक साक्ष्य समय पर नहीं मिलते, तो न केवल निर्दोष व्यक्ति जेल में सड़ते रहेंगे, बल्कि असली अपराधी भी तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर बच निकलेंगे।

