Friday, October 30, 2026
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Leader Of Opposition: हस्ताक्षर जालसाजी मामला में अभिषेक बनर्जी को राहत…किस केस में याचिका दायर करने की अनुमति, पढ़िए यहां पूरा मामला

Leader Of Opposition: तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को कथित हस्ताक्षर जालसाजी के मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट से एक अंतरिम राहत मिली है।

हाईकोर्ट के जस्टिस अपूर्वा सिन्हा राय की अवकाशकालीन पीठ (Vacation Bench) ने अभिषेक बनर्जी के वकीलों की मौखिक प्रार्थना को स्वीकार करते हुए यह निर्देश दिया। उनके वकीलों के मुताबिक, एफआईआर (FIR) को चुनौती देने और अंतरिम सुरक्षा की मांग करने वाली इस याचिका पर शुक्रवार (5 जून) को सुनवाई होने की संभावना है। कोर्ट ने उन्हें राज्य सीआईडी (CID) द्वारा किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई (Coercive Action) से सुरक्षा की मांग करने वाली याचिका दाखिल करने की अनुमति दे दी है।

क्या है पूरा मामला? (विधायकों के फर्जी दस्तखत का खेल)

मामला: यह पूरा विवाद टीएमसी के दो पूर्व विधायकों के हस्ताक्षरों में हुई कथित हेराफेरी से जुड़ा है।

विधायकों की शिकायत: टीएमसी के दो विधायकों रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने विधानसभा सचिवालय से शिकायत की थी कि बालीगंज के विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता (Leader of Opposition) नियुक्त करने के लिए टीएमसी के संकल्प पत्र (Resolution) में उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे।

CID को सौंपी गई जांच: इस शिकायत के बाद विधानसभा सचिवालय ने कोलकाता पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई, जिसे बाद में राज्य के गृह सचिव ने सीआईडी (CID) को ट्रांसफर कर दिया। दिलचस्प बात यह है कि शिकायत करने वाले दोनों विधायकों को बाद में ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ के आरोप में टीएमसी से निष्कासित कर दिया गया था।

समन और बीमारी का हवाला: इस मामले की जांच के सिलसिले में सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को सोमवार को पूछताछ के लिए तलब (Summon) किया था। हालांकि, उन्होंने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए एजेंसी के सामने पेश होने से इनकार कर दिया और समय बढ़ाने की मांग की। इसके बाद सीआईडी ने नया नोटिस जारी कर उन्हें 8 जून को जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया है।

राजनीतिक सरगर्मियों के बीच कानूनी लड़ाई

अभिषेक बनर्जी के वकीलों का कहना है कि वे इस मामले में दर्ज एफआईआर को पूरी तरह से चुनौती दे रहे हैं और अदालत से यह सुरक्षा चाहते हैं कि सीआईडी सुनवाई पूरी होने तक उन्हें गिरफ्तार या उनके खिलाफ कोई सख्त कदम न उठाए। यह कानूनी घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल काफी गरमाया हुआ है। बीते शनिवार को दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर शहर में चुनाव बाद हुई हिंसा (Post-Poll Violence) के एक कथित पीड़ित के घर का दौरा करने के दौरान अभिषेक बनर्जी पर हमला भी हुआ था।

विश्लेषण: टीएमसी और अभिषेक बनर्जी के लिए इस केस के मायने

कानूनी और राजनीतिक पहलूवर्तमान स्थिति और इसके प्रभाव
सीआईडी की कार्रवाई पर ब्रेक?अगर शुक्रवार को हाई कोर्ट से अभिषेक बनर्जी को अंतरिम सुरक्षा (Interim Protection) मिल जाती है, तो सीआईडी उन्हें ८ जून या उसके बाद भी कोर्ट की अनुमति के बिना गिरफ्तार नहीं कर पाएगी।
पार्टी के भीतर का विवादनिष्कासित विधायकों के आरोपों ने टीएमसी के आंतरिक फैसलों और सांगठनिक दस्तावेजों की सत्यता पर सवाल खड़े किए हैं, जिसकी कानूनी स्क्रूटनी अब हाई कोर्ट की निगरानी में होगी।
राजनीतिक टाइमिंगहमले और सीआईडी समन के बीच कोर्ट की यह अनुमति अभिषेक बनर्जी के लिए एक बड़ी राहत है, जिससे उन्हें अपनी कानूनी रणनीति तैयार करने का समय मिल गया है।

बॉटमलाइन (The Bottom Line)

कलकत्ता हाई कोर्ट की अवकाशकालीन पीठ का यह फैसला अभिषेक बनर्जी के लिए सीआईडी पेशी से पहले एक मजबूत कानूनी कवच साबित हो सकता है। हालांकि, सीआईडी की एफआईआर रद्द होगी या नहीं, और क्या उन्हें लंबी सुरक्षा मिलेगी, इसका फैसला शुक्रवार को होने वाली विस्तृत सुनवाई में तय होगा। बंगाल की राजनीति में कोर्ट के इस फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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