Wednesday, June 17, 2026
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Delhi High Court Hacked: बंद करो यह कोर्ट…वर्चुअल सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट की लाइव सुनवाई में अश्लील वीडियो की एंट्री, पढ़ें इस केस को

Delhi High Court Hacked: दिल्ली हाई कोर्ट में 29 अप्रैल, 2026 को एक बेहद शर्मनाक और गंभीर स्थिति पैदा हो गई।

दिल्ली हाई कोर्ट के कोर्ट रूम नंबर 1 में, जहाँ मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया मामलों की सुनवाई कर रहे थे, दोपहर 12:56 बजे एक अज्ञात यूजर ने बार-बार अश्लील वीडियो और परेशान करने वाला संगीत चलाकर कार्यवाही को बाधित किया।

घटना का क्रम (Sequence of Events)

  • पहला हमला: दोपहर 12:56 बजे अचानक स्क्रीन पर आपत्तिजनक सामग्री चली। कोर्ट स्टाफ ने तुरंत VC बंद कर दी।
  • दूसरा हमला: कुछ मिनटों बाद जब सिस्टम बहाल हुआ, तो ‘Shjit Singh’ नाम से लॉग-इन यूजर ने दोबारा वही हरकत की।
  • तीसरा हमला: कोर्ट ने एक बार फिर प्रयास किया, लेकिन तीसरी बार भी वही अश्लील सामग्री और शोर-शराबा शुरू हो गया।
  • प्रभाव: इस साइबर हमले के कारण कोर्ट के सबसे व्यस्त दिनों में से एक (PIL Day) की कार्यवाही पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई।

सुरक्षा और प्रशासनिक कार्रवाई (Update & Action)

हाई कोर्ट प्रशासन ने इस मामले को “अत्यंत गंभीरता” से लिया है:

  • IFSO को शिकायत: दिल्ली पुलिस की IFSO (Intelligence Fusion & Strategic Operations) यूनिट, जो जटिल साइबर अपराधों की जांच करती है, में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है।
  • प्रारंभिक जांच: पुलिस अब उस ‘IP एड्रेस’ और लॉग-इन विवरणों की जांच कर रही है जिससे यह घुसपैठ की गई थी।
  • सिस्टम में बदलाव: भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अब ‘Locked Meeting’ और ‘Waiting Room’ जैसे फीचर्स को अनिवार्य रूप से लागू किया जा रहा है, जहाँ केवल पहचाने गए वकीलों को ही ‘Participant’ के रूप में प्रवेश मिलेगा।

हैकर की चुनौती और ‘अमेरिका’ कनेक्शन

  • जब तीसरी बार VC बाधित हुई, तो आरोपी ने न केवल स्क्रीन शेयर की बल्कि एक ऑडियो भी चलाया।
  • धमकी: ऑडियो में दावा किया गया कि यह “अमेरिका से किया गया एक हैक” है।
  • चेतावनी: हैकर ने कहा, “इस मीटिंग को अभी बंद करो और दोबारा कभी चालू मत करना। तुम हैक हो चुके हो।”

सुरक्षा में चूक कैसे हुई? (How it happened)

  • दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यवाही Cisco Webex प्लेटफॉर्म पर होती है, जहाँ दो तरह के यूजर होते हैं।
  • Participants (प्रतिभागी): वकील, वादी और सरकारी अधिकारी।
  • Viewers (दर्शक): जनता और पत्रकार। आमतौर पर दर्शकों के लिए ‘स्क्रीन शेयरिंग’ का विकल्प बंद रहता है, लेकिन हैकर ने सिस्टम की किसी खामी का फायदा उठाकर कंट्रोल हासिल कर लिया।

अब क्या कदम उठाए गए हैं?

  • अडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने इसे संस्थान की अखंडता पर हमला बताया और सख्त निर्देश मांगे।
  • IT एक्ट का इस्तेमाल: कोर्ट से अनुरोध किया गया कि IT एक्ट की धारा 69A और 79(3)(d) के तहत सरकार को निर्देश दिए जाएं ताकि इस घटना के इंटरनेट पर सर्कुलेट हो रहे वीडियो को तुरंत हटाया जा सके।
  • मीटिंग ‘लॉक्ड’: लंच के बाद जब कार्यवाही शुरू हुई, तो मीटिंग को ‘Locked’ मोड पर डाल दिया गया। अब केवल मॉडरेटर की अनुमति से ही कोई अंदर आ सकता है।
  • सख्त चेतावनी: कोर्ट स्टाफ ने चैटबॉक्स में लिखा कि जो कोई भी अपना नाम और ‘आइटम नंबर’ (जिस केस में वे पेश हो रहे हैं) नहीं दिखाएगा, उसे तुरंत बाहर निकाल दिया जाएगा।

पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं

  • यह पहली बार नहीं है जब भारतीय न्यायपालिका को ऐसे साइबर हमले का सामना करना पड़ा हो।
  • कर्नाटक हाई कोर्ट (2023): छह कोर्ट हॉल में अश्लील कंटेंट चलने के बाद लाइव स्ट्रीमिंग को कई दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया गया था।
  • कर्नाटक हाई कोर्ट (2021): एक सुनवाई के दौरान एक अर्ध-नग्न व्यक्ति स्क्रीन पर आ गया था, जिसे वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने “अदालत की घोर अवमानना” बताया था।

केस के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

विवरणविवरण
प्लेटफॉर्मCisco Webex (दिल्ली और इलाहाबाद HC इसी का उपयोग करते हैं)।
प्रभावित कोर्टमुख्य न्यायाधीश की बेंच सहित कई अन्य अदालतें।
नियम उल्लंघनकोर्ट कार्यवाही की रिकॉर्डिंग वर्जित है, फिर भी वीडियो वायरल हुए।
सुरक्षा बदलावअब ‘लॉक्ड’ मीटिंग और अनिवार्य पहचान वेरिफिकेशन।
जांचदिल्ली पुलिस शिकायत मिलते ही केस दर्ज करेगी।

डिजिटल कोर्ट के लिए अलार्म बेल

यह घटना भारतीय अदालतों के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक वेक-अप कॉल है। जहाँ एक ओर Open Court के सिद्धांत के तहत जनता को कार्यवाही देखने की अनुमति है, वहीं दूसरी ओर साइबर सुरक्षा की यह सेंध न्यायपालिका की गरिमा को नुकसान पहुँचाती है। अब भविष्य में अदालतों को Vconsol जैसे अधिक सुरक्षित स्वदेशी प्लेटफॉर्म या सख्त ‘रजिस्ट्रेशन प्रोसेस’ पर विचार करना पड़ सकता है।

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