Monday, September 21, 2026
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Clash in Court: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में जज-युवा वकील के बीच तीखी बहस…पुलिस को बुलाओ, इसे कस्टडी में लो, वायरल वीडियो से पहले खबर देखें

Clash in Court: आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट की एक हालिया कार्यवाही का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है।

प्रमुख बिंदु (Key Highlights)

विवरणतथ्य
न्यायाधीशजस्टिस
मुद्दाLOC और पासपोर्ट जब्त करने के खिलाफ याचिका।
विवाद का कारणजज द्वारा मामले को स्थगित करने पर वकील का कथित अभद्र व्यवहार।
अंतिम परिणामकस्टडी का आदेश वापस लिया गया, मामला छुट्टियों के बाद के लिए स्थगित।

बार एसोसिएशन के हस्तक्षेप के बाद आदेश हुआ रद्द

दरअसल, एक केस की सुनवाई के दौरान जस्टिस एक युवा वकील के व्यवहार पर इस कदर भड़क गए कि उन्होंने उसे 24 घंटे के लिए पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दे दिया। हालांकि, बाद में बार एसोसिएशन के हस्तक्षेप के कारण इस आदेश को रद्द कर दिया गया, लेकिन कोर्ट रूम के भीतर हुआ यह घटनाक्रम कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह घटना तब हुई जब कोर्ट एक लुक आउट नोटिस (LOC) और पासपोर्ट जब्त किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

विवाद की शुरुआत (The Point of Conflict)

  • जज एक पुराने फैसले की कॉपी देखने के लिए मामले को स्थगित (Adjourn) करना चाहते थे, जिस पर वकील ने कुछ ऐसी प्रतिक्रिया दी जिसने जज को नाराज कर दिया।
  • जज की टिप्पणी: जस्टिस ने कहा, “क्या मैंने आपकी याचिका खारिज करने का फैसला कर लिया है? क्या आप खुद को बहुत बड़ा सीनियर एडवोकेट समझ रहे हैं? पुलिस को बुलाओ। आप जाकर अपील फाइल कीजिए।”
  • वकील का पक्ष: वकील ने कहा कि वह ‘दर्द’ (Pain) में है और उसने हाथ जोड़कर माफी मांगते हुए कहा, “माफ कर दीजिए… मैं आपकी कृपा की भीख मांग रहा हूँ, लॉर्डशिप।”

‘धृष्ट’ व्यवहार और पुलिस कस्टडी (Indolent Behavior)

  • जज वकील के माफी मांगने के बाद भी शांत नहीं हुए और उन्होंने कोर्ट रूम में मौजूद अन्य वकीलों के नाम रिकॉर्ड पर लिए ताकि उन्हें इस घटना का ‘गवाह’ बनाया जा सके।
  • आदेश: कोर्ट ने वकील के व्यवहार को “धृष्ट” (Indolent) करार दिया और पुलिस को उसे 24 घंटे की कस्टडी में लेने का निर्देश दे दिया।
  • व्यंग्य: जज ने यहाँ तक कह दिया कि वकील को इस आदेश के खिलाफ बार एसोसिएशन के साथ मिलकर धरना देना चाहिए।

बार एसोसिएशन का हस्तक्षेप (Bar Association’s Intervention)

  • जब स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई, तब हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्यों ने बीच-बचाव किया।
  • आदेश रद्द: एसोसिएशन के आग्रह और वकील की ओर से दोबारा माफी मांगे जाने के बाद, जस्टिस राव ने वकील को हिरासत में भेजने के अपने आदेश को वापस ले लिया।
  • स्थगन: मामले की अगली सुनवाई अब गर्मियों की छुट्टियों (Summer Vacation) के बाद तय की गई है।

अदालती गरिमा बनाम पेशेवर आचरण

यह घटना कोर्ट रूम के भीतर न्यायिक मर्यादा (Judicial Decorum) और वकीलों के आचरण के बीच के बारीक संतुलन को दर्शाती है। हालांकि जजों के पास कोर्ट की अवमानना या अनुशासनहीनता पर कार्रवाई का अधिकार होता है, लेकिन पुलिस कस्टडी जैसे आदेश दुर्लभ होते हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि युवा वकीलों को कोर्ट में अपनी बात रखने के दौरान अत्यधिक संयम और भाषा की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए।

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