Thursday, August 6, 2026
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Chithirai Festival: श्रद्धालुओं पर जूते फेंकना उपद्रव नहीं, अपमान है…चिंता मत कीजिए, लोहे के हाथों से अब निपटने की जरूरत, पढ़ें तल्ख टिप्पणी

Chithirai Festival: मद्रास हाई कोर्ट ने मदुरै के प्रसिद्ध चित्तिरै महोत्सव (Chithirai Festival) के दौरान श्रद्धालुओं पर चप्पल फेंकने की घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाया है।

हाईकोर्ट के जस्टिस एल. विक्टोरिया गौरी ने इसे केवल “गुंडागर्दी” मानने से इनकार करते हुए इसे “संवैधानिक नैतिकता” और भारत की “धर्मनिरपेक्ष भावना” पर हमला करार दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य ऐसी अपमानजनक हरकतों के सामने “मूकदर्शक” (Passive Spectator) नहीं बना रह सकता। यह आदेश पी. सुंदरवदिवेल द्वारा दायर एक याचिका पर आया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि भगवान कल्लाझगर की शोभायात्रा के दौरान असामाजिक तत्व श्रद्धालुओं पर जूते-चप्पल फेंककर उत्सव की पवित्रता भंग कर रहे हैं।

संवैधानिक और सभ्यतागत मूल्य

  • अदालत ने इस उत्सव के महत्व को रेखांकित किया।
  • सभ्यता का सातत्य: चित्तिरै महोत्सव केवल एक मंदिर का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह तमिल सभ्यता, संगम संस्कृति और विरासत का जीवित प्रतीक है।
  • धर्मनिरपेक्ष भाईचारा: भगवान कल्लाझगर का वैगई नदी में प्रवेश और शैव-वैष्णव परंपराओं का मिलन भारतीय अर्थों में ‘धर्मनिरपेक्ष भाईचारे’ की सच्ची अभिव्यक्ति है।
  • अधिकारों का संरक्षण: संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म को मानने और उसका पालन करने की स्वतंत्रता देता है। श्रद्धालुओं पर चप्पल फेंकना इस मौलिक अधिकार और सार्वजनिक शालीनता का गंभीर उल्लंघन है।

कैलकुलेटेड इंडिग्निटी (सोचा-समझा अपमान)

  • प्रतीकात्मक अपमान: एक पवित्र जुलूस में चप्पल फेंकना उस विश्वास को प्रदूषित करने और अपमानित करने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास है।
  • सख्त कार्रवाई: जो लोग पवित्र आयोजन को बाधित करने की कोशिश करते हैं, वे “सामान्य अव्यवस्थित आचरण” की आड़ में किसी भी प्रकार की रियायत के हकदार नहीं हैं। उनके खिलाफ “लोहे के हाथों” (Iron Hand) से निपटने की जरूरत है।

हाई कोर्ट के कड़े निर्देश

  • उत्सव की पवित्रता बनाए रखने के लिए कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश जारी किए।
  • स्ट्राइकिंग फोर्स की तैनाती: जुलूस के 7.6 किलोमीटर लंबे शहरी मार्ग पर 15 से 20 स्ट्राइकिंग फोर्स वाहनों (विशेषज्ञ सैन्य/अर्धसैनिक शैली के वाहन) को तैनात किया जाए।
  • तत्काल गिरफ्तारी: यदि कोई भी व्यक्ति चप्पल फेंकते या व्यवधान डालते पाया जाता है, तो उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
  • इंटेलिजेंस पुलिसिंग: उत्सव की अवधि के दौरान खुफिया जानकारी आधारित पुलिसिंग और निगरानी को तेज किया जाए।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

विवरणतथ्य
न्यायाधीशजस्टिस एल. विक्टोरिया गौरी।
मुख्य मुद्दाभगवान कल्लाझगर की शोभायात्रा के दौरान जूते-चप्पल फेंकना।
कोर्ट की परिभाषाइसे “संवैधानिक नैतिकता का अपमान” बताया।
सुरक्षा निर्देश7.6 किमी मार्ग पर स्ट्राइकिंग फोर्स की तैनाती और स्पॉट अरेस्ट।
ऐतिहासिक संदर्भमदुरै (Koodal) को तमिल सभ्यता की सांस्कृतिक राजधानी बताया।

सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा

मद्रास हाई कोर्ट का यह फैसला धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के बीच एक मजबूत सेतु बनाता है। कोर्ट ने संदेश दिया है कि लोकतंत्र में धर्मनिरपेक्षता का अर्थ धार्मिक भावनाओं के प्रति लापरवाही नहीं है, बल्कि सभी आस्थाओं को अपमान और व्यवधान से सुरक्षा प्रदान करना है।

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