Wedding Bus Service: दिल्ली के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (सेंट्रल) ने स्पष्ट किया कि शादी जैसे समयबद्ध कार्यक्रमों में देरी न केवल असुविधा पैदा करती है, बल्कि परिवारों के लिए मानसिक पीड़ा और सामाजिक शर्मिंदगी का कारण भी बनती है।
आदेश का मुख्य अंश (Final Order)
| विवरण | आदेश |
| रिफंड राशि | ₹14,000 (6% वार्षिक ब्याज के साथ)। |
| मुआवजा | ₹50,000 (मानसिक प्रताड़ना और असुविधा के लिए)। |
| भुगतान की अवधि | 30 दिन के भीतर। |
| देरी की स्थिति में | 30 दिन बाद कुल राशि पर 9% वार्षिक ब्याज लगेगा। |
कैप्रिकॉर्न ट्रांसपोर्ट सर्विसेज के खिलाफ दायर था मामला
आयोग ने एक बस ऑपरेटर को आदेश दिया है कि वह अपनी सेवा में कमी के कारण शिकायतकर्ता को भुगतान की गई राशि वापस करे और मानसिक प्रताड़ना के लिए हर्जाना दे। यह मामला दिसंबर 2022 का है, जब शादी के लिए बुक की गई बस रास्ते में खराब हो जाने के कारण एक बारात (“Barat”) अपनी मंजिल पर कई घंटे देरी से पहुँची थी। यह मामला कैप्रिकॉर्न ट्रांसपोर्ट सर्विसेज के खिलाफ दायर किया गया था। बारात को दिल्ली से बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश) जाना था।
शिकायत और घटनाक्रम
- बुकिंग: शिकायतकर्ता ने 8 दिसंबर, 2022 को अपनी शादी के लिए बस बुक की थी।
- ब्रेकडाउन: बस दोपहर 2:30 बजे पहुँचनी थी, लेकिन पहले ही देरी से आई। इसके बाद जेवर के पास बस खराब हो गई, जिससे बारात मंजिल से लगभग 58 किलोमीटर दूर फंस गई।
- असुविधा: बारात को रात 3:00 बजे वैकल्पिक बसों के जरिए मंजिल तक पहुँचना पड़ा, जिससे शादी की रस्में प्रभावित हुईं।
ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर का बचाव (और कोर्ट का रुख)
- ट्रांसपोर्टर ने तर्क दिया कि शिकायतकर्ता ने पूरे ₹18,500 का भुगतान नहीं किया था (केवल ₹14,000 दिए थे)। बाराती खुद देरी से आए थे। गूगल मैप्स के जरिए बताए गए उबड़-खाबड़ रास्ते पर चलने के कारण बस खराब हुई।
- आयोग की टिप्पणी: आयोग ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि एक बार जब ऑपरेटर ने पैसे स्वीकार कर लिए, तो वह ‘आंशिक भुगतान’ का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। इसके अलावा, ब्रेकडाउन के बाद ऑपरेटर ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की थी।
मुआवजे का आधार
- अध्यक्ष दिव्य ज्योति जयपुरीयार और सदस्य डॉ. रश्मि बंसल की पीठ ने अपने फैसले में कई टिप्पणी की।
- समय का महत्व: शादियां समयबद्ध होती हैं। बारात के देर से पहुँचने से दूल्हे और दुल्हन के परिवारों को काफी परेशानी और मानसिक तनाव झेलना पड़ता है।
- उपभोक्ता कानून: उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत मुआवजा केवल वित्तीय नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सेवा में कमी के कारण हुई मानसिक प्रताड़ना और असुविधा के लिए भी दिया जाता है।
ग्राहकों के प्रति जवाबदेही
हालांकि आयोग ने ड्राइवर के नशे में होने या बस की सीटों के टूटे होने जैसे आरोपों को सबूतों के अभाव में खारिज कर दिया, लेकिन ‘सेवा में देरी और ब्रेकडाउन’ को गंभीर लापरवाही माना। यह आदेश उन सभी सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए एक चेतावनी है जो महत्वपूर्ण आयोजनों (जैसे शादी-विवाह) के लिए अनुबंध तो कर लेते हैं, लेकिन संकट के समय उचित बैकअप देने में विफल रहते हैं।

