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Minister Kunwar Vijay Shah: कर्नल सोफिया कुरैशी का अपमान…अब बहुत हो गया, मंत्री पर मुकदमा क्यों नहीं चला रहे, उन्हें कोई पश्चाताप नहीं, पढ़िए सुप्रीम तल्खी

Minister Kunwar Vijay Shah: सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार के प्रति कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा— “अब बहुत हो गया” (Enough is enough)।

सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी

कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह अपने मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी (Prosecution Sanction) देने पर चार सप्ताह के भीतर फैसला ले। यह मामला सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ मंत्री द्वारा की गई आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियों से जुड़ा है, जो पिछले साल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद चर्चा में आई थीं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मंत्री विजय शाह के बयानों को “अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण” (Most Unfortunate) करार दिया।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

विवरणतथ्य
आरोपीकुंवर विजय शाह (कैबिनेट मंत्री, मध्य प्रदेश)।
पीड़ितकर्नल सोफिया कुरैशी (सेना अधिकारी)।
जांचसुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित SIT द्वारा पूर्ण।
मुख्य आदेश4 हफ्ते में मुकदमा चलाने की मंजूरी पर फैसला ले सरकार।
अगली सुनवाईगर्मियों की छुट्टियों के बाद।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी: शब्दों का चयन और नीयत

  • सुनवाई के दौरान जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मंत्री ने गलती से वे शब्द कहे थे और वे उनका इरादा शायद प्रशंसा करना था, तो कोर्ट ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
  • तर्कहीन दलील: CJI ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, बल्कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। मंत्री में पश्चाताप की कोई भावना भी नहीं दिखती।”
  • नेताओं की वाकपटुता: कोर्ट ने तंज कसते हुए कहा कि राजनीतिक हस्तियां जब किसी की प्रशंसा करना चाहती हैं, तो वे शब्दों के चयन में बहुत माहिर होती हैं। अगर यह ‘जुबान फिसलने’ का मामला होता, तो माफी तुरंत और स्पष्ट होनी चाहिए थी।

SIT की रिपोर्ट और कानूनी बाधा

  • सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) अपनी जांच पूरी कर चुका है और सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट सौंप चुका है।
  • SIT का निष्कर्ष: जांच दल ने मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार पाए हैं और सरकार से मंजूरी मांगी है।
  • धारा 196 BNS: आगे की अदालती कार्यवाही इसलिए रुकी हुई है क्योंकि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 (जो सांप्रदायिक नफरत और दुर्भावना फैलाने से संबंधित है) के तहत राज्य सरकार की अनिवार्य मंजूरी का इंतजार है।

मामले की पृष्ठभूमि: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और अपमानजनक टिप्पणी

  • विवाद: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने मीडिया ब्रीफिंग में देश का ध्यान खींचा था। इसके बाद विजय शाह का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें उन्होंने कर्नल कुरैशी के खिलाफ “गंदी भाषा” और “अपमानजनक” टिप्पणियों का इस्तेमाल किया था।
  • HC की फटकार: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पहले ही इस भाषा को “गटर की भाषा” बताते हुए पुलिस को FIR दर्ज करने का आदेश दिया था।
  • कोर्ट का धैर्य: जुलाई 2025 में भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मंत्री कोर्ट के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं क्योंकि उन्होंने अब तक संतोषजनक सार्वजनिक माफी रिकॉर्ड पर नहीं रखी है।

वर्दी का सम्मान और मर्यादा

सुप्रीम कोर्ट का यह कड़ा रुख संदेश देता है कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोग देश की सेवा करने वाले सैन्य अधिकारियों के सम्मान के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते। “Enough is enough” की टिप्पणी यह स्पष्ट करती है कि अब सरकार और मंत्री के पास कानूनी प्रक्रिया से बचने के रास्ते खत्म हो रहे हैं।

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