CJI’s Story: सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने मजिस्ट्रेट परीक्षा की उत्तर पुस्तिका के पुनर्मूल्यांकन की मांग करने वाली प्रेरणा गुप्ता की याचिका को खारिज कर दिया।
एक निजी किस्सा सुनाकर भविष्य के लिए नई दिशा दिखाई
एक दिलचस्प और प्रेरणादायक नजारा देखने को मिला, जब मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने न्यायिक सेवा (Judicial Services) की एक अभ्यर्थी को अपने जीवन का एक निजी किस्सा सुनाकर भविष्य के लिए नई दिशा दिखाई। इस साथ ही उन्हें वकालत के पेशे की अनंत संभावनाओं का अहसास भी कराया।यह मामला तब शुरू हुआ जब याचिकाकर्ता प्रेरणा गुप्ता ने अपनी कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन के लिए कोर्ट से गुहार लगाई। उनकी निराशा को भांपते हुए सीजेआई ने उन्हें अपना वह अनुभव सुनाया जिसने उन्हें आज इस मुकाम तक पहुँचाया।
1984 का वह ‘हार्टब्रेक’
- सीजेआई ने याद किया कि 1984 में जब वह कानून के अंतिम वर्ष में थे, तो उनका सपना भी एक न्यायिक अधिकारी (Judicial Officer) बनने का था। उन्होंने लिखित परीक्षा पास कर ली थी और इंटरव्यू के लिए बुलाए गए थे।
- इंटरव्यू पैनल के जज: सीजेआई ने बताया कि इंटरव्यू पैनल के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश वही थे, जिनकी अदालत में उन्होंने हाल ही में एक महत्वपूर्ण वैवाहिक मामले (सुनीता रानी बनाम बलदेव राज) में बहस की थी और जीत हासिल की थी।
- चैंबर का वाकया: इंटरव्यू से ठीक पहले उस जज ने युवा सूर्यकांत को अपने चैंबर में बुलाया और पूछा, “क्या तुम वाकई न्यायिक अधिकारी बनना चाहते हो?” सूर्यकांत के ‘हाँ’ कहते ही जज ने गुस्से में कहा— “मेरे चैंबर से बाहर निकल जाओ!”
वह सलाह जिसने बदल दी जिंदगी
सीजेआई ने बताया कि उस समय वह कांपते हुए बाहर आए और उन्हें लगा कि उनका करियर शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया। लेकिन अगले दिन जज ने उन्हें फिर बुलाया और एक ऐसी बात कही जिसने उनकी किस्मत बदल दी। अगर तुम जज बनना चाहते हो, तो तुम्हारा स्वागत है। लेकिन मेरी सलाह मानो तो न्यायिक अधिकारी मत बनो। वकालत की दुनिया (Bar) तुम्हारा इंतजार कर रही है। सीजेआई ने बताया कि उन्होंने वह इंटरव्यू छोड़ दिया और अपने माता-पिता को भी नहीं बताया कि उन्होंने यह मौका क्यों गँवाया। उन्होंने वकालत को चुना और उसी के रास्ते अंततः सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद तक पहुँचे।
Bar के पास देने के लिए बहुत कुछ है
- सीजेआई ने याचिकाकर्ता से मुस्कुराते हुए पूछा— “अब बताओ, क्या मेरा वह फैसला गलत था?” इसके साथ ही उन्होंने प्रेरणा गुप्ता को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि एक पेपर के पुनर्मूल्यांकन में उलझने के बजाय भविष्य की ओर देखें।
- सीधा रास्ता: कोर्ट ने कहा, मजिस्ट्रेट बनकर रैंक के माध्यम से ऊपर उठना।
- वकालत का रास्ता: एक वकील के रूप में अपनी साख बनाना और फिर सीधे उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होना।
- नतीजा: याचिका खारिज होने के बावजूद, याचिकाकर्ता वकील के चेहरे पर एक मुस्कान थी और वह सीजेआई की सलाह के साथ कोर्ट से बाहर निकलीं।
वकालत बनाम न्यायिक सेवा
यह घटना हमें याद दिलाती है कि कभी-कभी एक ‘अस्वीकृति’ वास्तव में एक बड़े और बेहतर अवसर की शुरुआत होती है। सीजेआई का यह संदेश उन सभी युवाओं के लिए है जो सरकारी परीक्षाओं के पीछे भाग रहे हैं— काबिलियत हो तो स्वतंत्र वकालत भी आपको न्यायपालिका के शीर्ष तक ले जा सकती है।

