Prison Tourism: हैदराबाद की चंचलगुडा सेंट्रल जेल ने “जेल पर्यटन” (Prison Tourism) के क्षेत्र में एक अनोखी और रोमांचक पहल शुरू की है।
‘फील द जेल’ (Feel the Jail) कार्यक्रम
तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने ‘फील द जेल’ (Feel the Jail) कार्यक्रम और एक नए जेल संग्रहालय का उद्घाटन किया। अब कोई भी आम नागरिक बिना कोई अपराध किए, सलाखों के पीछे की जिंदगी का अनुभव ले सकता है—बस इसके लिए आपको अपनी जेब ढीली करनी होगी। चंचलगुडा जेल प्रशासन ने उन लोगों के लिए यह दरवाजा खोला है जो हमेशा से यह जानना चाहते थे कि जेल के अंदर की दुनिया कैसी होती है। यह पहल संगारेड्डी जेल (222 साल पुरानी) के सफल प्रयोग और उसके संग्रहालय के ढहने के बाद अब चंचलगुडा में अधिक आधुनिक रूप में शुरू की गई है।
अनुभव का शुल्क और समय (Incarceration Tariff)
- जेल में रहने का अनुभव दो श्रेणियों में उपलब्ध है। इसमें 24 घंटे का प्रवास के लिए ₹2,000 (पूर्ण अनुभव) और 12 घंटे का प्रवास करने को ₹1,000 (संक्षिप्त अनुभव) होगा।
- संग्रहालय प्रवेश: छात्रों के लिए ₹10, अन्य वयस्कों के लिए ₹20 और 10 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रवेश निशुल्क है।
कैदियों जैसी दिनचर्या (The Inmate Lifestyle)
- यह केवल देखने का दौरा नहीं है, बल्कि एक वास्तविक अनुभव है। “पर्यटकों” को निम्नलिखित नियमों का पालन करना होगा।
- बैरक और बिस्तर: साधारण कोठरियों में नीली चादर वाले बेड, पीने के पानी के लिए मिट्टी का घड़ा और एक छोटा सा वॉशरूम दिया जाएगा।
- भोजन: पर्यटकों को वही जेल का खाना (Jail Food) दिया जाएगा जो नियमित कैदी खाते हैं।
- अनुशासन: उन्हें कैदियों की तरह ही सख्त दिनचर्या, प्रतिबंधित आवाजाही और समय के नियमों का पालन करना होगा।
जेल संग्रहालय: इतिहास की झलक
- स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ करेक्शनल एडमिनिस्ट्रेशन में बने इस संग्रहालय में औपनिवेशिक काल (Colonial Era) की सजाओं की यादें संजोई गई हैं।
- प्रदर्शनी: पुरानी सजा देने वाले उपकरण, दुर्लभ कलाकृतियाँ और थीम गैलरी।
- मकसद: यह दिखाना कि अतीत में कैदियों को किस तरह की शारीरिक और मानसिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
कमाई का उपयोग: कैदी कल्याण कोष
तेलंगाना जेल महानिदेशक (DG Prisons) सौम्या मिश्रा के अनुसार, इस पहल और संग्रहालय से मिलने वाली पूरी राशि ‘कैदी कल्याण और विकास कोष’ (Prisoners’ Welfare and Development Fund) में जाएगी। इसका उपयोग कैदियों के सुधार और उनके कौशल विकास के लिए किया जाएगा।
कैसा होगा जेल के अंदर का माहौल?
- यह कोई ‘एंटरटेनमेंट पार्क’ नहीं, बल्कि असली जेल जैसा अनुभव देने की कोशिश है।
- Barracks: यहाँ सिंगल बेड, पानी का मटका और वॉशरूम वाली साधारण कोठरियाँ हैं।
- Security Levels: नॉर्मल बैरक के साथ-साथ हाई-सिक्योरिटी बैरक का भी सेटअप है, जहाँ दोहरी ग्रिल और कड़ी पाबंदी होगी।
- Strict Routine: मेहमानों को जेल का खाना, रेगुलेटेड रूटीन और प्रतिबंधित आवाजाही (Restricted Movement) का पालन करना होगा।
देश का 5वां जेल म्यूजियम भी खुला
जेल के साथ ही एक Prison Museum का भी उद्घाटन किया गया है। यह पोर्ट ब्लेयर (सेल्यूलर जेल), कोलकाता, बेंगलुरु और गोवा के बाद देश का 5वां जेल म्यूजियम है।
म्यूजियम में क्या है खास?
- औपनिवेशिक इतिहास: अंग्रेजों के जमाने की बेड़ियाँ, सजा देने के उपकरण और जेल रिकॉर्ड्स।
- सुधार की कहानी: जेल कैसे सजा देने की जगह से सुधार केंद्र (Correctional Institution) बनी, इसे दिखाया गया है।
- कैदियों का योगदान: नागार्जुन सागर बांध (1961-68) के निर्माण में कैदियों की मेहनत के दस्तावेज़ भी यहाँ मौजूद हैं।
Governor ने साझा किए अपने अनुभव
तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने इमरजेंसी के दौरान बिताए अपने 19 महीने और 30 दिन के जेल जीवन को याद किया। उन्होंने कहा कि जेलों को ‘डिटेंशन सेंटर’ नहीं बल्कि ‘सुधार गृह’ होना चाहिए।
मकसद क्या है?
तेलंगाना की जेल महानिदेशक (DG Prisons) सौम्या मिश्रा के अनुसार, इसका उद्देश्य मनोरंजन नहीं, बल्कि जागरूकता और सहानुभूति पैदा करना है। हम चाहते हैं कि युवा आज़ादी की कीमत समझें और यह देखें कि जेलें अब केवल सजा की जगह नहीं, बल्कि पुनर्वास (Rehabilitation) के केंद्र हैं।
अनुभव की झलक: एक नज़र में (Quick Highlights)
| विवरण | जानकारी |
| स्थान | चंचलगुडा सेंट्रल जेल, हैदराबाद। |
| प्रोग्राम का नाम | ‘फील द जेल’ (Feel the Jail)। |
| शुल्क | ₹2,000 (24 घंटे) / ₹1,000 (12 घंटे)। |
| क्या मिलेगा? | जेल की कोठरी, जेल का खाना और कैदी जैसी दिनचर्या। |
| उद्घाटन | 12 मई, 2026 (राज्यपाल द्वारा)। |
जिज्ञासा और सुधार का संगम
जेल के प्रति इंसानी जिज्ञासा हमेशा से रही है। हैदराबाद की यह पहल न केवल लोगों के उस कौतूहल को शांत करती है, बल्कि उन्हें यह भी एहसास कराती है कि “स्वायत्तता और स्वतंत्रता” का खो जाना कितना कठिन होता है। इसके साथ ही, यह राजस्व उत्पन्न करने का एक रचनात्मक तरीका है जो सीधे तौर पर कैदियों के सुधार के काम आता है।

