Excise Policy: दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने दिल्ली आबकारी नीति (Excise Policy) मामले की सुनवाई के दौरान बेहद सख्त रुख अपनाया है।
आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) की कार्यवाही शुरू
हाईकोर्ट जस्टिस शर्मा ने घोषणा की है कि वह इस मामले के कुछ प्रतिवादियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) की कार्यवाही शुरू कर रही हैं। न्यायाधीश ने कोर्ट के खिलाफ की जा रही सोशल मीडिया पोस्ट पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि उनके और अदालत के खिलाफ “अत्यंत अपमानजनक, निंदात्मक और अवमाननापूर्ण” (Extremely defamatory and contemptuous) सामग्री पोस्ट की जा रही है, जिस पर वह चुप नहीं रह सकतीं। यह विवाद तब और गहरा गया जब आम आदमी पार्टी (AAP) के तीन प्रमुख नेताओं अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने न्यायाधीश को पत्र लिखकर अदालत की कार्यवाही में शामिल होने या अपना वकील खड़ा करने से इनकार कर दिया था।
“न्याय की उम्मीद खो चुकी है” — केजरीवाल का गांधीवादी बहिष्कार
- सुनवाई से पहले मामले में एक बड़ा मोड़ आया जब तीनों आप नेताओं ने अदालत को अपने फैसले से अवगत कराया।
- सत्याग्रह का रास्ता: अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा को पत्र लिखकर कहा, “मैंने जस्टिस स्वर्ण कांता से न्याय पाने की उम्मीद खो दी है। इसलिए, मैंने महात्मा गांधी द्वारा दिखाए गए सत्याग्रह के मार्ग पर चलने का फैसला किया है।”
- बिना वकील के रहेंगे: केजरीवाल के बाद मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने भी पत्र लिखकर सूचित किया कि वे इस अदालत के समक्ष अपना प्रतिनिधित्व (Unrepresented) नहीं करेंगे।
एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) की नियुक्ति पर रोक
- नेताओं के इस बहिष्कार के बाद, अदालत ने उनकी कानूनी सहायता के लिए तीन वरिष्ठ वकीलों को ‘अदालत का मित्र’ (Amicus Curiae) नियुक्त करने का फैसला किया था।
- आज होनी थी घोषणा: जस्टिस शर्मा ने बताया कि आज वह इन वरिष्ठ वकीलों के नामों की घोषणा करने वाली थीं और कुछ वरिष्ठ वकीलों ने इसके लिए गरिमापूर्वक सहमति भी दे दी थी।
- अवमानना के कारण स्थगन: लेकिन इसी बीच कोर्ट के खिलाफ चल रहे अपमानजनक अभियान की जानकारी मिलने पर न्यायाधीश ने कहा कि वह पहले अवमानना करने वालों से निपटेंगी।
जज का केस छोड़ने (Recusal) से साफ इनकार
- इससे पहले आरोपियों द्वारा जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने (Recusal) की मांग की गई थी, जिसे उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया था।
- गलत मिसाल: पीठ ने कहा, अगर मैं इन (recusal) आवेदनों को स्वीकार करती हूँ, तो यह एक परेशान करने वाली मिसाल कायम करेगा।
- संस्था पर हमला: जज ने स्पष्ट किया कि किसी न्यायाधीश पर पक्षपात का हर बेबुनियाद आरोप केवल उस व्यक्ति पर नहीं, बल्कि न्यायपालिका की सामूहिक अखंडता पर कीचड़ उछालने जैसा है। अदालत संस्थान की गरिमा के लिए हमेशा खड़ी रहेगी।
मामले का सारांश (Quick Highlights)
| मुख्य बिंदु | विवरण |
| न्यायाधीश | जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा (दिल्ली हाई कोर्ट)। |
| आप नेताओं का स्टैंड | अरविंद केजरीवाल और अन्य का कार्यवाही का बहिष्कार; कोई वकील पेश नहीं करेंगे। |
| कोर्ट की कार्रवाई | अपमानजनक पोस्ट करने वाले प्रतिवादियों के खिलाफ अवमानना (Contempt) की कार्यवाही शुरू। |
| मूल मामला | सीबीआई (CBI) द्वारा आप नेताओं को डिस्चार्ज (बरी) करने के आदेश के खिलाफ दायर याचिका। |
न्यायपालिका की गरिमा सर्वोपरि
यह मामला भारतीय न्यायपालिका और राजनीतिक कार्यपालिका के बीच बढ़ते टकराव का एक गंभीर उदाहरण है। जहाँ एक तरफ आरोपी नेताओं ने अदालत की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए “सत्याग्रह” का रास्ता चुना है, वहीं दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि दबाव बनाने की ऐसी किसी भी कोशिश या सोशल मीडिया ट्रायल के जरिए न्यायपालिका की छवि को धूमिल करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

