Wednesday, September 30, 2026
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Digital Action: आपके प्ले स्टोर व ऐप स्टोर पर Porn ऐप खुलेआम अपलोड है…क्या युवा पीढ़ी को बर्बाद होने दें; Google और Apple को यह निर्देश

Digital Action: दिल्ली हाई कोर्ट ने इंटरनेट सुरक्षा और युवा पीढ़ी के भविष्य को लेकर एक अत्यंत सख्त आदेश जारी किया है।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

विवरणकोर्ट का निर्देश / टिप्पणी
मुख्य चिंताअश्लीलता, वेश्यावृत्ति और संगठित अपराध को बढ़ावा देने वाले ऐप्स।
प्रतिवादीGoogle, Apple, केंद्र सरकार और CERT-In।
अदालत की सख्त टिप्पणी“हम देश की पूरी पीढ़ी को बर्बाद होने की अनुमति नहीं दे सकते।”
कानूनी आधारसूचना प्रौद्योगिकी (Intermediary Guidelines) नियम, 2021।
अगली कार्रवाईजुलाई 2026 तक कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी।

रुबिका थापा की दायर याचिका पर सुनवाई

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ ने जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए कहा कि वे देश की पूरी पीढ़ी को बर्बाद होने की अनुमति नहीं दे सकते। अदालत ने Google और Apple को निर्देश दिया है कि वे अपने संबंधित ‘प्ले स्टोर’ और ‘ऐप स्टोर’ पर अश्लीलता (Pornography) और वेश्यावृत्ति को बढ़ावा देने वाले मोबाइल एप्लिकेशन के खिलाफ तत्काल और कड़ी कार्रवाई करें। यह आदेश रुबिका थापा द्वारा दायर एक याचिका पर आया है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कई ऐप्स के माध्यम से पोर्नोग्राफी, अनैतिक तस्करी, मादक पदार्थों का सेवन और अवैध हथियारों के व्यापार जैसे संगठित अपराध धड़ल्ले से चल रहे हैं।

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मध्यवर्ती संस्थाओं (Intermediaries) की जिम्मेदारी

  • अदालत ने IT नियम 2021 का हवाला देते हुए Google और Apple की भूमिका को स्पष्ट किया।
  • केवल शिकायत पर नहीं: कोर्ट ने कहा कि इन कंपनियों की जिम्मेदारी केवल शिकायत मिलने पर कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है।
  • अपलोडिंग के समय जांच: ऐप्स को स्टोर पर उपलब्ध कराने (Upload) से पहले ही कंपनियों को ‘ड्यू डिलिजेंस’ (उचित सावधानी) बरतनी चाहिए ताकि ऐसे हानिकारक ऐप सार्वजनिक न हो सकें।
  • महत्वपूर्ण भूमिका: कोर्ट ने माना कि इन ऐप्स की पहुंच बहुत व्यापक है, इसलिए मध्यवर्ती संस्थाओं को IT नियमों का अक्षरशः पालन करना होगा।

सरकार और CERT-In को भी निर्देश

  • अदालत ने केवल निजी कंपनियों को ही नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र को भी सक्रिय होने को कहा है।
  • CERT-In (भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम): इसे भी यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि ऐसे वीडियो और ऐप्स के प्रसार को तुरंत रोका जाए।
  • केंद्र सरकार का पक्ष: एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने याचिका का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार दुनिया भर में हर चीज को ब्लॉक नहीं कर सकती, इसलिए Google और Apple जैसी संस्थाओं को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।

एक्शन टेकन रिपोर्ट की मांग

  • अदालत ने इस मामले को केवल आदेश तक सीमित नहीं रखा है।
  • जुलाई की डेडलाइन: Google, Apple और केंद्र सरकार को अगली सुनवाई (जुलाई 2026) तक एक ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ (Action Taken Report) दाखिल करनी होगी।
  • अपराधिक लाभ: याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि ये ऐप्स ऐसी आपराधिक गतिविधियों के माध्यम से करोड़ों डॉलर कमा रहे हैं।

सुरक्षित डिजिटल भविष्य की ओर

दिल्ली हाई कोर्ट का यह रुख स्पष्ट करता है कि डिजिटल युग में तकनीकी कंपनियों को केवल ‘मंच’ (Platform) होने की आड़ में अपनी सामाजिक और कानूनी जिम्मेदारी से बचने की अनुमति नहीं दी जा सकती। “ऐप स्टोर” पर उपलब्ध सामग्री की शुद्धता सुनिश्चित करना अब इन कंपनियों के लिए एक अनिवार्य वैधानिक कर्तव्य बन गया है।

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