Friday, May 22, 2026
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Dual Job: क्लीनिक भी चलाएंगे व वकालत भी करेंगे…वकालत एक ईर्ष्यालु प्रेमिका है, होम्योपैथी डॉक्टर संग वकालत करने के रोचक केस को पढ़ें

Dual Job: केरल हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि कोई भी व्यक्ति एक साथ दो पेशों (Professions) में अपनी उपस्थिति नहीं रख सकता।

होम्योपैथी डॉक्टर की याचिका खारिज की

हाईकोर्ट के जस्तित बेचू कुरियन थॉमस की एकल पीठ ने होम्योपैथी डॉक्टर की उस याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश दिया, जिसमें उन्होंने बार काउंसिल ऑफ केरल (BCK) के फैसले को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि एक रजिस्टर्ड होम्योपैथी डॉक्टर (Homeopathy Practitioner) तब तक वकील (Advocate) के रूप में अपना नामांकन (Enrolment) नहीं करा सकती, जब तक कि वह एक डॉक्टर के रूप में अपना मेडिकल रजिस्ट्रेशन रद्द (Cancel) नहीं करवा देती।

पेशेवर आत्मा का दो स्वामियों के बीच बंटवारा

  • अदालत ने वकालत के पेशे की गरिमा और एकाग्रता पर जोर देते हुए बेहद दार्शनिक और कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया।
  • फोकस खोने का डर: “अपनी पेशेवर आत्मा को दो स्वामियों (Masters) के बीच बांटने से दोनों ही पेशों से फोकस खो सकता है।”
  • एकनिष्ठ वफादारी जरूरी: कानून के पेशे में इस तरह की विभाजित वफादारी (Divided Loyalty) को स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि कानूनी पेशे को अक्सर “एक ईर्ष्यालु प्रेमिका” (Jealous Mistress) कहा गया है— जो अपने साथी का पूरा समय और समर्पण मांगती है।
  • मूल्यों से समझौता: कोर्ट ने कहा कि जब कोई पेशेवर दो अलग-अलग क्षेत्रों के प्रति अपनी निष्ठा साझा करता है, तो दोनों ही पेशों के नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों से समझौता होने का खतरा बढ़ जाता है।

क्या था पूरा मामला और डॉक्टर की दलीलें?

  • डॉक्टर से वकील बनने का सफर: याचिकाकर्ता महिला होम्योपैथी की डॉक्टर थीं। उन्होंने अपनी मेडिकल प्रैक्टिस के दौरान ही कानून (Law) की पढ़ाई पूरी की और ‘ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन’ (AIBE) भी पास कर लिया।
  • क्लीनिक बंद, पर रजिस्ट्रेशन चालू: वकील के रूप में इनरोलमेंट के लिए उन्होंने अपना क्लीनिक बंद कर दिया और बार काउंसिल को वचन (Undertaking) भी दिया कि वे अब आगे चिकित्सा अभ्यास नहीं करेंगी। लेकिन, उन्होंने अपना मेडिकल रजिस्ट्रेशन रद्द नहीं कराया था।
  • याचिकाकर्ता का तर्क: महिला ने अदालत में दलील दी कि बार काउंसिल के नियम केवल नामांकन (Enrolment) के बाद अन्य पेशा करने से रोकते हैं, नामांकन के पहले (Pre-entry stage) नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि इनरोलमेंट से रोकना संविधान के आर्टिकल 19(1)(g) के तहत उनके आजीविका और पेशा चुनने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।

बार काउंसिल और हाई कोर्ट का कानूनी रुख

  • केरल हाई कोर्ट ने महिला की दलीलों को पूरी तरह खारिज करते हुए बार काउंसिल ऑफ केरल (BCK) के स्टैंड को सही ठहराया।
  • मौलिक अधिकार असीमित नहीं हैं: न्यायालय ने स्पष्ट किया कि किसी भी नागरिक का अपनी पसंद का पेशा चुनने का मौलिक अधिकार पूर्ण (Absolute) नहीं है, बल्कि उस पर आर्टिकल 19(6) के तहत उचित प्रतिबंध (Reasonable Restrictions) लगाए जा सकते हैं। बार काउंसिल के नियमों के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य पेशे में सक्रिय रूप से “संलग्न” (Engaged) है, तो उसे कानूनी पेशे में आने से रोका जा सकता है।
  • सिर्फ क्लीनिक बंद करना काफी नहीं: केरल राज्य चिकित्सा व्यवसायी अधिनियम, 2021 (Kerala State Medical Practitioners Act, 2021) का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा, जब तक आपका नाम रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिसनर्स की आधिकारिक सूची में दर्ज है, तब तक दुनिया की नजर में आप एक डॉक्टर हैं। सिर्फ क्लीनिक का लाइसेंस सरेंडर कर देना या बोर्ड हटा लेना कानूनी रूप से पर्याप्त नहीं है। आपको अपनी ‘डॉक्टर’ की आधिकारिक पहचान (रजिस्ट्रेशन) को पूरी तरह समाप्त करना होगा।

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बार काउंसिल की ‘फिल्ट्रेशन’ पावर

कोर्ट ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया और राज्य बार काउंसिलों का काम सिर्फ वकीलों का रजिस्ट्रेशन करना नहीं है, बल्कि कानूनी पेशे की उत्कृष्टता बनाए रखने के लिए अनुपयुक्त तत्वों को शुरुआती स्तर पर ही रोकना (Weed out करना) भी उनकी जिम्मेदारी और अधिकार क्षेत्र में आता है।

मामले का अंतिम निष्कर्ष (The Verdict at a Glance)

मुख्य बिंदुकेरल हाई कोर्ट का फैसला / विकल्प
वर्तमान स्थितिहोम्योपैथी डॉक्टर तब तक काला कोट नहीं पहन सकतीं जब तक डॉक्टर का टैग नहीं हटातीं।
याचिका का परिणामडॉक्टर की याचिका को पूरी तरह खारिज (Dismissed) कर दिया गया।
कोर्ट द्वारा सुझाया गया रास्तायदि वे भविष्य में दोबारा डॉक्टर बनना चाहें, तो वकालत का लाइसेंस सरेंडर करके बाद में चिकित्सा परिषद में खुद को री-रजिस्टर (Re-register) करा सकती हैं। कानूनन दोनों रास्ते खुले हैं, लेकिन एक समय पर केवल एक ही रास्ता चुना जा सकता है।

निष्कर्ष (Analysis Summary)

यह ऐतिहासिक फैसला साफ करता है कि वकालत का पेशा कोई ‘पार्ट-टाइम जॉब’ या साइड बिजनेस नहीं हो सकता। कोर्ट ने ‘Jealous Mistress’ की इस विधिक परिभाषा को दोबारा मजबूत किया है कि कानून के क्षेत्र में शत-प्रतिशत समर्पण की आवश्यकता होती है। यदि कोई व्यक्ति वकील बनना चाहता है, तो उसे अपनी पुरानी पेशेवर पहचान को पूरी तरह अलविदा कहना ही होगा।

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