Saturday, August 22, 2026
HomeHigh CourtBengal News: गाय की कुर्बानी इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं...TMC के केस...

Bengal News: गाय की कुर्बानी इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं…TMC के केस व सीएम सुवेंदु सरकार के बीच रस्साकस्सी वाले केस को पढ़ें

Bengal News: कलकत्ता हाई कोर्ट ने ईद-उल-अजहा (Bakrid) के त्योहार से ठीक पहले पश्चिम बंगाल में मवेशी वध (Cattle Slaughter) को रेगुलेट करने वाले सरकारी नोटिफिकेशन पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है।

राज्य सरकार का 13 मई 2026 का यह नोटिफिकेशन कोई नया नियम नहीं है

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का 13 मई 2026 का यह नोटिफिकेशन कोई नया नियम नहीं है, बल्कि यह साल 2018 में खुद हाई कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों का ही पालन कर रहा है। हालांकि, कोर्ट ने राज्य सरकार को इस नोटिफिकेशन में दो बेहद महत्वपूर्ण और सख्त प्रावधानों को तुरंत जोड़ने (Amend करने) का आदेश दिया है।

हाई कोर्ट का बड़ा निर्देश: नोटिफिकेशन में जोड़ी जाएं ये 2 शर्तें

  • अदालत ने एक अन्य जनहित याचिका (PIL) को स्वीकार करते हुए पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि वह अपने पब्लिक नोटिस में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के पुराने फैसलों के आधार पर निम्नलिखित बातें स्पष्ट रूप से लिखे।
  • सार्वजनिक स्थानों पर वध पूरी तरह प्रतिबंधित: खुले और सार्वजनिक स्थानों (Open Public Places) पर गाय, भैंस या किसी भी जानवर का वध करना पूरी तरह से गैरकानूनी और प्रतिबंधित है।
  • धार्मिक अनिवार्यता नहीं: नोटिफिकेशन में बाकायदा यह दर्ज किया जाए कि— “गाय की कुर्बानी (Sacrifice of a cow) ईद-उल-अजहा के त्योहार का कोई अनिवार्य हिस्सा नहीं है और न ही इस्लाम के तहत यह कोई धार्मिक आवश्यकता (Religious Requirement) है।”
  • सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का हवाला: हाई कोर्ट ने इस निर्देश के लिए सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध ‘हनीफ कुरैशी बनाम बिहार राज्य’ मामले का हवाला दिया, जिसमें देश की शीर्ष अदालत ने माना था कि इस्लाम में गाय की ही बलि देना अनिवार्य नहीं है।

विवाद क्या है? (The Core Controversy)

  • यह पूरा विवाद पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 (West Bengal Animal Slaughter Control Act, 1950) को सख्ती से लागू करने वाले एक नए सरकारी नोटिस को लेकर शुरू हुआ।
  • “फिट फॉर स्लॉटर” सर्टिफिकेट अनिवार्य: नए नियमों के तहत सांड, बैल, गाय, बछड़े और भैंस के वध से पहले पशु चिकित्सक या अधिकारी से “फिट फॉर स्लॉटर” (वध के लिए योग्य) का सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा।
  • उम्र की सख्त सीमा: इस कानून के तहत केवल उन्हीं मवेशियों के वध की अनुमति मिल सकती है जिनकी उम्र 14 साल से अधिक हो चुकी हो, या जो बढ़ती उम्र, चोट, कूबड़ या किसी लाइलाज बीमारी के कारण स्थायी रूप से अक्षम (Incapacitated) हो चुके हों।

अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें

  • याचिकाकर्ताओं का पक्ष (TMC नेताओं और मुस्लिम संगठनों की दलीलें): तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक अखरुज्जमान, मवेशी व्यापारियों और मुस्लिम संगठनों ने दलील दी कि यह नियम व्यावहारिक रूप से बकरीद पर ‘कुर्बानी’ को असंभव बना देगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित होगी। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा की तरफ से पेश सीनियर एडवोकेट शादान फरासत ने दलील दी कि इस्लाम में ‘कुर्बानी’ के लिए स्वस्थ और तंदुरुस्त जानवर की आवश्यकता होती है, न कि बूढ़े और बीमार मवेशी की। उन्होंने कोर्ट से अधिनियम की धारा 12 के तहत ईद के लिए विशेष छूट (Exemption) देने की मांग की।
  • हाई कोर्ट का जवाब और सरकार का पक्ष: हाई कोर्ट ने कहा कि साल 2018 के फैसले (राज्यश्री चौधरी बनाम पश्चिम बंगाल राज्य) में जो शर्तें तय की गई थीं, सरकार ने इस नोटिस में हूबहू वही शर्तें लिखी हैं। चूंकि 2018 का वह फैसला अंतिम हो चुका है, इसलिए 13 मई 2026 के इस नोटिस पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं है। सरकार की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अशोक कुमार चक्रवर्ती ने दलील दी कि यह कानून 76 साल पुराना है और जब तक इसे असंवैधानिक घोषित नहीं किया जाता, तब तक कानून की वैधता बनी रहती है।

याचिकाकर्ताओं को कोर्ट से मिली एकमात्र राहत

  • कोर्ट ने मुख्य नियमों पर रोक नहीं लगाई, लेकिन त्योहार की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार को एक सख्त निर्देश दिया है।
  • 24 घंटे में फैसला लेने का आदेश: कोर्ट ने कहा कि चूंकि त्योहार इसी महीने की 27/28 तारीख (मई 2026) को होने की संभावना है, इसलिए अधिनियम की धारा 12 के तहत याचिकाकर्ताओं द्वारा मांगी गई विशेष धार्मिक छूट (Exemption) की अर्जेंट अपीलों पर राज्य सरकार अगले 24 घंटे के भीतर अपना अंतिम फैसला सुनाए।

इस फैसले का मुख्य सारांश (Key Takeaways at a Glance)

मुख्य बिंदुकलकत्ता हाई कोर्ट (Calcutta HC) का स्टैंड
सरकारी नियमों पर रोकनहीं लगाई। 14 साल से कम उम्र के स्वस्थ मवेशियों के वध पर प्रतिबंध जारी रहेगा।
खुली जगह पर वधपूरी तरह से प्रतिबंधित। कुर्बानी केवल निर्धारित या बंद जगहों पर ही हो सकेगी।
धार्मिक व्याख्यास्पष्ट किया कि इस्लाम में गाय की बलि देना कोई अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं है।
छूट (Exemption) पर फैसलाराज्य सरकार को वकीलों के आवेदनों पर 24 घंटे के भीतर निर्णय लेने का आदेश।

निष्कर्ष (Analysis Summary)

कलकत्ता हाई कोर्ट का यह फैसला कानून के शासन (Rule of Law) और न्यायिक मिसालों (Judicial Precedents) के प्रति कड़े रुख को दिखाता है। अदालत ने साफ कर दिया कि 76 साल पुराना कानून सिर्फ इसलिए ‘डेड लेटर’ (निष्क्रिय) नहीं हो जाता क्योंकि उसे लंबे समय से सख्ती से लागू नहीं किया गया था। कोर्ट ने एक तरफ जहां सार्वजनिक व्यवस्था और पशु संरक्षण के लिए कड़े नियम बरकरार रखे, वहीं दूसरी तरफ त्योहार के समय को देखते हुए सरकार को 24 घंटे में छूट की अर्जेंट अपीलों पर फैसला लेने का आदेश देकर एक व्यावहारिक संतुलन बनाने की कोशिश की है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
overcast clouds
31 ° C
31 °
31 °
84 %
4.1kmh
100 %
Sat
36 °
Sun
37 °
Mon
37 °
Tue
37 °
Wed
35 °

Recent Comments