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High Court: सैनिक फार्म कॉलोनी का मामला…लापरवाही या मिलीभगत से बस रही काॅलोनी, हाईकोर्ट ने यह की टिप्पणी..

High Court: हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से दक्षिण दिल्ली स्थित सैनिक फार्म कॉलोनी के नियमितीकरण पर निर्णय लेने के निर्देश दिए।

अगली सुनवाई तक समाधान निकालने के निर्देश

मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने वर्ष 2015 में दायर याचिका सहित कॉलोनी के नियमितीकरण की मांग से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे। अदालत ने कहा कि यह मामला लंबित नहीं रखा जा सकता। अदालत ने मार्च में अगली सुनवाई निर्धारित करते हुए अधिकारियों से समाधान निकालने को कहा।

युद्ध विधवाओं (वार विडोज) की जमीन पर समाधान…

अदालत ने कहा, निर्माण कार्य जारी हैं, कॉलोनियां बनती जा रही हैं… यह आपकी निष्क्रियता, लापरवाही या मिलीभगत से हुआ है। पीठ ने आगे कहा, यदि यह भूमि कृषि के लिए थी, तो आपने ऐसे निर्माणों को बनने क्यों दिया? आप ही जिम्मेदार हैं। यह युद्ध विधवाओं (वार विडोज) की जमीन है। आपको कोई समाधान निकालना होगा। अप्रैल 2022 में, जब हाई कोर्ट ने सैनिक फार्म क्षेत्र विकास समिति के संयोजक रमेश दुगर की कॉलोनियों के नियमितीकरण की याचिका पर सुनवाई की तो अदालत ने कहा कि अब समय आ गया है कि इस मुद्दे का एक बार में समाधान किया जाए। अदालत ने कहा कि अधिकारी निर्णय लें और इस मामले को अनिश्चितकाल तक अटकाये न रखें।

अदालत ने केंद्र सरकार से पूछे कई सवाल…

केंद्र सरकार के वकीलों से सवाल करते हुए अदालत ने कहा, इस मामले में क्या किया गया है। इस मुद्दे को लंबित क्यों रखा जाए? कॉलोनी के भविष्य के निर्णय का मामला अनिश्चितकाल तक नहीं चलने दे सकते हैं। वर्ष 2022 और 2023 के आदेशों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि केंद्र ने एक हलफनामा तो दायर किया, लेकिन उसमें नियमितीकरण को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं बताया। केवल यह कहा गया कि नीतिगत निर्णय लिया जाना है। उन्हें (केंद्र सरकार के वकील को) पहले के आदेशों के जवाब में पूरा निर्देश लेने दें। कोर्ट पहले ही चिंता जता चुकी है कि यह मामला काफी लंबे समय से लंबित है, इसलिए उम्मीद करते हैं कि भारत सरकार जल्द से जल्द कोई नीतिगत निर्णय लेगी।

1962 में युद्ध विधवाओं के पुनर्वास योजना के तहत खरीदी गई भूमि

याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि संबंधित भूमि उनकी सोसाइटी द्वारा 1962 में युद्ध विधवाओं के पुनर्वास योजना के तहत खरीदी गई थी। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें अपनी संपत्तियों में मरम्मत कार्य करने की अनुमति दी जाए। इस पर, अदालत ने केंद्र सरकार के वकील से इस विषय पर निर्देश लेने को कहा।

पहले हलफनामे में केंद्र ने हाई कोर्ट से कहा…

केंद्र सरकार ने पहले दायर हलफनामे में कहा कि उसने यह निर्णय लिया है कि सैनिक फार्म जैसी संपन्न (अफ्लुएंट) कॉलोनियों के नियमितीकरण में न जाए और फिलहाल 1,797 अनधिकृत कॉलोनियों के पुनर्विकास कार्य पर ध्यान केंद्रित कर रही है। संपन्न कॉलोनियों, जैसे सैनिक फार्म में किए गए निर्माण कार्यों को दिसंबर 2023 तक कानूनी संरक्षण प्राप्त था।

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