Tuesday, September 1, 2026
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Government Rajaji Hospital: लॉ स्टूडेंट की PIL का कमाल…मद्रास हाई कोर्ट की तारीफ, बोन बैंक’ से 197 मरीजों को मिला नया जीवन

Government Rajaji Hospital: मद्रास हाईकोर्ट ने एक लॉ स्टूडेंट द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) की दिल खोलकर तारीफ की।

दरअसल, इस पीआईएल की बदौलत मदुरै के सरकारी राजाजी अस्पताल (Government Rajaji Hospital – GRH) में एक आधुनिक ‘बोन बैंक’ (हड्डी बैंक) की स्थापना हुई। कोर्ट ने नोट किया कि साल 2022 से अब तक इस अनूठी सुविधा से 197 मरीजों को नया जीवन और चलने-फिरने की ताकत मिली है। जब कानून की पढ़ाई कर रहा एक छात्र जनहित में कोर्ट का दरवाजा खटखटाता है, तो बदलाव सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि अस्पताल के वार्डों में दिखता है।

मामला क्या है?: एक छात्र की जिद और 6 साल का संघर्ष

यह कहानी साल 2020 में शुरू हुई थी, जब एम. वेत्री सेल्वन नाम के एक लॉ स्टूडेंट ने मदुरै में दक्षिण तमिलनाडु के मरीजों की परेशानी को देखते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

असंतुलन पर उठाया सवाल: याचिका में कहा गया था कि चेन्नई में तो साल 2005 से ही बोन बैंक काम कर रहा है, लेकिन मदुरै के राजाजी अस्पताल द्वारा 2017 और 2018 में प्रस्ताव भेजे जाने के बावजूद वहां इसकी मंजूरी अटकी हुई थी।

अस्पताल के चक्कर से मिली राहत: बोन बैंक न होने से दक्षिण तमिलनाडु के कैंसर रोगियों, गंभीर फ्रैक्चर के शिकार लोगों और जॉइंट रिप्लेसमेंट कराने वाले गरीब मरीजों को बेहद परेशानी होती थी।

कोर्ट में आया सुखद परिणाम

जस्टिस सी.वी. कार्तिकेयन और जस्टिस आर. शक्तिवेल की खंडपीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि यद्यपि यह याचिका 6 साल तक लंबित रही, लेकिन याचिकाकर्ता और उनके वकील आर. अलगुमनी के प्रयासों से आखिरकार अस्पताल में 16 दिसंबर 2021 को ‘मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994’ के तहत लाइसेंस प्राप्त बोन बैंक की स्थापना हो चुकी है।

मदुरै ‘बोन बैंक’ का अब तक का रिपोर्ट कार्ड

अस्पताल के डीन द्वारा कोर्ट में पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, इस पहल ने जमीन पर बड़ा बदलाव किया है।

विधिक और चिकित्सा मानकवर्तमान स्थिति और उपलब्धियां
कुल लाभार्थी (2022 से)197 गंभीर मरीज (कैंसर, फ्रैक्चर और जॉइंट सर्जरी वाले)
संचालक विभागआर्थोपेडिक्स विभाग (Department of Orthopaedics), GRH मदुरै
अगली बड़ी तैयारीअस्पताल में अब ‘बोन मैरो ट्रांसप्लांट’ (Bone Marrow Transplant) सुविधा शुरू करने पर काम जारी है।

“हड्डी दान” पर जागरूकता फैलाने का निर्देश

पीठ ने इस बात पर चिंता जताई कि लोग रक्तदान और नेत्रदान के बारे में तो जानते हैं, लेकिन ‘बोन डोनेशन’ (हड्डी दान) को लेकर समाज में अब भी जागरूकता की बेहद कमी है।

अदालत ने तमिलनाडु राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (TNSLSA) से अनुरोध किया है कि

  • वे जिला स्तर पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाएं, ताकि आम जनता को बोन बैंक की उपलब्धता और इसके फायदों के बारे में जागरूक किया जा सके।
  • ब्रेन-डेड (Brain-dead) दाताओं के परिवारों को हड्डी दान करने के लिए संवेदनशील बनाया जा सके।

एक युवा लॉ स्टूडेंट की संवेदनशीलता और मद्रास हाई कोर्ट की सक्रियता ने आज लगभग 200 गरीब परिवारों को इलाज के महंगे खर्च से बचा लिया है। यह फैसला साबित करता है कि कानून की सही समझ और समाज के प्रति जिम्मेदारी मिलकर व्यवस्था को दुरुस्त कर सकती है।

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