Monday, August 31, 2026
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Old Case: तारीख-पर-तारीख मिलने और दशकों तक इंसाफ का इंतजार करने के दिन अब खत्म होंगे…4 स्पेशल बेंच सिर्फ सैकड़ों साल पुराने केस निपटाएंगी

Old Case: अदालतों में तारीख-पर-तारीख मिलने और दशकों तक इंसाफ का इंतजार करने के दिन अब खत्म होने वाले हैं।

13 जुलाई 2026 से लागू हुआ नया रोस्टर

सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग मुकदमों के अंबार को हटाने के लिए चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने एक बेहद क्रांतिकारी प्रशासनिक कदम उठाया है। 13 जुलाई 2026 से लागू हुए नए रोस्टर के तहत सुप्रीम कोर्ट में 4 डेडिकेटेड (विशेष) डिवीजन बेंच बनाई गई हैं, जो नए मुकदमों के शोर-शराबे से दूर, सिर्फ और सिर्फ कोर्ट के सबसे पुराने दीवानी (Civil) और फौजदारी (Criminal) मामलों की अंतिम सुनवाई करेंगी। देश की सबसे बड़ी अदालत ने अपने कामकाज के तरीके को पूरी तरह री-स्ट्रक्चर कर दिया है। सीजेआई के नए प्लान के मुताबिक, इन 4 स्पेशल बेंचों पर हफ्ते के बीच के तीन दिनों (मंगलवार, बुधवार और गुरुवार) में नए मुकदमों का कोई बोझ नहीं होगा, ताकि वे बिना किसी रुकावट के दशकों पुराने ‘लीगेसी केसेस’ (Legacy Cases) का निपटारा कर सकें।

काम का बंटवारा: जानिए कौन से जज निपटाएंगे कौन से पुराने केस?

सुप्रीम कोर्ट के नए रोस्टर नोट के अनुसार, पुराने मुकदमों को सिविल और क्रिमिनल श्रेणियों में बांटकर जजों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

पुराने दीवानी (Civil) मामले: जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की अगुवाई वाली दो डिवीजन बेंच विशेष रूप से सबसे पुराने सिविल केस सुनेंगी।

पुराने फौजदारी (Criminal) मामले: जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्ज्वल भूयान की अध्यक्षता वाली दो अन्य डिवीजन बेंच सबसे पुराने आपराधिक मुकदमों को निपटाएंगी।

संवेदनशील मामलों पर केवल ‘सीनियर जजों’ का पहरा

नए रोस्टर में केसों की संवेदनशीलता को देखते हुए सीजेआई ने बड़े मामलों को केवल टॉप-5 सीनियर जजों (पुइसने जजों) की बेंच तक ही सीमित रखा है। इन बड़े मामलों को केवल ये 5 बेंच ही सुनेंगी।

  • जनहित याचिकाएं (PILs): सभी कैटेगरी की पीआईएल केवल CJI और 4 सीनियर जजों (जस्टिस विक्रम नाथ, नागरत्ना, सुंदरेश और नरसिम्हा) के पास जाएंगी।
  • बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus): किसी को अवैध हिरासत से छुड़ाने और निवारक निरोध (Preventive Detention) के केस भी इन्हीं 5 बेंचों के पास रिजर्व रहेंगे।
  • फांसी की सजा (Capital Punishment): जिन मामलों में मौत की सजा सुनाई गई है, उन्हें सिर्फ CJI, जस्टिस विक्रम नाथ, नागरत्ना और सुंदरेश ही सुनेंगे। बाकी जजों के रोस्टर से इसे पूरी तरह बाहर रखा गया है।
  • CJI सूर्यकांत ने अपने पास रखे ये खास अधिकार, इनमें संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों से जुड़े मामले, अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति द्वारा मांगी गई विधिक सलाह (Constitutional References), अनुच्छेद 317(1) के तहत ट्रिब्यूनल या कमीशन के चेयरमैन/सदस्यों को हटाने से जुड़ी सुप्रीम कोर्ट की जांच, आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) के सभी मुख्य कोड्स हैं।

रोस्टर शीट: सुप्रीम कोर्ट विधिक केस आवंटन (2026)

केस की श्रेणीसुनवाई करने वाली विशेष बेंच / जजकाम करने का दिन और नियम
ओल्डेस्ट सिविल केसजस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टीमंगलवार, बुधवार और गुरुवार (Non-Miscellaneous Days)
ओल्डेस्ट क्रिमिनल केसजस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्ज्वल भूयानमंगलवार, बुधवार और गुरुवार (Non-Miscellaneous Days)
फांसी (Death Sentence)CJI, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, जस्टिस एम.एम. सुंदरेशअन्य सभी जजों के रोस्टर से यह कैटेगरी पूरी तरह बाहर।
PIL और बंदी प्रत्यक्षीकरणCJI + सुप्रीम कोर्ट के 4 सबसे सीनियर जजसभी प्रकार की जनहित याचिकाओं के लिए सेंट्रलाइज्ड व्यवस्था।
आर्बिट्रेशन (Arbitration)मुख्य रूप से CJI (कैटगरी 301-306); सहयोगी जज: जस्टिस नागरत्ना, नरसिम्हा, पारदीवाला, एस. कुमार, ए. कुमार और विश्वनाथन।विशिष्ट कोड (302 से 306) के तहत आवंटित।
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