Monday, October 19, 2026
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Judge’s Suspension: दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला…काॅमर्शियल कोर्ट की जिला जज वीणा रानी निलंबित, बिना अनुमति राज्य छोड़ने पर रोक

Judge’s Suspension: दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय के निर्देश पर हुई एक आंतरिक सतर्कता जांच (Vigilance Inquiry) के बाद काॅमर्शियल कोर्ट की जिला जज वीणा रानी को निलंबित कर दिया है।

न्यायिक कदाचार या नियमों पर सख्ती

हाईकोर्ट प्रशासन के अनुसार, अधीनस्थ न्यायपालिका (Subordinate Judiciary) की शुचिता, ईमानदारी और न्यायिक आचरण पर दिल्ली हाई कोर्ट का प्रशासनिक नियंत्रण बेहद कड़ा और समझौताहीन है। यह बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई मानी जा रही है। कहा जा रहा है कि किसी भी स्तर पर न्यायिक कदाचार या नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” इसी सख्त संदेश के साथ दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने दिल्ली हायर जुडिशियल सर्विस (DHJS) की अधिकारी और कॉमर्शियल कोर्ट की जिला जज वीणा रानी को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया है। हालिया दिनों में दिल्ली की अधीनस्थ न्यायपालिका के खिलाफ हाई कोर्ट द्वारा लिया गया यह दूसरा बड़ा कड़ा फैसला है।

मामला क्या है?: विजिलेंस जांच और पूर्ण अदालत का फैसला

यह निलंबन दिल्ली उच्च न्यायालय की एक उच्च स्तरीय प्रशासनिक प्रक्रिया का परिणाम है।

फुल कोर्ट की बैठक: जिला जज वीणा रानी को निलंबित करने का निर्णय 10 जुलाई 2026 को आयोजित दिल्ली हाई कोर्ट की फुल कोर्ट (Full Court Meeting) की बैठक में लिया गया था।

विजिलेंस जांच: चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय के आदेश पर जज वीणा रानी के खिलाफ एक गुप्त सतर्कता जांच (Vigilance Inquiry) चलाई गई थी। हालांकि, आधिकारिक तौर पर उन विशिष्ट कारणों और आरोपों का खुलासा नहीं किया गया है जिनके चलते यह कार्रवाई हुई है।

आधिकारिक प्रस्ताव: हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल अरुण भारद्वाज द्वारा 15 जुलाई 2026 को जारी एक आधिकारिक विधिक प्रस्ताव (Resolution) के माध्यम से इस निलंबन को सार्वजनिक किया गया।

विधिक नियम और प्रतिबंध: साकेत कोर्ट बनाया मुख्यालय

रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जज वीणा रानी के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही (Disciplinary Proceedings) विचाराधीन है।

कानूनी प्रावधान: हाई कोर्ट ने यह निलंबन आदेश ऑल इंडिया सर्विसेज (अनुशासन और अपील) नियम, 1969 के नियम 3(1)(a) और दिल्ली हायर जुडिशियल सर्विस रूल्स, 1970 के नियम 27 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी किया है।

मुख्यालय का निर्धारण: निलंबन की पूरी अवधि के दौरान जज वीणा रानी का आधिकारिक मुख्यालय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (दक्षिण-पूर्व), साकेत कोर्ट, दिल्ली का कार्यालय तय किया गया है।

राज्य छोड़ने पर पाबंदी: आदेश में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया है कि निलंबन आदेश प्रभावी रहने तक वीणा रानी सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) की लिखित अनुमति के बिना दिल्ली की भौगोलिक सीमा से बाहर नहीं जा सकेंगी।

दिल्ली न्यायपालिका में निलंबन का बढ़ता पैटर्न

दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा अधीनस्थ न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ अपनी अनुशासनात्मक शक्तियों (Disciplinary Jurisdiction) का सक्रिय रूप से उपयोग करने का यह एक निरंतर पैटर्न बनता दिख रहा है।

जज विनय सिंघल का मामला: 10 जुलाई की इसी फुल कोर्ट बैठक में एक अन्य जिला जज विनय सिंघल को भी निलंबित किया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने नियमों का उल्लंघन करते हुए अपात्र वकीलों को ‘कोर्ट ऑक्शनर’ (Court Auctioneers) नियुक्त किया और उन्हें तय सीमा से अधिक भुगतान करने के न्यायिक आदेश पारित किए।

पिछला घटनाक्रम: इससे पहले पिछले वर्ष भी एक महिला वकील की शिकायत पर सतर्कता जांच के बाद फुल कोर्ट ने जिला जज संजीव कुमार सिंह को निलंबित कर दिया था और एक अन्य न्यायिक अधिकारी अनिल कुमार के खिलाफ अनुशासनात्मक जांच शुरू की थी।

विधिक केस शीट: दिल्ली हाई कोर्ट प्रशासनिक आदेश (न्यायिक अधिकारी निलंबन)

कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियांउच्च न्यायालय की प्रशासनिक स्थिति और वर्तमान निर्देश
संबंधित अदालतदिल्ली उच्च न्यायालय, नई दिल्ली
प्रशासनिक प्रमुखमुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.के. उपाध्याय
निलंबित अधिकारीसुश्री वीणा रानी (दिल्ली हायर जुडिशियल सर्विस)
संबद्ध विधिक नियमAIS (अनुशासन और अपील) नियम, 1969 व DHJS नियम, 1970
निलंबन का मुख्यालयसाकेत कोर्ट (दक्षिण-पूर्व), नई दिल्ली
प्रशासनिक प्रतिबंधबिना सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के दिल्ली छोड़ने पर पूर्ण रोक

विजिलेंस जांच के बाद सीधे ‘फुल कोर्ट’ द्वारा निलंबन करना और अधिकारी के राज्य छोड़ने पर पाबंदी लगाना बेहद गंभीर प्रशासनिक कदम हैं। यह आदेश न केवल संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी जांच का संकेत है, बल्कि दिल्ली की निचली अदालतों के सभी न्यायिक अधिकारियों के लिए एक कड़ा विधिक अल्टीमेटम भी है कि वे अपने आचरण और फैसलों में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखें।

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