Haryana TGT: हरियाणा में नवनियुक्त टीजीटी (TGT – Trained Graduate Teachers) शिक्षकों की नौकरी पर मंडरा रहे संकट के बीच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने शिक्षकों को बड़ी राहत दी है।
बिना किसी पूर्व सूचना, कारण बताओ नोटिस या सुनवाई का मौका भी नहीं दिया
हाईकोर्ट के जस्टिस एच.एस. बरार की एकल पीठ ने सविता और अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए आयोग के संशोधित परिणाम पर रोक लगा दी है और इन शिक्षकों की सेवा को लेकर यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा, “एक बार चयन प्रक्रिया पूरी होने और लगभग दो साल तक सेवा देने के बाद, किसी भी कर्मचारी को बिना किसी पूर्व सूचना, कारण बताओ नोटिस या सुनवाई का मौका दिए नौकरी से बाहर नहीं निकाला जा सकता। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) द्वारा बिना किसी पारदर्शिता के संशोधित परिणाम जारी कर देना विधिक रूप से अनुचित और अतार्किक है। आयोग की यह कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और निष्पक्षता की कसौटी पर पूरी तरह विफल साबित होती है।
मामला क्या है?: 2023 की भर्ती, 2024 की नियुक्ति और 2026 में बड़ा उलटफेर
यह पूरा विवाद साल 2023 में विज्ञापित टीजीटी शिक्षकों की भर्ती के संशोधित परिणाम और उसके कारण प्रभावित हुए 700 से अधिक उम्मीदवारों से जुड़ा है।
भर्ती की पृष्ठभूमि: फरवरी 2023 में विभिन्न विषयों के टीजीटी पदों के लिए विज्ञापन निकाला गया था। जुलाई 2024 में अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद सफल उम्मीदवारों को नियुक्ति दे दी गई और वे पिछले दो सालों से सेवाएं दे रहे थे।
उत्तर कुंजी (Answer Key) का विवाद: कुछ असफल उम्मीदवारों ने उत्तर कुंजी पर आपत्तियां जताते हुए हाई कोर्ट का रुख किया था। अक्टूबर 2025 में हरियाणा सरकार ने कोर्ट में वचन दिया था कि वह इन आपत्तियों की जांच विषय विशेषज्ञों (Subject Experts) से कराएगी।
28 मई का ‘शॉक’: विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद, आयोग ने 28 मई 2026 को एक नया संशोधित परिणाम जारी कर दिया। इस नए परिणाम ने पूरी भर्ती का हुलिया ही बदल दिया।
व्यापक फेरबदल: एक झटके में 711 लोग प्रभावित
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि आयोग के इस एकतरफा फैसले से 5 विषयों के कुल 711 उम्मीदवार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
291 शिक्षक सेवा से बाहर: दो साल से पढ़ा रहे 291 शिक्षकों की नियुक्ति सीधे रद्द कर दी गई।
227 का कैडर बदला: 227 चयनित उम्मीदवारों का कैडर या पद बदल दिया गया।
193 की उप-श्रेणी बदली: 193 उम्मीदवारों की सब-कैटेगरी में बदलाव हो गया।
355 नए चेहरे शामिल: इस पूरी प्रक्रिया में 355 नए उम्मीदवारों को सूची में जोड़ दिया गया।
याचिकाकर्ताओं का विधिक तर्क: प्रभावित शिक्षकों ने दलील दी कि जिस कानूनी कार्यवाही के आधार पर यह रिजल्ट बदला गया, उसमें न तो उन्हें पक्षकार (Party) बनाया गया और न ही कोई नोटिस दिया गया। उन्हें भनक तक नहीं थी कि दो साल की सेवा के बाद उनकी नौकरी इस तरह खतरे में पड़ जाएगी।
हाई कोर्ट का विधिक रुख: आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी
जस्टिस एच.एस. बरार ने आयोग की एकतरफा और गुपचुप तरीके से की गई कार्रवाई पर गंभीर आपत्ति जताई।
प्रतिकूल नागरिक परिणाम (Adverse Civil Consequences): कोर्ट ने माना कि बिना किसी तार्किक आदेश या सुनवाई के 711 लोगों के भविष्य को प्रभावित करना उनके अधिकारों का हनन है।
निष्पक्षता की कसौटी पर विफल: कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, याचिकाकर्ता उन 291 उम्मीदवारों में शामिल हैं जिनकी नियुक्तियां लगभग दो साल की सेवा के बाद रद्द कर दी गई हैं। आयोग की ओर से पारदर्शिता की कमी को देखते हुए, संशोधित अंतिम परिणाम जारी करने की उसकी यह कार्रवाई निष्पक्षता और तर्कसंगतता की विधिक कसौटी पर खरी नहीं उतरती।
आयोग को कड़े निर्देश: 10 अगस्त तक सौंपना होगा पूरा कच्चा चिट्ठा
हाई कोर्ट ने 28 मई की संशोधित सूची पर अंतरिम रोक लगाते हुए सरकार से 10 अगस्त 2026 तक जवाब मांगा है। इसके साथ ही आयोग को अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले एक विस्तृत विधिक हलफनामा (Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें निम्नलिखित बिंदु स्पष्ट होने चाहिए।
रिक्तियों की संख्या: विभिन्न विषयों में टीजीटी पदों के लिए उपलब्ध सटीक रिक्तियों का विवरण।
आपत्तिजनक प्रश्न: जिन प्रश्नों पर आपत्तियां उठी थीं और उनके संशोधित उत्तर क्या हैं।
विशेषज्ञों की साख: आपत्तियों के निपटारे के लिए नियुक्त किए गए स्वतंत्र विशेषज्ञों के नाम और उनकी शैक्षणिक योग्यता (Credentials)। क्या उन्होंने पहले के उत्तरों को आधिकारिक तौर पर गलत ठहराया था?
कारण और तार्किकता: मूल्यांकन के कारण बाहर हुए प्रत्येक रोल नंबर पर पड़ा प्रभाव और कैडर आवंटन में किए गए बदलावों के पीछे का ठोस विधिक कारण।
विधिक केस शीट: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट बनाम हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (TGT भर्ती विवाद)
| कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियां | उच्च न्यायालय की विधिक स्थिति और वर्तमान निर्णय |
| संबंधित अदालत | पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस एच.एस. बरार |
| याचिकाकर्ता | सविता एवं अन्य (प्रभावित टीजीटी शिक्षक) |
| संबंधित प्रशासनिक निकाय | हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) |
| विवादित आदेश | 28 मई 2026 को जारी संशोधित अंतिम परिणाम |
| न्यायालय का अंतरिम निर्देश | संशोधित परिणाम पर रोक; शिक्षकों की सेवा पर यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने का आदेश |
| अगली सुनवाई की तारीख | 10 अगस्त 2026 |
जस्टिस एच.एस. बरार ने स्टेटस को (यथास्थिति) का आदेश देकर इन 291 परिवारों को एक बड़ी तात्कालिक सुरक्षा दी है। अब 10 अगस्त 2026 को होने वाली सुनवाई में आयोग के विशेषज्ञों की साख और उनके द्वारा बदले गए उत्तरों की विधिक जांच होगी, जिससे यह साफ होगा कि गलती वास्तव में कहां हुई थी।

