Friday, July 31, 2026
HomeScam NoseFraud On Court: काकीनाडा की ₹15 करोड़ की सरकारी जमीन का केस...अदालत...

Fraud On Court: काकीनाडा की ₹15 करोड़ की सरकारी जमीन का केस…अदालत के साथ धोखाधड़ी व वकीलों की मिलीभगत, ACB जांच होगी

केस का संक्षिप्त ब्योरा (Case Snapshot)

पहलूविधिक विवरण
संबंधित अदालतआंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय (अमरावती)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस हरिनाथ एन. (Justice Harinath N.)
केस का नामजयेंद्र नगर रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन बनाम गुब्बाला सत्यनारायण मूर्ति व अन्य (Review Petition No. 2 of 2026)
याचिकाकर्ता के वकीलश्री वेंकट छल्ला (Sri Venkat Challa)
विवादित संपत्तिकाकीनाडा नगर निगम की लेआउट ओपन स्पेस भूमि (कीमत लगभग ₹15 करोड़)
मुख्य कानूनी मुद्दाधोखाधड़ी (Fraud on Court), हितों का टकराव और सरकारी संपत्ति हड़पने की साजिश
अदालत का फैसलापिछला आदेश रद्द; ACB के IG स्तर के अधिकारी को 12 सप्ताह में जांच रिपोर्ट पेश करने का आदेश।

Fraud On Court: अदालत से तथ्य छिपाकर और “धोखाधड़ी (Fraud on Court)” करके काकीनाडा की ₹15 करोड़ की नगरपालिका भूमि को हड़पने के एक गंभीर प्रयास का पर्दाफाश करते हुए आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।

जस्टिस हरिनाथ एन. (Justice Harinath N.) की एकल पीठ ने जयेंद्र नगर रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की समीक्षा याचिकाओं (Review Petitions) को स्वीकार करते हुए वकीलों के आचरण और पेशेवर दुराचार (Professional Misconduct) पर गंभीर चिंता व्यक्त की। हाई कोर्ट ने मामले में पारित अपने ही पिछले आदेश को वापस (Recall) लेते हुए पूरे मामले की जांच एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) को सौंप दी है [जयेंद्र नगर रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन बनाम गुब्बाला सत्यनारायण मूर्ति व अन्य]

हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां और चिंताएं

काकीनाडा जमीन विवाद व ACB जांच का आदेश
       │
       ┌──────
       ▼           
अदालत के साथ धोखाधड़ी व मिलीभगत                    
• ₹15 करोड़ की सार्वजनिक जमीन को हड़पने का प्रयास।    
• वकीलों और राज्य के अधिकारियों की संदेहास्पद भूमिका। 

हितों का टकराव (Conflict of Interest)
• याचिकाकर्ता की वकील बाद में राज्य सरकार की स्पेशल GP बनी।
• पति-पत्नी के विपरीत पक्षों में होने से गोपनीयता लीक होने का खतरा।

वकीलों की मिलीभगत से कोर्ट के साथ धोखाधड़ी

मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए अदालत ने कहा,“यह कोर्ट इस बात पर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त करता है कि किस तरह याचिकाकर्ताओं और प्रतिवादियों की ओर से पेश हुए अधिवक्ताओं ने एकसुर में इस कोर्ट के साथ धोखाधड़ी (Played fraud) की है। वकीलों का कर्तव्य न्याय प्रणाली में अदालत की सहायता करना है। मिलीभगत, दोहरे प्रतिनिधित्व (Dual Representation) या धोखाधड़ी की घटनाएं इस विश्वास को भारी नुकसान पहुंचाती हैं…”

वैवाहिक संबंध और हितों का टकराव (Conflict of Interest)

अदालत ने पाया कि जो महिला अधिवक्ता पहले याचिकाकर्ताओं (निजी पक्ष) की ओर से पेश हो रही थीं, वे नवंबर 2025 के बाद राज्य सरकार की ओर से स्पेशल गवर्नमेंट प्लीडर (Special GP) बनकर पेश होने लगीं, जबकि उनके पति ने याचिकाकर्ताओं (निजी पक्ष) के वकील के रूप में केस की कमान संभाल ली। कोर्ट ने टिप्पणी की, “हितों के टकराव की जांच जरूरी है। वैवाहिक संबंधों (Marital Relationship) के बीच अनजाने में भी विशेषाधिकार प्राप्त/गोपनीय जानकारी के लीक होने का जोखिम हमेशा बना रहता है।”

कैसे उजागर हुआ फर्जीवाड़ा?

  1. लेआउट की खुली जमीन का विवाद: काकीनाडा के एक स्वीकृत लेआउट में सार्वजनिक उपयोग (पार्क/ओपन स्पेस) के लिए समर्पित जमीन को निजी पक्षकारों ने अपना बताकर याचिका दायर की थी। जयेंद्र नगर रेजिडेंट्स एसोसिएशन के अनुसार, इस जमीन की बाजार दर ₹75,000 प्रति वर्ग गज है और कुल कीमत लगभग ₹15 करोड़ है।
  2. नगर निगम के स्टैंड में अचानक बदलाव: 2015 में काकीनाडा नगर निगम ने जमीन को सार्वजनिक संपत्ति बताया था, लेकिन 2026 में अचानक एक नया हलफनामा (Affidavit) दाखिल कर उल्टा रुख अपना लिया। जब नगर निगम आयुक्त को वर्चुअली समन किया गया, तो उन्होंने माना कि वे नए आए हैं और उन्हें पिछले काउंटर का कोई ज्ञान नहीं था।
  3. वकील द्वारा बिना निर्देश सहमति देना: एसोसिएशन के पूर्व वकील ने बिना किसी स्पष्ट निर्देश के याचिकाकर्ताओं के दावे को स्वीकार कर लिया था, जिससे अदालत गुमराह हुई और उसने पिछला आदेश पारित कर दिया था।

उच्च न्यायालय के सख्त निर्देश

  1. पुराना आदेश वापस (Order Recalled): हाई कोर्ट ने दोनों रिट याचिकाओं को निपटाने वाले अपने पिछले आदेश को रद्द कर दिया है। अब याचिकाओं पर नए सिरे से गुण-दोष (Merits) के आधार पर सुनवाई होगी।
  2. ACB जांच का आदेश: महानिदेशक, एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB), विजयवाड़ा को निर्देश दिया गया है कि वे आईजी (Inspector General) स्तर के अधिकारी से इस पूरे मामले (धोखाधड़ी, मिलीभगत और वकीलों की भूमिका) की जांच कराएं।
  3. रिपोर्ट की समयसीमा: ACB को 12 सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट हाई कोर्ट में सौंपनी होगी। रजिस्ट्रार (न्यायिक) को मामले के सभी रिकॉर्ड तुरंत ACB को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

बॉटमलाइन (The Bottom Line)

आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट का यह रुख स्पष्ट करता है कि मूल्यवान सरकारी/सार्वजनिक संपत्तियों को हड़पने के लिए न्याय प्रणाली या वकीलों के पेशेवर पदों के दुरुपयोग को कड़ा दंड दिया जाएगा। ACB जांच से वकीलों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच की सांठगांठ पर लगाम लगेगी।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
light rain
33.2 ° C
33.2 °
33.2 °
54 %
4.9kmh
100 %
Fri
32 °
Sat
36 °
Sun
34 °
Mon
28 °
Tue
33 °